international

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान: ममदानी के विरोध से क्षमा सावंत और मैरी मिलबेन की भिड़ंत तक, RSS की विचारधारा पर अमेरिकी बहस तेज

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और शनिवार को मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और कई नागरिक अधिकार एवं अंतरधार्मिक संगठन कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई समर्थक इसे हिंदू संस्कृति, संवाद और वैश्विक एकता का मंच बता रहे हैं।

Samant Dubey29 अग. 2026, 02:57 PM IST
खबर शेयर करें:
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान: ममदानी के विरोध से क्षमा सावंत और मैरी मिलबेन की भिड़ंत तक, RSS की विचारधारा पर अमेरिकी बहस तेज

विवाद अब केवल भागवत के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। USCIRF की वीजा संबंधी मांग, भारत सरकार की प्रतिक्रिया, ममदानी का विरोध, क्षमा सावंत की अपील और गायिका मैरी मिलबेन की तीखी प्रतिक्रिया ने इसे अमेरिका में भारत की राजनीति और हिंदुत्व पर एक बड़े वैचारिक टकराव में बदल दिया है।

मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में क्या कार्यक्रम है?

मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वेयर गार्डन स्थित Infosys Theater में आयोजित “Universal Oneness Celebration” में शामिल होंगे। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। कार्यक्रम में उद्यमियों, शिक्षकों, कलाकारों, युवा नेताओं, धार्मिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ मंदिरों तथा योग केंद्रों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य संवाद, सम्मान और साझा मानवता को बढ़ावा देना है। इसे हिंदू त्योहार रक्षाबंधन के संदेश से भी जोड़ा गया है, जो भाई-बहन के रिश्ते और आपसी सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।

WhatsApp Image 2026-08-29 at 14.38.43.jpeg
Image caption

ममदानी ने कार्यक्रम का समर्थन करने से इनकार किया

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति खुलकर जाहिर की है। उन्होंने RSS को ऐसी विचारधारा से जोड़ते हुए चिंता जताई, जिसे उन्होंने बहिष्कारवादी बताया। ममदानी ने कहा कि भारतीय दक्षिणपंथ की ओर से बहुलतावाद को पीछे धकेले जाने का वह विरोध करते हैं।

हालांकि, ममदानी ने यह भी संकेत दिया कि कार्यक्रम निजी आयोजन है और उसे रद्द करने का कानूनी अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, यह अलग सवाल है।


क्षमा सावंत ने भागवत को बताया 'खतरनाक' दक्षिणपंथी नेता

विवाद में अब सिएटल सिटी काउंसिल की पूर्व सदस्य और समाजवादी नेता क्षमा सावंत भी शामिल हो गई हैं।

सावंत ने मोहन भागवत को भारत के “सबसे प्रमुख और खतरनाक” दक्षिणपंथी हिंदू कट्टरपंथी नेताओं में से एक बताया और मेयर ममदानी से कार्यक्रम को रद्द करने की अपील की। उनका रुख कार्यक्रम का विरोध कर रहे अन्य नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों की मांगों के अनुरूप है।

सावंत और उनके समर्थकों का तर्क है कि RSS की विचारधारा को न्यूयॉर्क जैसे बहुलतावादी शहर में सार्वजनिक मंच देना धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए चिंता का विषय है।

मैरी मिलबेन ने ममदानी पर साधा निशाना

क्षमा सावंत के बयान के बाद भारतीय राष्ट्रगान के सार्वजनिक कार्यक्रमों में गायन के लिए चर्चित अफ्रीकी-अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने ममदानी और कार्यक्रम के विरोधियों पर निशाना साधा। मिलबेन ने आरोप लगाया कि ममदानी और समाजवादी विचारधारा से जुड़े विरोधी कार्यक्रम का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP के राजनीतिक रुख के विरोधी हैं। उन्होंने ममदानी और उनके समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि मैडिसन स्क्वेयर गार्डन समाजवादी बयानों के प्रति जवाबदेह नहीं है। मिलबेन ने विरोध करने वालों से कहा कि यदि वे कार्यक्रम नहीं चाहते तो वे स्वयं धन जुटाकर मैडिसन स्क्वेयर गार्डन किराये पर ले सकते हैं। यह बयान सामने आने के बाद विवाद का राजनीतिक रंग और गहरा हो गया है।

USCIRF ने भागवत का वीजा रद्द करने पर विचार करने को कहा

विवाद के बीच U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से मोहन भागवत का वीजा रद्द करने और RSS से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया। USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कथित उल्लंघनों को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, USCIRF की सिफारिश को अमेरिकी सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। वीजा या प्रतिबंधों को लेकर अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

भारत ने USCIRF की टिप्पणियों को खारिज किया

भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF की टिप्पणियों को तुरंत खारिज कर दिया। मंत्रालय ने आयोग को पक्षपाती और विश्वसनीयता से रहित संस्था बताते हुए उसकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। भारत पहले भी USCIRF की भारत संबंधी रिपोर्टों और टिप्पणियों की आलोचना करता रहा है।

