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महाराष्ट्र: मंत्रालय और मंत्रियों के दफ्तरों में मौखिक आदेश पर काम कर रहे कर्मचारियों पर गिरी गाज; सरकार ने नियुक्तियां कीं रद्द, 10 सितंबर तक मूल विभाग लौटने के आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने निर्धारित नियमों व मंजूरी के बिना या केवल "मौखिक आदेशों" के आधार पर कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की ओर से 25 अगस्त को जारी एक विस्तृत सरकारी परिपत्र (GR) में साफ किया गया है कि इन सभी कर्मचारियों को 10 सितंबर तक उनके मूल विभागों में वापस भेजा जाए।

महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने निर्धारित नियमों व मंजूरी के बिना या केवल "मौखिक आदेशों" के आधार पर कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की ओर से 25 अगस्त को जारी एक विस्तृत सरकारी परिपत्र (GR) में साफ किया गया है कि इन सभी कर्मचारियों को 10 सितंबर तक उनके मूल विभागों में वापस भेजा जाए।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
शासनादेश में रेखांकित किया गया है कि मंत्रालय राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र है, जहां नीतिगत और संवेदनशील फैसले लिए जाते हैं। सरकार के संज्ञान में आया था कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव या सामान्य प्रशासन विभाग की औपचारिक मंजूरी के बिना ही बाहरी कार्यालयों से तकनीकी विशेषज्ञों (जैसे डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर, आशुलिपिक आदि) और अन्य कर्मचारियों को संविदा या मौखिक आदेशों पर मंत्रालय में तैनात कर दिया गया था।
इसके कारण उत्पन्न प्रमुख समस्याएं:
* अनुभव व प्रशिक्षण की कमी: बाहरी कर्मचारियों को मंत्रालयीन कार्यप्रणाली का अनुभव न होने से कामकाज की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।
* संवेदनशीलता व सुरक्षा का उल्लंघन: मंत्रालय के संवेदनशील कार्यों के लिए अनिवार्य चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate), गोपनीय रिपोर्ट (CR) और सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र (Integrity Certificate) का सत्यापन इन नियुक्तियों में नहीं किया गया था।
* मूल विभागों में रुकावट: इन कर्मचारियों के मंत्रालय आने से उनके मूल कार्यालयों में काम ठप हो रहा था और वहां पद रिक्त दिखाने में कठिनाई आ रही थी।
* मृत संवर्ग (Dying Cadres): कालबाह्य घोषित हो चुके संवर्गों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी नियमों के विरुद्ध सेवा विस्तार दिया जा रहा था, जिस पर सरकार ने सख्त आपत्ति जताई है।
सरकार द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश व समयसीमा (Timeline):
* 10 सितंबर 2026 तक वापसी: संबंधित मंत्री कार्यालय और मंत्रालयीन विभाग सभी मौखिक आदेश पर आए कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर उन्हें मूल विभाग भेजेंगे।
* 15 सितंबर 2026 तक उपस्थिति रिपोर्ट: कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में उपस्थित हुआ या नहीं, इसकी रिपोर्ट आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) संबंधित विभाग को सौंपेंगे।
* वेतन बंद करने की कार्रवाई: जो कर्मचारी तय समय में मूल विभाग में कार्यभार नहीं संभालेंगे, उनका वेतन तत्काल बंद कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (MCSR 1979) शुरू होगी।
* 20 सितंबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट: सभी विभागों के सचिव इस पूरी प्रक्रिया की अंतिम अनुपालन रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को प्रस्तुत करेंगे।
* प्रवेश पास और बायोमेट्रिक रद्द: हटाये गए कर्मचारियों के मंत्रालय पहचान पत्र, फेस रीडिंग और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की सुविधा तुरंत निरस्त करने का निर्देश गृह व आईटी विभाग को दिया गया है।
भविष्य के लिए नई व्यवस्था:
यदि किसी मंत्री कार्यालय को स्वीकृत संख्या से अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है, तो अब सीधे तौर पर मौखिक नियुक्ति नहीं की जा सकेगी। इसके लिए संबंधित विभागों के सचिवों को सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति के लिए विधिवत प्रस्ताव भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, मंत्रालय संवर्ग के बेहतर प्रबंधन, समय पर पदोन्नति और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक स्वतंत्र प्रशासनिक तंत्र विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है।
