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राजस्थान हाईकोर्ट में बड़ा विवाद: सुप्रीम कोर्ट जज संदीप मेहता ने CJI से Acting CJ एसपी शर्मा को हटाने की मांग की

राजस्थान हाईकोर्ट के भीतर से उठी एक चिट्ठी अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है—और मामला बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को एक नहीं, बल्कि लगातार तीन पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के Acting Chief Justice जस्टिस एसपी शर्मा के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस मेहता ने कथित पक्षपात, रोस्टर और प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल, न्यायिक अधिकारियों के कथित उत्पीड़न और संस्थागत कुप्रबंधन जैसे मुद्दे उठाते हुए मांग की है कि जस्टिस शर्मा की जगह किसी दूसरे हाईकोर्ट के Chief Justice को तत्काल राजस्थान हाईकोर्ट की कमान सौंपी जाए। सवाल अब सिर्फ आरोपों का नहीं, बल्कि यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस असाधारण शिकायत पर क्या कदम उठाता है।

Sonali26 अग. 2026, 01:46 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट में बड़ा विवाद: सुप्रीम कोर्ट जज संदीप मेहता ने CJI से Acting CJ एसपी शर्मा को हटाने की मांग की

नई दिल्ली/जोधपुर:

 राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता की ओर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत को लिखे गए तीन पत्रों ने न्यायिक हलकों में असाधारण हलचल पैदा कर दी है। जस्टिस मेहता ने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त 2026 को लिखे पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के Acting Chief Justice जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और CJI से तत्काल किसी दूसरे हाईकोर्ट के Chief Justice को राजस्थान हाईकोर्ट की कमान सौंपने का अनुरोध किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आरोप किसी बाहरी पक्ष की शिकायत के तौर पर नहीं, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज और वर्तमान सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संदीप मेहता द्वारा CJI को भेजे गए पत्रों में उठाए गए हैं। हालांकि, पत्रों में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं और जस्टिस शर्मा की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिवाद/प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

जस्टिस मेहता ने क्या आरोप लगाए?

2 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि Acting Chief Justice के रूप में जस्टिस शर्मा द्वारा शक्तियों के इस्तेमाल के कई मामले ऐसे हैं जो संस्थान के प्रमुख के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें जस्टिस शर्मा के न्यायिक कामकाज को लेकर कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया उनकी integrity को लेकर संदेह पैदा होता है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्र में यह भी दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कई जजों ने उनसे मुलाकात कर जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर चिंता जताई। पत्र के मुताबिक, इन न्यायाधीशों ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा कथित तौर पर अपने साथी जजों को तबादले सहित प्रतिकूल प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी देते हैं और CJI से अपनी निकटता का हवाला देते हैं। इन दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी न्यायिक निर्णय में इन आरोपों की सत्यता स्थापित नहीं हुई है।

केस लिस्टिंग और रोस्टर पावर पर भी सवाल

10 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने कथित तौर पर कुछ वकीलों के प्रति पक्षपात, केस लिस्टिंग और रोस्टर से जुड़ी प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए।  रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि केसों की लिस्टिंग में कथित तौर पर हेरफेर किया गया और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कुछ प्रभावशाली या समृद्ध litigants को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। यह आरोप विशेष रूप से गंभीर इसलिए है क्योंकि हाईकोर्ट के Chief Justice के पास रोस्टर निर्धारित करने और विभिन्न मामलों को अलग-अलग बेंचों के समक्ष सूचीबद्ध करने से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्तियां होती हैं।

“Why such a long rope?”—जस्टिस मेहता का सवाल

17 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने अपने पहले के पत्रों में उठाए गए कथित “gross maladministration” और “seriously questionable activities” का फिर उल्लेख किया और सवाल किया कि जस्टिस शर्मा को इतने लंबे समय तक Acting Chief Justice के पद पर क्यों बने रहने दिया जा रहा है। जस्टिस मेहता ने यह भी इंगित किया कि जस्टिस शर्मा करीब 10 महीने से Acting Chief Justice के रूप में काम कर रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक न्यायिक डायरेक्टरी भी जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को Acting Chief Justice के रूप में दर्शाती है।

जस्टिस शर्मा का राजस्थान से ट्रांसफर और वापसी का पूरा मामला

यह विवाद जस्टिस शर्मा के पुराने ट्रांसफर इतिहास से भी जुड़ा है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। बाद में उनका ट्रांसफर पटना हाईकोर्ट और फिर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट किया गया। मार्च 2023 में तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान वापस भेजने के उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी। इसके बाद मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस शर्मा को उनके parent High Court यानी राजस्थान हाईकोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की। यह तथ्य सुप्रीम कोर्ट की Collegium Resolutions सूची और उस समय की रिपोर्टों से भी पुष्ट होता है।

न्यायिक अधिकारियों को कथित रूप से “victimise” करने का आरोप

जस्टिस मेहता ने अपने 17 अगस्त के पत्र में न्यायिक अधिकारियों के कथित victimisation का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने एक serving Rajasthan High Court judge की ओर से मिले संदेश का उल्लेख किया, जिसमें जस्टिस शर्मा पर कथित रूप से व्यक्तिगत दुर्भावना के कारण न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ vindictive कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया था। पत्र में एक वरिष्ठ जिला न्यायिक अधिकारी, जो संबंधित जज की पत्नी हैं, के खिलाफ कथित कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। जस्टिस मेहता ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।

