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सिर्फ प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी l

छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन के आधार पर लाठीचार्ज उचित नहीं है। कोर्ट ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई है। साथ ही एक जनहित याचिका में सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और दोषी पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

Kashish Rai03 अग. 2026, 07:11 PM IST
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सिर्फ प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी l

देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम और सख्त टिप्पणी की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस द्वारा लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस समय की, जब विभिन्न याचिकाओं के जरिए प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती के मामलों का जिक्र अदालत के सामने किया गया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर पुलिस ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

अत्यधिक बल प्रयोग पर उठे सवाल

एक याचिका में बिहार के सिवान का मामला भी सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ AK-47 राइफलों का इस्तेमाल किया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अत्यधिक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

PIL में साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग

इस मुद्दे पर अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा के माध्यम से याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करे कि इन घटनाओं से जुड़े सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। याचिका में खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित करने की मांग की गई है, जिनमें सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, पुलिस वायरलेस रिकॉर्ड, कॉल लॉग, कंट्रोल रूम डेटा और जीपीएस रिकॉर्ड शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़, नष्ट होने या दबाए जाने की आशंका है, इसलिए इन्हें तुरंत सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग

PIL में यह भी मांग की गई है कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा संज्ञेय अपराध किए जाने के संकेत मिलते हैं, तो तुरंत FIR दर्ज की जाए और निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच शुरू की जाए।

जंतर-मंतर घटना भी चर्चा में

इससे पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे। एक वकील ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। हालांकि, उस पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया गया था, जिसके बाद अब इस मुद्दे को लेकर औपचारिक PIL दायर की गई है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी भी प्रकार का अंधाधुंध बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और सच्चाई का खुलासा जांच रिपोर्ट और अदालत की अगली सुनवाई के बाद ही होगा।