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अदालत की अवमानना पर अब लोक निर्माण विभाग में गिरेगी गाज, दोषी अधिशासी अभियंता होंगे निलंबित

उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के मामलों को लेकर शासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। विभाग में फाइलों के निस्तारण में होने वाली देरी और उसकी वजह से राज्य सरकार पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ को रोकने के लिए शासन ने मानक कार्यप्रणाली (SOP) और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब न्यायालय में अवमानना की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) को तुरंत निलंबित किया जाएगा।

Vinod Tiwari08 अग. 2026, 04:33 PM IST
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अदालत की अवमानना पर अब लोक निर्माण विभाग में गिरेगी गाज, दोषी अधिशासी अभियंता होंगे निलंबित

देरी से संज्ञान में आने वाले मामलों पर शासन सख्त

शासन द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि विभागाध्यक्ष और प्रमुख सचिव के संज्ञान में अवमानना के कई प्रकरण बहुत देर से लाए जाते हैं। इसके चलते समय पर अदालती आदेशों का पालन नहीं हो पाता और बिना किसी ठोस वजह के राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, जिसे आसानी से टाला जा सकता था। समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि राज्य, मुख्यालय, जोन, सर्किल और डिवीजन स्तर पर फाइलों के काम में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

अधिकारियों पर होगी यह कार्रवाई

नए दिशा-निर्देशों के तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई तय की गई है:

  •  अधिशासी अभियंता (XEN): न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति से पहले ही संबंधित अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया जाएगा। यह तर्क बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा कि प्रकरण मुख्यालय या शासन स्तर पर लंबित था।
  •  अधीक्षण अभियंता: यदि मामला पहली बार संज्ञान में आता है तो धारा 7 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दी जाएगी। ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति होने पर उनकी सत्यनिष्ठा (Integrity) रोकी जाएगी और निलंबन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
  •  मुख्य अभियंता: यदि अवमानना वाद में विभागाध्यक्ष या प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति की नौबत आती है, तो इसके लिए मुख्य अभियंता के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। पहली बार ऐसा होने पर धारा 10(2) के तहत कार्रवाई और प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी, और दोबारा गलती होने पर सत्यनिष्ठा रोके जाने सहित अन्य कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

दो दिनों के भीतर फाइलों का करना होगा निस्तारण

शासन की नई व्यवस्था के तहत अब हर स्तर पर जवाबदेही तय कर दी गई है। प्रत्येक अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता को अधिकतम दो दिनों के भीतर अपने स्तर पर फाइलों का निस्तारण करना अनिवार्य होगा, ताकि अदालती मामलों में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली से बचा जा सके।