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‘हनी ट्रैप’ का बहाना नहीं चलेगा! पाकिस्तानी महिला को एयरफोर्स स्टेशन और राफेल जेट की तस्वीरें भेजने के आरोपी को P&H HC से जमानत नहीं

हनी ट्रैप’ में फंसने की दलील देकर संवेदनशील सैन्य तस्वीरें साझा करने को सही नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन और राफेल जेट की तस्वीरें पाकिस्तान में सक्रिय महिला को भेजने के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

Sonali11 सित. 2026, 07:48 PM IST
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‘हनी ट्रैप’ का बहाना नहीं चलेगा! पाकिस्तानी महिला को एयरफोर्स स्टेशन और राफेल जेट की तस्वीरें भेजने के आरोपी को P&H HC से जमानत नहीं


पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला कैंट स्थित एयरफोर्स स्टेशन और राफेल लड़ाकू विमानों की तस्वीरें पाकिस्तान में सक्रिय एक महिला को कथित तौर पर भेजने के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज है। कोर्ट ने कहा कि भले ही आरोपी यह दावा करे कि वह ‘हनी ट्रैप’ का शिकार हुआ था, लेकिन इससे संवेदनशील सैन्य जानकारी और तस्वीरें साझा करने का कृत्य उचित नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष आरोपी ने जमानत के लिए याचिका दायर की थी। उस पर आरोप है कि उसने अंबाला कैंट स्थित एयरफोर्स स्टेशन और वहां मौजूद राफेल लड़ाकू विमानों से संबंधित तस्वीरें एक ऐसी महिला के साथ साझा कीं, जो पाकिस्तान से संपर्क में थी। आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह कथित तौर पर ‘हनी ट्रैप’ में फंस गया था। बचाव पक्ष की दलील का आशय था कि महिला ने आरोपी को अपने प्रभाव में लेकर उससे तस्वीरें हासिल कीं और आरोपी की भूमिका को इसी परिस्थिति के आधार पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी वास्तव में किसी तरह के हनी ट्रैप का शिकार भी हुआ हो, तब भी संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठान से संबंधित तस्वीरें किसी संदिग्ध व्यक्ति के साथ साझा करने का कोई औचित्य नहीं हो सकता।


मामले में आरोपी के खिलाफ Official Secrets Act के प्रावधानों के साथ BNS की धारा 152 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है। ऐसे मामलों में अदालतें आरोपों की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित प्रभावों को भी ध्यान में रखती हैं। हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करते हुए कथित रूप से साझा की गई तस्वीरों की प्रकृति को महत्वपूर्ण माना। एयरफोर्स स्टेशन और राफेल जैसे सैन्य संसाधनों से जुड़ी तस्वीरों को संवेदनशील मानते हुए कोर्ट ने आरोपी को इस स्तर पर राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आरोपी द्वारा अपने बचाव में व्यक्तिगत परिस्थितियों या किसी अन्य व्यक्ति के प्रभाव में आने की दलील देने मात्र से संवेदनशील जानकारी साझा करने की गंभीरता समाप्त नहीं हो जाती। हाईकोर्ट ने अंततः आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसका अर्थ यह है कि इस चरण पर आरोपी को नियमित जमानत का लाभ नहीं मिला है। हालांकि, जमानत खारिज होना अपने आप में आरोपों पर अंतिम दोषसिद्धि नहीं है और मामले का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा। इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने को लेकर अदालतों के सख्त रुख को दर्शाती है। कोर्ट ने साफ किया कि ‘हनी ट्रैप’ का आरोप भी संवेदनशील रक्षा तस्वीरें साझा करने के लिए स्वतः कानूनी बचाव नहीं बन सकता।