law-order
FSSAI लाइसेंस सस्पेंड करने का मकसद जनस्वास्थ्य की रक्षा, कमियां दूर होने के बाद अनिश्चितकाल तक रोक नहीं: बॉम्बे HC
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण FSSAI लाइसेंस निलंबित करने का उद्देश्य जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है, न कि प्रतिष्ठान को अनिश्चितकाल तक बंद रखना। कोर्ट ने कहा कि दोबारा जांच में कमियां दूर होकर 97% अनुपालन सामने आने पर लाइसेंस निलंबन हटाया जाना चाहिए और कानून के मुताबिक आगे निगरानी जारी रखी जा सकती है।

खाद्य सुरक्षा नियमों में कमी मिलने पर लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है, लेकिन कमियां दूर होने के बाद भी लाइसेंस पर अनिश्चितकाल तक रोक नहीं लगाई जा सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट ने FSSAI लाइसेंस निलंबन से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया कि लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिष्ठान को हमेशा के लिए बंद करना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। दोबारा निरीक्षण में अगर प्रतिष्ठान बेहतर अनुपालन हासिल कर लेता है, तो निलंबन हटाया जाना चाहिए और कानून के मुताबिक निगरानी जारी रखी जा सकती है। यह फैसला होटल अलंकार की याचिका पर सुनाया गया। होटल ने 8 जुलाई 2026 को जारी FSSAI लाइसेंस निलंबन आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति शर्मिला यू. देशमुख और न्यायमूर्ति नीरज पी. धोटे की खंडपीठ ने सुनवाई की। मामले की शुरुआत 7 जुलाई 2026 को हुए अचानक निरीक्षण से हुई। इस निरीक्षण के दौरान होटल का अनुपालन स्तर 69 प्रतिशत दर्ज किया गया। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने के बाद अगले ही दिन, यानी 8 जुलाई को, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32(3) के तहत होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। हालांकि, होटल ने निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए। इसके बाद 31 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठान का दोबारा निरीक्षण किया गया। इस बार निरीक्षण रिपोर्ट में होटल का अनुपालन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानी पहले निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के बाद होटल ने खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन में काफी सुधार किया।
होटल की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि दोबारा निरीक्षण की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस निलंबन हटाया जाना चाहिए था। याचिका में यह भी कहा गया कि अपीलीय आदेश में 31 जुलाई की पुनः निरीक्षण रिपोर्ट पर उचित विचार नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने इस दलील को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि खाद्य लाइसेंस के निलंबन का उद्देश्य जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। यदि किसी प्रतिष्ठान में ऐसी कमियां पाई जाती हैं जिनसे लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने की आशंका है, तो अधिकारियों को कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन जब वही कमियां बाद में दूर कर दी जाती हैं और पुनः निरीक्षण में प्रतिष्ठान का अनुपालन स्तर बेहतर पाया जाता है, तो निलंबन को अनिश्चितकाल तक जारी रखना अपने मूल उद्देश्य से परे हो जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कमियां दूर होने का मतलब यह नहीं है कि प्रतिष्ठान पर भविष्य में कोई निगरानी नहीं रहेगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को कानून के तहत लगातार निगरानी और निरीक्षण करने का अधिकार रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिष्ठान आगे भी निर्धारित मानकों का पालन करता रहे। हाईकोर्ट ने माना कि 31 जुलाई 2026 की पुनः निरीक्षण रिपोर्ट में 97 प्रतिशत अनुपालन दर्ज होने के बावजूद उस रिपोर्ट पर उचित विचार नहीं किया गया। अदालत ने इसी आधार पर लाइसेंस निलंबन जारी रखने की कार्रवाई पर हस्तक्षेप किया। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने एक तरफ जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ कर दिया कि सुधार के बाद दंडात्मक कार्रवाई को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। यानी नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी, लेकिन नियमों का पालन शुरू होने के बाद कानून का उद्देश्य सुधार सुनिश्चित करना है, प्रतिष्ठान को हमेशा के लिए बंद रखना नहीं।
