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आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल का असर, महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों की अब निगरानी करेगा बॉम्बे हाईकोर्ट

आदिवासी छात्रों की 17 दिन की भूख हड़ताल के बाद अब महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों की बदहाली पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नजर होगी। कोर्ट ने मामले को PIL में बदलते हुए राज्यभर के आश्रम स्कूलों की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी का फैसला किया है।

Sonali01 सित. 2026, 05:11 PM IST
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आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल का असर, महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों की अब निगरानी करेगा बॉम्बे हाईकोर्ट

मुंबई: 

महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में खराब सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की समस्याओं को लेकर आदिवासी छात्रों की करीब 17 दिन चली भूख हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है। पुणे के मांजरी इलाके में चल रहे आंदोलन के बीच छात्रों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और आदिवासी विकास मंत्री से मुलाकात की। इसके बाद सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। अब इस पूरे मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की भी सीधी नजर रहेगी।

मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की डिवीजन बेंच ने की। महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल कोई भी छात्र अस्पताल में भर्ती नहीं है और सभी की हालत स्थिर है।


क्या थी छात्रों की मांग?

आदिवासी छात्रों ने राज्य के आश्रम स्कूलों और छात्रावासों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। छात्रों की शिकायतों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, हॉस्टल की व्यवस्था, सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। खास तौर पर आदिवासी बहुल इलाकों में स्थित आश्रम स्कूलों की स्थिति को लेकर छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए थे। छात्रों की मांगों और भूख हड़ताल को लेकर मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आंदोलन कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और सरकार को उनकी उचित चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।


मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद खत्म हुआ आंदोलन

31 अगस्त की सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और आदिवासी विकास मंत्री ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बैठक में छात्रों की मांगों पर चर्चा हुई और सरकार ने कई मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। सरकार ने कोर्ट के सामने मुख्यमंत्री, मंत्री और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के Minutes of Meeting भी पेश किए। हाईकोर्ट ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लिया और सरकार को इस संबंध में उचित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।


SIT और मेस व्यवस्था पर फैसला

बैठक में छात्रों की कुछ प्रमुख मांगों पर निर्णय लिए गए। इनमें फूड पॉइजनिंग के कारण एक छात्र की मौत की जांच के लिए Special Investigation Team यानी SIT गठित करना शामिल है।इसके अलावा छात्रावासों में भोजन उपलब्ध कराने के लिए Direct Benefit Transfer यानी DBT व्यवस्था की जगह मेस सर्विस शुरू करने का फैसला भी लिया गया है। सरकार को इन फैसलों को लेकर कोर्ट में औपचारिक हलफनामा दाखिल करना होगा।


अब पूरे महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों की निगरानी

मामले में सबसे अहम कदम उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने संबंधित रिट याचिका को Public Interest Litigation यानी PIL में बदल दिया है। अब यह मामला सिर्फ आंदोलन करने वाले छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रहेगा। हाईकोर्ट महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों के समग्र बुनियादी ढांचे और वहां पढ़ने वाले आदिवासी छात्रों को मिल रही सुविधाओं की निगरानी करेगा। इसका दायरा राज्यभर के आश्रम स्कूलों तक हो सकता है।


फैसले का महत्व

हाईकोर्ट का यह कदम आदिवासी छात्रों की शिक्षा और रहने की सुविधाओं को लेकर सरकार की जवाबदेही बढ़ाने वाला माना जा रहा है। कोर्ट की निगरानी में अब आश्रम स्कूलों में भोजन, स्वास्थ्य, हॉस्टल, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना पड़ सकता है।