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महाराष्ट्र सरकार ने अंत्योदय परिवारों के लिए बंद की 'मुफ्त साड़ी योजना'; बकाया भुगतान के लिए ₹28.35 करोड़ जारी
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने आर्थिक बोझ और राजकोषीय घाटे को देखते हुए अंत्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों के लिए चलाई जा रही 'कैप्टिव मार्केट योजना' (प्रति वर्ष एक मुफ्त साड़ी वितरण योजना) को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है। हालांकि, योजना के तहत हुए खर्च और लंबित देनदारियों को चुकाने के लिए राज्य सरकार ने महाराष्ट्र राज्य यंत्रमाग महामंडळ (पावरलूम कॉर्पोरेशन) को ₹28.35 करोड़ की शेष राशि वितरित करने की प्रशासनिक मंजूरी दी है।

क्या थी यह योजना?
महाराष्ट्र सरकार ने 'एकीकृत एवं सतत वस्त्रोद्योग नीति 2023-28' के तहत अंत्योदय राशन कार्ड धारक गरीब परिवारों को हर साल पावरलूम पर बुनी हुई एक साड़ी मुफ्त में उपलब्ध कराने के लिए 'कैप्टिव मार्केट योजना' की शुरुआत की थी। इन साड़ियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन की दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाना था।
योजना क्यों की गई बंद?
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य में वर्तमान में चल रही विभिन्न योजनाओं के वित्तीय भार, बढ़ते कर्ज, अन्य देनदारियों और राजकोषीय घाटे को ध्यान में रखते हुए इस योजना को आगे जारी रखना उचित नहीं माना गया। इसके चलते 16 जुलाई 2026 के शासन निर्णय के तहत योजना को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया गया था।
बकाया भुगतान के लिए ₹28.35 करोड़ मंजूर
वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा 27 अगस्त 2026 को जारी नए शासन निर्णय (GR) के अनुसार:
* इस योजना के तहत साड़ियों और कपड़े के थैलों के उत्पादन, परिवहन, प्रचार-प्रसार, भंडारण और हमाली जैसे खर्चों के लिए कुल ₹99.96 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी।
* इसमें से ₹70 करोड़ पहले ही महामंडळ को वितरित किए जा चुके थे।
* योजना बंद करने के साथ ही सभी पुरानी देनदारियों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए थे। इसी के तहत सरकार ने शेष ₹28.35 करोड़ की राशि महाराष्ट्र राज्य यंत्रमाग महामंडळ को जारी करने की मंजूरी दे दी है।
भुगतान के लिए कड़ी शर्तें लागू
शासन निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि:
* निर्धारित मानकों के अनुसार बनी साड़ियां जब सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत तालुका स्तर के सरकारी गोदामों तक सुरक्षित पहुंच जाएंगी, उसकी पुष्टि होने के बाद ही संबंधित वेंडरों/संस्थाओं को अंतिम भुगतान किया जाएगा।
* भुगतान पूरा होने के बाद यंत्रमाग महामंडळ को उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate) सरकार को सौंपना होगा और यदि कोई राशि शेष बचती है, तो उसे सरकारी खजाने में वापस जमा कराना होगा।
