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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: आंशिक भुगतान पर भी वैध रहेगी सेल डीड, राशि न मिलने पर रद्द कराने के बजाय करना होगा धन वसूली का मुकदमा
देश के सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर कोई सेल डीड (विक्रय विलेख) अमान्य या शून्य नहीं हो सकती कि बिक्री की पूरी राशि (प्रतिफल) का भुगतान तुरंत नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसी स्थिति में विक्रेता के पास एकमात्र कानूनी विकल्प यह है कि वह शेष राशि की वसूली के लिए अदालत में धन वसूली का मुकदमा (मनी रिकवरी सूट) दायर करे, न कि सेल डीड को रद्द करने की मांग करे। मामला क्या था?
Khushi11 अग. 2026, 01:39 PM IST

यह पूरा कानूनी विवाद मूल वादियों (विक्रेताओं) द्वारा मूल प्रतिवादी (खरीदार) के पक्ष में निष्पादित की गईं दो सेल डीड से शुरू हुआ था।
इन दोनों संपत्तियों में से प्रत्येक के लिए 7,000 रुपये की कुल कीमत तय की गई थी।
संपत्ति के निष्पादन के समय खरीदार द्वारा 2,500 रुपये नकद दिए गए थे।
इसके अलावा, समझौते के तहत 4,500 रुपये प्रतिवादी द्वारा अपने पास रखे गए थे, ताकि विभिन्न वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों में वादी (विक्रेता) के बकाए का भुगतान किया जा सके।
बाद में विवाद बढ़ने पर वादियों ने अदालत का रुख किया और सेल डीद को शून्य घोषित करने, विलेख को रद्द करने और स्वामित्व की घोषणा के साथ-साथ स्थायी निषेधाज्ञा (Injunction) की मांग की।
ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत (First Appellate Court) ने वादियों के इस दावे को खारिज कर दिया था।
हालांकि, इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने निचली अदालतों के फैसलों में हस्तक्षेप करते हुए वादी के पक्ष में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और निचली अदालत के निर्णय को पूरी तरह बहाल कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं को रेखांकित किया:
* स्वामित्व का स्थानांतरण: पीठ ने स्पष्ट किया कि जैसे ही कोई सेल डीड पंजीकृत (Register) हो जाती है, भले ही बिक्री मूल्य का केवल आंशिक भुगतान (Part Payment) ही क्यों न किया गया हो, संपत्ति का कानूनी अधिकार (Title) खरीदार (Transferee) के पास ट्रांसफर हो जाता है।
रद्दीकरण का कोई अधिकार नहीं: अदालत ने कहा कि शेष बिक्री मूल्य का भुगतान न होने पर सेल डीद को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। ऐसी स्थिति में विक्रेता का कानूनी अधिकार केवल "शेष राशि की वसूली" के लिए मुकदमा दायर करना है, न कि सेल डीद को रद्द कराने का दावा करना।
ब्याज सहित भुगतान का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अपीलकर्ता-प्रतिवादी संपत्ति पर पूर्ण कब्जा चाहते हैं, तो उन्हें बची हुई शेष बिक्री राशि का भुगतान ब्याज सहित करना होगा।
न्यायालय के इस स्पष्ट फैसले से उन मामलों में कानूनी स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है जहां खरीदार द्वारा समझौते के अनुसार पूर्ण भुगतान में देरी या कमी की जाती है, जिससे संपत्ति बाजार और अदालतों में लंबित मामलों के समाधान में बड़ी मदद मिलेगी।
