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जल जीवन मिशन 2.0: ग्रामीण जल आपूर्ति नवाचारों को समझने के लिए छात्रों को फील्ड विजिट कराएंगी सरकारें, केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश
नई दिल्ली : जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के तहत छात्रों की भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में फील्ड-आधारित शिक्षा को मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना और जमीनी स्तर पर हुए सफल कार्यों का अध्ययन कर उन्हें प्रकाशित करना है। मंत्रालय ने सितंबर 2026 के अंत तक प्रत्येक जिले में छात्रों के दौरे आयोजित करने और सर्वोत्तम तरीकों पर केस स्टडी प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है।

स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों की ली जाएगी मदद
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित किया है कि वे स्थानीय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को जल जीवन मिशन 2.0 से जोड़ें। ये संस्थान मिशन के तहत सामुदायिक भागीदारी, जल गुणवत्ता प्रबंधन, स्रोत स्थिरता, संचालन व रखरखाव, उन्नत तकनीक को अपनाने और विकेंद्रीकृत शासन के उत्कृष्ट मॉडलों का अध्ययन एवं डॉक्यूमेंटेशन करेंगे।
अध्ययन और शोध पत्रों का होगा प्रकाशन
साक्ष्य-आधारित ज्ञान साझा करने और सफल मॉडलों को अन्य क्षेत्रों में दोहराने के लिए इन अध्ययनों के निष्कर्षों को विभिन्न मंचों पर प्रसारित किया जाएगा। इन्हें शैक्षणिक पत्रिकाओं, संस्थागत रिपोर्टों, न्यूज़लेटर्स, शोध पत्रों तथा आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए व्यापक स्तर पर साझा किया जाएगा।
छात्रों के लिए आयोजित होंगे फील्ड टूर
योजना के तहत पास के स्कूलों के हायर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी (11वीं-12वीं) छात्रों के लिए विशेष शैक्षणिक टूर आयोजित किए जाएंगे। छात्रों को ग्रामीण जल आपूर्ति की आधुनिक प्रणालियों से रूबरू कराने के लिए निम्न स्थलों पर ले जाया जाएगा:
* मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और इनटेक वेल
* वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP)
* SCADA और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक निगरानी प्रणालियों वाले केंद्र
* NABL-मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाएं
इसके लिए स्थानीय स्कूलों/कॉलेजों, जिला जल और स्वच्छता मिशन (DWSM) तथा ग्राम पंचायतों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
सितंबर 2026 तक का तय लक्ष्य
इस पहल के अंतर्गत केंद्र ने स्पष्ट लक्ष्य रखा है कि सितंबर 2026 के अंत तक देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक स्टूडेंट टूर आयोजित हो और न्यूनतम एक केस स्टडी/बेस्ट प्रैक्टिस का प्रकाशन सुनिश्चित किया जाए। इस कदम से ग्रामीण जल आपूर्ति से जुड़े सफल प्रयासों को व्यापक दृश्यता मिलेगी और युवाओं में जल संरक्षण व प्रबंधन को लेकर व्यावहारिक समझ विकसित होगी।
