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RBI Action: नियमों की अनदेखी पर आरबीआई का कड़ा एक्शन, दो वित्तीय कंपनियों पर ठोका ₹10.80 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विनियामकीय नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वाली वित्तीय कंपनियों के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में केंद्रीय बैंक ने नियमों के उल्लंघन को लेकर दो वित्तीय कंपनियों—श्री राम फाइनेंस कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड और प्रोग्फ़िन प्राइवेट लिमिटेड—पर कुल ₹10.80 लाख का मौद्रिक जुर्माना लगाया है।

Vinod Tiwari22 अग. 2026, 05:52 PM IST
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RBI Action: नियमों की अनदेखी पर आरबीआई का कड़ा एक्शन, दो वित्तीय कंपनियों पर ठोका ₹10.80 लाख का जुर्माना

आरबीआई द्वारा यह कार्रवाई 'केवाईसी' (KYC) और 'गवर्नेंस' (Governance) से जुड़े प्रावधानों का सही ढंग से पालन न करने के कारण की गई है।

श्री राम फाइनेंस कॉर्पोरेशन पर ₹8.10 लाख का जुर्माना

31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर किए गए सांविधिक निरीक्षण (Statutory Inspection) और पर्यवेक्षी जांच के बाद आरबीआई ने कंपनी पर ₹8.10 लाख का जुर्माना लगाया। कंपनी पर निम्नलिखित प्रमुख उल्लंघन सिद्ध हुए:

 * बिना पूर्व अनुमति निदेशकों की नियुक्ति: कंपनी ने प्रबंधन में बदलाव करते हुए स्वतंत्र निदेशकों को छोड़कर 30% से अधिक निदेशकों के फेरबदल के दौरान आरबीआई से अनिवार्य पूर्व लिखित अनुमति नहीं ली।

 * जोखिम वर्गीकरण का अभाव: कंपनी ग्राहकों को उनकी जोखिम प्रोफाइल (Low, Medium, High Risk) में वर्गीकृत करने के लिए आवश्यक प्रणाली लागू करने में विफल रही।

 * सी-केवाईसी पोर्टल पर रिकॉर्ड न होना: तय समय-सीमा के भीतर कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार (CKYC Registry) पर अपलोड नहीं किए गए।

प्रोग्फ़िन प्राइवेट लिमिटेड पर ₹2.70 लाख की पेनाल्टी

आरबीआई ने प्रोग्फ़िन प्राइवेट लिमिटेड पर 'केवाईसी निदेशों' के अनुपालन में लापरवाही बरतने के लिए ₹2.70 लाख का मौद्रिक दंड लगाया है।

कंपनी की जांच में सामने आया कि उसने खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा (Periodic Review of Risk Categorisation) के लिए तय नियमों का पालन नहीं किया था। आरबीआई नियमों के अनुसार, वित्तीय संस्थानों के लिए प्रत्येक छह महीने में कम से कम एक बार यह समीक्षा करना अनिवार्य है, जिसकी उचित व्यवस्था कंपनी के पास नहीं पाई गई।

ग्राहकों के लेन-देन पर नहीं पड़ेगा असर

रिजर्व बैंक ने दोनों ही मामलों में स्पष्ट किया है कि यह दंडात्मक कार्रवाई केवल विनियामकीय और प्रशासनिक अनुपालन में पाई गई कमियों के आधार पर की गई है। इसका उद्देश्य कंपनियों द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेन-देन या अनुबंध की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है। इसके साथ ही, इस जुर्माने से भविष्य में कंपनियों पर होने वाली किसी अन्य संभावित विनियामकीय कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।