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बांद्रा फुटबॉल मैदान पर हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप: BMC और महाराष्ट्र सरकार को आगे की कार्रवाई से रोका, ‘कानून की गरिमा दांव पर’

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के बांद्रा स्थित ऐतिहासिक नेविले डिसूजा फुटबॉल मैदान को प्रदर्शनी/कन्वेंशन सेंटर में बदलने की बीएमसी (BMC) की योजना पर कड़ा रुख अपनाते हुए रोक लगा दी है। 1 10 अगस्त को कोर्ट में स्थिति ज्यों की त्यों (Status Quo) बनाए रखने के मौखिक आश्वासन के बावजूद 18 अगस्त को बीएमसी महासभा द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताई और साफ किया कि कानून की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Sonali21 अग. 2026, 08:12 PM IST
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बांद्रा फुटबॉल मैदान पर हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप: BMC और महाराष्ट्र सरकार को आगे की कार्रवाई से रोका, ‘कानून की गरिमा दांव पर’
मुंबई: 
बांद्रा रेक्लेमेशन के प्रसिद्ध नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान को प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर में बदलने की योजना पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) और महाराष्ट्र सरकार को 18 अगस्त को BMC की महासभा द्वारा मंजूर किए गए आरक्षण परिवर्तन के प्रस्ताव पर आगे कोई कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में BMC के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई, क्योंकि 10 अगस्त को हाईकोर्ट के समक्ष BMC की ओर से यथास्थिति बनाए रखने का मौखिक आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद 18 अगस्त को BMC की General Body ने आरक्षण बदलने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया।

क्या है पूरा विवाद?
बांद्रा रेक्लेमेशन स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान करीब 8,450 वर्ग मीटर की MHADA के स्वामित्व वाली जमीन पर है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 1983 में इस जमीन का मूल आरक्षण कन्वेंशन और ट्रेड फेयर सेंटर के लिए था। बाद में जमीन पर फुटबॉल मैदान मौजूद होने के कारण इसे Development Plan 2034 में recreation ground/playground के रूप में दर्ज किया गया। अब MHADA की ओर से मूल आरक्षण को वापस लाने की मांग के बाद BMC ने इस जमीन को खेल मैदान के बजाय Exhibition Centre के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया। BMC Improvement Committee ने जून में प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और बाद में इसे General Body के सामने रखा गया। 18 अगस्त 2026 को BMC की महासभा ने इसे मंजूरी दे दी।

MFA ने 7 अगस्त को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन (MFA) ने 7 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रस्तावित आरक्षण परिवर्तन को चुनौती दी। MFA का आरोप था कि यह कदम मनमाना और गैरकानूनी है तथा इससे मुंबई के महत्वपूर्ण फुटबॉल मैदानों में से एक खत्म हो जाएगा। MFA ने यह भी सवाल उठाया कि आरक्षण बदलने से पहले खेलों पर इसके प्रभाव का अध्ययन, खिलाड़ियों और मैदान के उपयोगकर्ताओं का सर्वेक्षण या feasibility study क्यों नहीं कराई गई।

10 अगस्त को BMC ने कोर्ट को दिया था आश्वासन
10 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान BMC ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। इसी दौरान BMC की ओर से अदालत को मौखिक आश्वासन दिया गया कि अगली सुनवाई तक प्रस्तावित आरक्षण परिवर्तन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और स्थिति यथावत रखी जाएगी। लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद 18 अगस्त को BMC General Body ने आरक्षण बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यहीं से विवाद और गंभीर हो गया।

हाईकोर्ट ने BMC को क्यों फटकारा?
20 अगस्त को Acting Chief Justice Ravindra Ghuge और Justice Gautam Ankhad की पीठ के सामने मामला आया। BMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Girish Godbole ने अदालत को बताया कि Municipal Commissioner Ashwini Bhide को 10 अगस्त की सुनवाई में दिए गए आश्वासन की जानकारी नहीं थी। यह भी बताया गया कि MFA की ओर से भेजा गया communication भी BMC के Law Department द्वारा Commissioner तक नहीं पहुंचाया गया था।

इस पर अदालत ने बेहद गंभीर टिप्पणी की।
पीठ ने कहा कि जब अदालत के समक्ष कोई आश्वासन दिया जाता है और उस पर भरोसा करके याचिकाकर्ता आगे बढ़ता है, तो उसके विपरीत कार्रवाई करना कानून की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन जाता है। अदालत ने कहा कि “majesty of law” दांव पर है और यदि निर्वाचित प्रतिनिधि या प्राधिकरण अदालत की खिल्ली उड़ाने जैसा व्यवहार करेंगे तो यह गंभीर समस्या है।

‘लोग फुटबॉल कहां खेलेंगे?’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि मुंबई में खेल के मैदानों की कमी को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने पूछा कि आखिर लोग फुटबॉल कहां खेलेंगे? कोर्ट ने कहा कि कुछ स्थान खुले रखने जरूरी हैं, वरना अगली पीढ़ी यह भूल जाएगी कि मैदानी खेल क्या होते हैं और मैदान क्या होता है।

900 से ज्यादा मैच और FIFA-स्तरीय सुविधा
MFA की याचिका और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नेविल डिसूजा मैदान में FIFA-standard artificial turf है, करीब 5,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है और यहां हर सीजन 900 से अधिक आधिकारिक मैच आयोजित होते हैं। MFA का कहना है कि यह मुंबई के फुटबॉल ढांचे का महत्वपूर्ण केंद्र है।

कितने खिलाड़ियों पर पड़ेगा असर?
फुटबॉल से जुड़े लोगों के अनुसार इस मैदान पर अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ी, क्लब और प्रशिक्षक निर्भर हैं। नेविल डिसूजा के बेटे Nigel D'Souza ने भी हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राहत व्यक्त की और कहा कि इस मैदान को खोना grassroots football के लिए बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने दावा किया कि 14,000 से अधिक युवा खिलाड़ियों समेत बड़ी संख्या में खिलाड़ी और प्रशिक्षक इस मैदान पर निर्भर हैं।

अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने फिलहाल BMC और महाराष्ट्र सरकार को 18 अगस्त के General Body Resolution तथा मैदान के संबंध में आगे कोई कदम उठाने से रोक दिया है। यह रोक अंतिम फैसला नहीं है बल्कि अंतरिम आदेश है। अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में दी गई है। उस समय अदालत मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। इस बीच BMC को आरक्षण परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोक दिया गया है। इसलिए फिलहाल यह कहना गलत होगा कि मैदान स्थायी रूप से बच गया है या कन्वेंशन सेंटर की योजना पूरी तरह रद्द हो गई है। अंतिम स्थिति आगे आने वाले न्यायालयीन आदेशों पर निर्भर करेगी।