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आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बढ़ रही आयुष सेवाओं की पहुंच, देशभर में 12,500 केंद्र हुए संचालित; महाराष्ट्र में 390 केंद्र सक्रिय

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है। राष्ट्रीय आयुष मिशन (National Ayush Mission-NAM) के तहत देशभर में 12,500 आयुष डिस्पेंसरी और सब-हेल्थ सेंटरों को उन्नत कर "आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष)" के रूप में विकसित किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से अब लोगों को आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष सेवाएं आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकृत रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 06:25 PM IST
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आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बढ़ रही आयुष सेवाओं की पहुंच, देशभर में 12,500 केंद्र हुए संचालित; महाराष्ट्र में 390 केंद्र सक्रिय

आयुष मंत्रालय ने संसद में बताया कि इन केंद्रों का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं है, बल्कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वास्थ्य संवर्धन, स्वस्थ जीवनशैली और समुदाय आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी है। मंत्रालय का कहना है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है और इन केंद्रों पर मरीजों की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी गई है।

12,500 केंद्रों को मिला नया स्वरूप

आयुष मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत स्टेट एनुअल एक्शन प्लान (SAAP) के आधार पर 12,500 मौजूदा आयुष डिस्पेंसरी और सब-हेल्थ सेंटरों को उन्नत कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) बनाया गया है। मंत्रालय ने बताया कि स्वीकृत सभी 12,500 केंद्र वर्तमान में पूरी तरह कार्यरत हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य लोगों को उनके घर के निकट समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उन्हें बड़े अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।

क्या हैं आयुष्मान आरोग्य मंदिर?

आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी आयुष प्रणालियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ा गया है। यहां लोगों को उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन केंद्रों का संचालन "समग्र स्वास्थ्य मॉडल" (Holistic Wellness Model) के आधार पर किया जाता है। इसका मतलब है कि मरीज को केवल बीमारी का इलाज नहीं दिया जाता, बल्कि उसकी जीवनशैली, खान-पान, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक संतुलन पर भी ध्यान दिया जाता है।

किन सेवाओं का मिल रहा है लाभ?

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सामान्य ओपीडी सेवाओं के अलावा कई विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें आयुर्वेदिक परामर्श, योग चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों की रोकथाम, पुनर्वास सेवाएं, प्रकृति परीक्षण (Prakriti Parikshan), जीवनशैली संबंधी परामर्श और औषधीय पौधों के उपयोग के बारे में जानकारी शामिल है।

इसके अलावा गांवों और समुदायों में योग शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, औषधीय पौधों की जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।

मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी

आयुष मंत्रालय ने बताया कि जब से आयुष डिस्पेंसरी और सब-हेल्थ सेंटरों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बदला गया है, तब से इन केंद्रों पर आने वाले लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि पहले जहां केवल ओपीडी सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब लोगों को एक ही स्थान पर कई प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। योग सत्र, प्रकृति परीक्षण, स्वास्थ्य परामर्श और सामुदायिक गतिविधियों ने भी लोगों को इन केंद्रों से जोड़ा है। मंत्रालय का मानना है कि आयुष आधारित निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ने से इन केंद्रों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ आयुष का समन्वय

सरकार ने इन केंद्रों को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया है। यहां आयुष चिकित्सक आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपचार का विकल्प मिल सके। इस मॉडल में आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य फील्ड हेल्थ वर्कर्स की भी महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई है। ये कार्यकर्ता लोगों को आयुष सेवाओं के बारे में जागरूक करते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी

आयुष मंत्रालय ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की जाती है। राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) द्वारा मूल्यांकन, स्वतंत्र थर्ड पार्टी समीक्षा और केंद्रीय टीमों के नियमित निरीक्षण किए जाते हैं। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, उपलब्ध सुविधाओं तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की जाती है। केंद्रीय टीमों ने राज्यों को यह भी सुझाव दिया है कि आयुष चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण को और मजबूत किया जाए, रेफरल सिस्टम को बेहतर बनाया जाए तथा आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

केंद्र सरकार दे रही लाखों रुपये की सहायता

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों को इन केंद्रों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। एक आयुष डिस्पेंसरी को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बदलने के लिए प्रति इकाई 16.22 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि सब-हेल्थ सेंटर को अपग्रेड करने के लिए प्रति केंद्र 15.744 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि राज्यों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना के आधार पर जारी की जाती है, जिससे भवन, उपकरण, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा सकें।

राजस्थान में सबसे अधिक, महाराष्ट्र में 390 केंद्र

राज्यों के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान देश में सबसे आगे है, जहां 2,019 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) संचालित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 1,034, मध्य प्रदेश में 800, हिमाचल प्रदेश में 761, झारखंड में 745, केरल में 700 और तमिलनाडु में 650 केंद्र कार्यरत हैं। महाराष्ट्र में 390 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत किए गए थे और सभी 390 पूरी तरह कार्यरत हैं। गुजरात में 365, हरियाणा में 538, पश्चिम बंगाल में 540 तथा तेलंगाना में 421 केंद्र संचालित हो रहे हैं। दिल्ली और लद्दाख में फिलहाल इस योजना के तहत कोई आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत नहीं किया गया है।

देशभर में 3,648 अस्पताल और 40,269 डिस्पेंसरी दे रहे आयुष सेवाएं

आयुष मंत्रालय ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में आयुष सेवाओं का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है। देशभर में वर्तमान समय में 3,648 सरकारी अस्पतालों और 40,269 आयुष डिस्पेंसरी में आयुष ओपीडी सेवाएं उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश में 1,982 अस्पतालों में आयुष ओपीडी संचालित हो रही है, जो देश में सबसे अधिक है। वहीं कर्नाटक में 7,641 आयुष डिस्पेंसरी, राजस्थान में 4,443, उत्तर प्रदेश में 3,761, ओडिशा में 2,676, पश्चिम बंगाल में 2,668, केरल में 2,210 और मध्य प्रदेश में 1,773 डिस्पेंसरी संचालित हो रही हैं। महाराष्ट्र में 174 सरकारी अस्पतालों में आयुष ओपीडी सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि राज्य में 486 आयुष डिस्पेंसरी लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर सरकार का फोकस

सरकार का कहना है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को बीमारी होने के बाद इलाज कराने के बजाय पहले से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना है। योग, संतुलित आहार, आयुर्वेदिक परामर्श, औषधीय पौधों का उपयोग और प्राकृतिक जीवनशैली को बढ़ावा देकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर ही निवारक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होती हैं तो गंभीर बीमारियों का बोझ कम किया जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य खर्च भी घटाया जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकृत मॉडल की ओर बड़ा कदम

आयुष मंत्रालय का मानना है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समावेशी और लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन केंद्रों के माध्यम से आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक आयुष प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों, जिससे "रोग होने पर इलाज" की बजाय "रोग से पहले बचाव" की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके। यही दृष्टिकोण भविष्य में भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाने का आधार बनेगा।