इस प्रतिक्रिया के बाद विवाद में भारत-अमेरिका संबंधों और विदेशी संस्थाओं द्वारा भारत के धार्मिक एवं राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी का पहलू भी जुड़ गया।

61 संगठनों ने कार्यक्रम के विरोध में खुला पत्र लिखा

Hindus for Human Rights, Indian American Muslim Council और Interfaith Center of New York समेत कई अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकार संगठनों ने कार्यक्रम का विरोध किया है। इन संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्यक्रम रद्द करने की मांग की।

Hindus for Human Rights की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ के मुताबिक, उनका संगठन उन 61 अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों में शामिल है, जिन्होंने कार्यक्रम के विरोध में खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि विरोध में शामिल लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर यह संदेश देना चाहते हैं कि RSS और उसकी हिंदुत्व विचारधारा उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती।

WhatsApp Image 2026-08-29 at 14.38.43 (1).jpeg
Image caption

आयोजकों का जवाब- मतभेद के बावजूद संवाद जरूरी

कार्यक्रम के आयोजकों ने विरोध के जवाब में कहा है कि अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। आयोजक इस कार्यक्रम को बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक संवाद के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग विचारों के बावजूद सम्मान और साझा मानवता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यही इस विवाद का केंद्रीय बिंदु बन गया है—एक पक्ष इसे संवाद और सांस्कृतिक एकता का मंच बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे RSS की हिंदुत्व विचारधारा के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के रूप में देख रहा है।

अमेरिकी मीडिया में RSS की भूमिका पर सवाल

अमेरिकी मीडिया में इस पूरे विवाद के दौरान RSS की भारत की राजनीति में भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। Religion News Service (RNS) सहित कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में RSS को BJP की विचारधारा से जोड़कर देखा गया है। आलोचक आरोप लगाते हैं कि RSS की विचारधारा का भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर प्रभाव पड़ता है। वहीं RSS खुद को हिंदू समाज को संगठित करने वाला सांस्कृतिक संगठन बताता है और उस पर लगाए जाने वाले कई आरोपों को खारिज करता रहा है।

हिंदू-अमेरिकी समुदाय में भी एकराय नहीं

इस विवाद की खास बात यह है कि अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय के भीतर भी इसे लेकर एकमत नहीं है। कुछ हिंदू-अमेरिकी संगठन भागवत के कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं और इसे अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन बता रहे हैं। दूसरी तरफ Hindus for Human Rights जैसे संगठन RSS की विचारधारा की आलोचना करते हुए कार्यक्रम के विरोध में खड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी हिंदू समुदाय में भारत की राजनीति, हिंदुत्व और RSS को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं।

भागवत का अमेरिका दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?

भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष में हो रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद उनकी यात्रा टोरंटो और ब्रिटेन तक जाने वाली है। RSS के लिए अमेरिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और भारतीय-अमेरिकी समुदाय का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। भागवत की यात्रा को RSS की वैश्विक पहुंच और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संपर्क बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

बहस अब दो विचारों के बीच

न्यूयॉर्क का यह विवाद अब केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि मोहन भागवत का कार्यक्रम होना चाहिए या नहीं।

इसके केंद्र में कई बड़े सवाल हैं:

  • क्या RSS को अमेरिका में एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में देखा जाना चाहिए या हिंदुत्व राजनीति से जुड़े संगठन के रूप में?
  • क्या किसी निजी कार्यक्रम की विचारधारा के आधार पर उसका विरोध उचित है?
  • न्यूयॉर्क के मेयर किसी निजी कार्यक्रम को रोकने की सीमा तक जा सकते हैं?
  • अमेरिकी हिंदू समुदाय में भारत की राजनीति का कितना प्रभाव है?
  • क्या भागवत का दौरा RSS की वैश्विक छवि को मजबूत करने की कोशिश है?
  • और क्या इस विवाद का असर भारत-अमेरिका संबंधों तथा भारतीय प्रवासी राजनीति पर पड़ेगा?

ममदानी और क्षमा सावंत जैसे आलोचक RSS की विचारधारा को बहुलतावाद के लिए चुनौती मान रहे हैं, जबकि मैरी मिलबेन और कार्यक्रम के समर्थक इसे राजनीतिक विरोध से प्रेरित अभियान बता रहे हैं।

इसी टकराव के बीच भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम अब एक सामान्य सामुदायिक आयोजन से कहीं बड़ा मुद्दा बन चुका है। यह RSS, हिंदुत्व, धार्मिक स्वतंत्रता, भारतीय-अमेरिकी राजनीति और अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चल रही बहस का प्रमुख केंद्र बन गया है।