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राम मंदिर दान पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की FIR पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, ‘साजिश’ के दावे से मचा हड़कंप
राम मंदिर दान मामले की रिपोर्टिंग से चर्चा में आए पत्रकार अभिषेक उपाध्याय अब खुद कानूनी घेरे में हैं। गाजियाबाद में दर्ज रोड-रेज FIR को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे अपनी खोजी पत्रकारिता के बाद की गई कथित कार्रवाई बताया है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ 25 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

नई दिल्ली:
राम मंदिर दान मामले में कथित अनियमितताओं पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज FIR अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गई है। पत्रकार ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज FIR को चुनौती देते हुए इसे कथित तौर पर अपनी खोजी रिपोर्टिंग के बाद की गई कार्रवाई बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले को 25 अगस्त को सुनने पर सहमति जताई। याचिका में FIR रद्द करने के साथ गिरफ्तारी से सुरक्षा और वैकल्पिक रूप से जांच उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द नहीं की है और न ही उपाध्याय के आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है।
किस FIR को दी गई है चुनौती?
उपाध्याय ने FIR नंबर 678/2026 को चुनौती दी है। यह FIR 18 अगस्त 2026 को गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में कथित रोड-रेज की घटना को लेकर दर्ज हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक FIR में भारतीय न्याय संहिता, SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और Information Technology Act के प्रावधान लगाए गए हैं। याचिका में FIR के अलग-अलग हिस्सों में धाराओं को लेकर कथित विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
शिकायत में क्या आरोप लगाया गया?
शिकायत के मुताबिक, 18 अगस्त को Shipra Mall के पास एक मोटरसाइकिल को पीछे से Baleno कार ने टक्कर मारी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद कार चालक ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी दी। उपाध्याय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि वह अपनी नाबालिग बेटी को स्कूल से लेकर लौट रहे थे और मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति उनकी कार के पास आकर विवाद की स्थिति पैदा करने लगा। उनका दावा है कि उन्होंने विवाद को बढ़ाने के बजाय उसे शांत करने की कोशिश की।
पत्रकार का बड़ा आरोप- ‘रिपोर्टिंग की वजह से बनाया गया निशाना’
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि रोड-रेज की FIR उनके खिलाफ की गई कथित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का हिस्सा है। याचिका में उनके ‘Top Secret’ नामक स्वतंत्र न्यूज प्लेटफॉर्म की रिपोर्टिंग का उल्लेख किया गया है। उपाध्याय का दावा है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं, विशेष रूप से राम जन्मभूमि परिसर में दान और चढ़ावे से संबंधित मामलों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। याचिका के अनुसार, राम मंदिर दान मामले पर उनकी शुरुआती रिपोर्ट जून 2026 में प्रकाशित हुई थीं और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की SIT ने जांच शुरू की। याचिका में यह भी कहा गया है कि 25 जून को अयोध्या में SIT की जांच के बाद FIR दर्ज की गई थी।
IAS अधिकारी से जुड़ी रिपोर्ट के बाद भी विवाद बढ़ा
याचिका में एक अन्य रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। उपाध्याय के अनुसार, उन्होंने 19 अगस्त को उत्तर प्रदेश के एक IAS अधिकारी से संबंधित कथित कृषि भूमि खरीद का मामला उठाया था। याचिका में आरोप है कि भदोही में करीब ₹20 करोड़ की कृषि भूमि खरीद से संबंधित यह रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। उपाध्याय का दावा है कि इस रिपोर्ट के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई और पुलिस गतिविधियां तेज हुईं। इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस पर CCTV फुटेज को लेकर भी आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कथित रोड-रेज स्थल के आसपास मौजूद दुकानों और प्रतिष्ठानों से CCTV फुटेज हासिल करने की कोशिश की गई। उपाध्याय का दावा है कि पुलिसकर्मी उनसे पहले ही कुछ प्रतिष्ठानों तक पहुंच गए थे और CCTV फुटेज उपलब्ध न कराने अथवा हटाने के लिए दबाव बनाया गया। यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि CCTV से जुड़े ये आरोप फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में किए गए दावे हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों को सत्यापित नहीं किया है।
पुलिस टीम के घर पहुंचने का दावा
याचिका में उपाध्याय ने दावा किया है कि 20 अगस्त की रात करीब 10:30 बजे लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे। उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनकी पत्नी और दो बेटियां वहां थीं। याचिका के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर परिसर में प्रवेश किया और बाद में उन्हें बताया गया कि पुलिस उन्हें FIR के सिलसिले में हिरासत में लेना चाहती है। उपाध्याय ने FIR की कॉपी और वाहन से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की।
Article 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपाध्याय ने संविधान के Article 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने FIR quashing के अलावा गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की है। वैकल्पिक तौर पर उन्होंने कहा है कि यदि जांच जारी रहती है तो वह जांच में शामिल होकर सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय दिल्ली पुलिस, CBI या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
राम मंदिर SIT को लेकर भी पहले उठ चुके हैं सवाल
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में राम मंदिर दान मामले की जांच के लिए गठित SIT भी चर्चा में रही है। The Wire की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत का नाम 2019 में दर्ज एक कथित cheating और forgery FIR में आया था। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला उस समय का है जब पंत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी में वरिष्ठ पद पर थे। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR में नाम आने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। The Federal ने भी इसी मामले पर रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए राम मंदिर दान जांच की विश्वसनीयता को लेकर सवालों का उल्लेख किया था। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उपाध्याय ने स्वयं SIT की कार्यप्रणाली और उसके प्रमुख से जुड़े कथित पुराने मामले पर रिपोर्टिंग की थी। हालांकि, SIT प्रमुख के खिलाफ लगाए गए पुराने आरोप और मौजूदा FIR के बीच कोई प्रत्यक्ष कानूनी संबंध अदालत ने अभी स्थापित नहीं किया है।
2024 में भी सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
अभिषेक उपाध्याय पहले भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज एक FIR के मामले में उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी। वह मामला उत्तर प्रदेश प्रशासन में जातीय समीकरणों को लेकर उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित था। इस पुराने मामले का मौजूदा FIR से सीधा कानूनी संबंध नहीं है, लेकिन यह उपाध्याय के खिलाफ दर्ज पूर्व कानूनी कार्रवाई की पृष्ठभूमि को समझने में उपयोगी है।
25 अगस्त को क्या होगा?
अब सबकी नजर 25 अगस्त की सुनवाई पर है। सोमवार को CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले को अगले दिन सुनने पर सहमति जताई। सुनवाई में पत्रकार की ओर से FIR रद्द करने, गिरफ्तारी से संरक्षण और स्वतंत्र जांच की मांग पर तत्काल राहत मांगी जा सकती है। दूसरी ओर, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और पुलिस इन आरोपों पर क्या जवाब देती है। फिलहाल कानूनी स्थिति यही है कि FIR मौजूद है और उसके आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है। उपाध्याय द्वारा लगाए गए ‘साजिश’, ‘प्लांटेड केस’ और CCTV से जुड़े आरोप भी अभी उनके पक्ष की दलील हैं, न्यायालय द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं।
