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UP वक्फ बोर्ड पर 1000 करोड़ के घोटाले का आरोप l

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर करीब 1000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने शपथ पत्र के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने का दावा किया है। आरोपों में वक्फ संपत्तियों और कब्रों की कथित बिक्री, कुछ संपत्तियों को वक्फ रिकॉर्ड से हटाने और अन्य संपत्तियों को वक्फ के तौर पर दर्ज किए जाने जैसे गंभीर दावे शामिल हैं। हालांकि, ये सभी फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

Kashish Rai12 अग. 2026, 08:29 PM IST
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UP वक्फ बोर्ड पर 1000 करोड़ के घोटाले का आरोप l

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने बोर्ड पर करीब 1000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। दावा किया गया है कि वक्फ संपत्तियों और कब्रों की कथित अवैध बिक्री के जरिए बड़े पैमाने पर धन का लेनदेन किया गया।शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस मामले को लेकर शपथ पत्र के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष शिकायत किए जाने का दावा है। शिकायत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और संपत्तियों की बिक्री से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कब्रों तक की बिक्री का आरोप

शिकायत में दावा किया गया है कि वक्फ से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ कुछ कब्रों को भी कथित तौर पर बेचा गया। कुछ कब्रों की कीमत करीब 10 लाख रुपये तक लगाए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस तरह के लेनदेन के जरिए बड़ी रकम जुटाई गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

हजारों वक्फ बढ़ाने का भी दावा

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ हिंदू संपत्तियों को कथित तौर पर वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज किया गया और इस प्रक्रिया के जरिए करीब 2,500 वक्फ बढ़ाए गए। इसके अलावा लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, अलीगढ़ और झांसी में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियों को कथित तौर पर मुतवल्लियों के माध्यम से बेचने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ संपत्तियों को रकम लेकर वक्फ रिकॉर्ड से हटाया भी गया।

वक्फ रिकॉर्ड से संपत्ति हटाने पर उठे सवाल

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि किसी वक्फ को रिकॉर्ड से हटाने का अधिकार बोर्ड के बजाय अदालत के पास है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर बोर्ड स्तर पर कुछ संपत्तियों को रिकॉर्ड से हटाने की कार्रवाई की गई। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड और उनके प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

चंदे की रकम में भी कथित अनियमितता

शिकायत सिर्फ संपत्तियों तक सीमित नहीं है। इसमें धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चंदे की रकम में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने लखनऊ की हजरत अब्बास दरगाह, आगरा के मजार शहीद-ए-सालिस और बिजनौर की जोगीपुरा दरगाह में मिलने वाले चंदे के कथित दुरुपयोग का दावा किया है। आरोप है कि चंदे की रकम के बंटवारे में वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ लोगों और एक बड़े मौलाना की कथित भूमिका रही है।

अलग-अलग वक्फ बोर्डों को लेकर भी सवाल

शिकायत में वर्ष 1995 के बाद उत्तर प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के गठन और संचालन को लेकर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अलग-अलग बोर्डों के संचालन के कारण सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इस मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी

फिलहाल इस पूरे मामले में सामने आए सभी दावे शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इन्हें अदालत या किसी जांच एजेंसी द्वारा साबित किया गया है। अब निगाह इस बात पर होगी कि शिकायत पर सरकार या संबंधित जांच एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं और कथित वक्फ संपत्तियों के लेनदेन, रिकॉर्ड में बदलाव तथा चंदे की रकम से जुड़े आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है।