जोधपुर के नए District Court भवन को लेकर भी सवाल

जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन से जुड़े कुछ फैसलों का उदाहरण भी दिया। 17 अगस्त के पत्र के मुताबिक, जोधपुर का नया District Court (Metro) भवन करीब 40 अदालतों वाला परिसर है और कथित तौर पर लगभग एक साल से operationally और functionally तैयार था। जस्टिस मेहता का आरोप है कि इसके बावजूद जस्टिस शर्मा ने इसके उद्घाटन को रोक दिया और infrastructure में व्यापक बदलाव के निर्देश दिए। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में राजस्थान में न्यायिक ढांचे और नए कोर्ट भवनों के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक कार्यक्रम हुए हैं। अगस्त में CJI सूर्यकांत ने जोधपुर में नए District Court भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने पर जोर दिया था।

“Hit Sixes” वाला संदर्भ क्या है?

जस्टिस मेहता के पत्रों में सुप्रीम कोर्ट की एक हालिया टिप्पणी का संदर्भ भी सामने आया है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक अलग मामले में  रिटायरमेंट के करीब न्यायाधीशों द्वारा जल्दबाजी में महत्वपूर्ण आदेश पारित करने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए “hit sixes” जैसे क्रिकेट संदर्भ का इस्तेमाल किया था।

Bar & Bench के अनुसार, जस्टिस मेहता ने इसी संदर्भ को जस्टिस शर्मा के कामकाज से जोड़ते हुए अपने पत्र में इस्तेमाल किया।

चार महिला वकीलों के नाम की सिफारिश पर भी आरोप

मामले का एक और संवेदनशील पहलू चार महिला वकीलों की हाईकोर्ट जज के रूप में elevation के लिए कथित recommendation से जुड़ा है।  जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि इन चारों में से कोई भी कथित तौर पर सक्रिय प्रैक्टिस में नहीं है और उनके संबंध प्रभावशाली वरिष्ठ वकील या सेवानिवृत्त जजों से बताए गए हैं। यह आरोप भी अभी केवल पत्र में लगाए गए दावे हैं। संबंधित महिलाओं के खिलाफ किसी न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक जांच का तथ्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे आरोप के रूप में ही प्रकाशित किया जाना चाहिए।

जस्टिस शर्मा कब रिटायर होंगे?

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की सेवानिवृत्ति 26 सितंबर 2026 को निर्धारित है। केंद्र सरकार के हाईकोर्ट Chief Justices संबंधी आधिकारिक दस्तावेज में भी उनकी retirement date 26 सितंबर 2026 दर्ज है। इसका अर्थ है कि जस्टिस मेहता के 17 अगस्त के पत्र के समय भी जस्टिस शर्मा की सेवानिवृत्ति में लगभग डेढ़ महीने का समय बचा था। यही वजह है कि उनके पत्र में Acting Chief Justice के रूप में लंबे समय तक बने रहने और उनके प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन जाते हैं।

जस्टिस संदीप मेहता कौन हैं और राजस्थान से उनका क्या संबंध है?

जस्टिस संदीप मेहता स्वयं राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज रह चुके हैं। उन्हें 30 मई 2011 को राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। बाद में वे Gauhati High Court के Chief Justice बने और 9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदभार संभाला। इस पृष्ठभूमि में उनके द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन को लेकर CJI को सीधे पत्र लिखना न्यायिक संस्थान के भीतर असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

इन पत्रों के बाद मुख्य सवाल यह है कि CJI सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट Collegium इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। जस्टिस मेहता ने केवल किसी प्रशासनिक निर्णय पर आपत्ति नहीं जताई है, बल्कि उन्होंने Acting Chief Justice के पद पर किसी दूसरे हाईकोर्ट से Chief Justice नियुक्त करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि लगातार अनुरोधों पर कार्रवाई न होना संस्थान के हित के खिलाफ है। हालांकि, अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में CJI या सुप्रीम कोर्ट Collegium की ओर से जस्टिस मेहता के आरोपों पर कोई अंतिम सार्वजनिक निर्णय सामने नहीं आया है। इसी तरह जस्टिस शर्मा की ओर से भी आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

संवैधानिक रूप से Acting Chief Justice की नियुक्ति कैसे होती है?

जब किसी हाईकोर्ट के Chief Justice का पद रिक्त होता है या Chief Justice अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होते हैं, तो संविधान का Article 223 Acting Chief Justice की व्यवस्था करता है। राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस शर्मा 28 सितंबर 2025 से Acting Chief Justice के रूप में कार्य कर रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भी उनकी नियुक्ति की तारीख 28 सितंबर 2025 और सेवानिवृत्ति की तारीख 26 सितंबर 2026 दर्ज है। राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ा यह घटनाक्रम इसलिए असाधारण है क्योंकि एक sitting Supreme Court judge ने स्वयं CJI को लगातार तीन पत्र लिखकर किसी हाईकोर्ट के Acting Chief Justice के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। फिलहाल सबसे जरूरी सावधानी यही है कि जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों में लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य न माना जाए। आरोपों की स्वतंत्र जांच या संबंधित संवैधानिक प्राधिकारियों के निर्णय के बाद ही उनकी सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि 2, 10 और 17 अगस्त के तीन पत्रों ने राजस्थान हाईकोर्ट के नेतृत्व, रोस्टर व्यवस्था, प्रशासनिक शक्तियों और न्यायिक जवाबदेही को लेकर एक गंभीर संस्थागत सवाल खड़ा कर दिया है।