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बेंगलुरु में 100+ इलेक्ट्रिक बसें रुकीं

बेंगलुरु के कात्रिगुप्पे स्थित BMTC कामाक्षी डिपो-13 में आउटसोर्स ड्राइवरों ने वेतन समानता की मांग को लेकर 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों का संचालन रोक दिया। ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें ₹850 प्रतिदिन मिल रहे हैं, जबकि अन्य डिपो में ₹950 दिए जा रहे हैं। विरोध के चलते Banashankari, Electronics City और एयरपोर्ट रूट प्रभावित हुए।

Neha Sharma12 अग. 2026, 07:39 PM IST
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बेंगलुरु में 100+ इलेक्ट्रिक बसें रुकीं

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर BMTC की 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रभावित हुआ। कात्रिगुप्पे स्थित कामाक्षी डिपो-13 में आउटसोर्स ड्राइवरों ने वेतन में समानता की मांग करते हुए बसें चलाने से इनकार किया। इसके चलते शहर के कई महत्वपूर्ण रूटों पर सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रभावित हुई। विरोध कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल प्रतिदिन ₹850 का भुगतान किया जा रहा है, जबकि अन्य डिपो में काम करने वाले ड्राइवरों को करीब ₹950 प्रतिदिन मिल रहे हैं। ड्राइवर इसी अंतर को खत्म कर समान वेतन देने की मांग कर रहे हैं।


कात्रिगुप्पे डिपो में बस संचालन प्रभावित होने से Banashankari, Electronics City और Kempegowda International Airport की ओर जाने वाली सेवाओं पर असर पड़ा। इन इलाकों में बड़ी संख्या में रोजाना काम, पढ़ाई और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए यात्रा करने वाले लोग BMTC बसों पर निर्भर रहते हैं। ड्राइवरों के मुताबिक ₹850 और ₹950 के बीच रोजाना ₹100 का अंतर है। महीने के लगभग 26 कार्यदिवस के हिसाब से देखें तो यह अंतर करीब ₹2,600 प्रति माह बैठता है। ड्राइवरों का कहना है कि जब काम और जिम्मेदारियां समान हैं तो भुगतान में इतना अंतर नहीं होना चाहिए।


आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन और सेवा शर्तों का मुद्दा

यह विवाद सिर्फ एक डिपो तक सीमित वेतन मांग के रूप में नहीं देखा जा रहा है। बेंगलुरु की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आउटसोर्स और निजी ऑपरेटरों से जुड़े ड्राइवरों की भूमिका बढ़ी है। ऐसे में वेतन, नौकरी की सुरक्षा और सेवा शर्तों में समानता का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।


अब नजर समाधान पर

कात्रिगुप्पे डिपो में ड्राइवरों के विरोध के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि BMTC और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी वेतन समानता की मांग पर क्या फैसला लेते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द सहमति बनती है तो बस सेवाओं को सामान्य किया जा सकता है। वहीं, यदि वेतन विवाद लंबा खिंचता है तो बेंगलुरु के कई महत्वपूर्ण रूटों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर Banashankari, Electronics City और एयरपोर्ट से जुड़े यात्रियों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर सकती है।


यह मामला सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन और सेवा शर्तों को लेकर एक बड़ा सवाल भी उठाता है। इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार शहर के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ जुड़े कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।