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कल्याण-डोंबिवली में नाबालिग लड़की की गर्भावस्था रिपोर्ट को लेकर भ्रम; सरकारी और निजी अस्पताल की जांच में अंतर

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के शास्त्रीनगर अस्पताल में जांच कराने वाली 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की गर्भावस्था रिपोर्ट को लेकर मामला सामने आया है। पालिका अस्पताल में तीन बार की गई जांच में लड़की के गर्भवती होने की बात सामने आने का दावा किया गया। हालांकि, निजी अस्पताल में दोबारा जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। दोनों रिपोर्टों में अंतर सामने आने के बाद पालिका अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है।

Priyanka Gaikwad12 अग. 2026, 08:29 PM IST
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कल्याण-डोंबिवली में नाबालिग लड़की की गर्भावस्था रिपोर्ट को लेकर भ्रम; सरकारी और निजी अस्पताल की जांच में अंतर
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के शास्त्रीनगर अस्पताल में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की जांच की गई थी। जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की बात सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया। हालांकि, बाद में निजी अस्पताल में की गई जांच में गर्भावस्था की रिपोर्ट निगेटिव आने से दोनों रिपोर्टों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित लड़की को उपचार के लिए शास्त्रीनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उसे काफी अधिक रक्तस्राव हो रहा था। अस्पताल में उसकी यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट यानी UPT की जांच की गई। इस जांच में उसके गर्भवती होने की रिपोर्ट पॉजिटिव आने का दावा किया गया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लड़की की UPT जांच एक बार नहीं बल्कि तीन बार की गई थी और तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उसके माता-पिता को लड़की के गर्भवती होने की जानकारी दी गई। इसी दौरान लड़की के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम पाया गया। उसकी स्वास्थ्य स्थिति और जांच रिपोर्ट को लेकर डॉक्टरों ने आगे की जांच की। पहली जांच के बाद भी डॉक्टरों ने गर्भावस्था की बात कही। इसके बाद दोबारा दो जांच की गईं और उनमें भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने का दावा किया गया।

पालिका अस्पताल की रिपोर्ट के बाद लड़की के माता-पिता ने निजी अस्पताल में उसकी दोबारा जांच कराने का फैसला किया। निजी अस्पताल में की गई जांच में हालांकि गर्भावस्था की रिपोर्ट निगेटिव आई। इस तरह दोनों अस्पतालों की जांच रिपोर्ट में अंतर सामने आने से मामला और गंभीर हो गया। घटना के बाद कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। संबंधित डॉक्टरों की जांच प्रक्रिया में कोई गलती हुई थी या नहीं, मेडिकल टेस्ट सही तरीके से किए गए थे या नहीं और दोनों रिपोर्टों में इतना अंतर क्यों आया, इसकी जांच की मांग की गई है।

भाजपा नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने संबंधित डॉक्टरों की जांच करने और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका प्रशासन की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं। महानगरपालिका की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ल ने बताया कि लड़की को उपचार के लिए शास्त्रीनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उसे काफी रक्तस्राव हो रहा था। उसकी UPT जांच तीन बार की गई और तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। हालांकि, लड़की के माता-पिता ने निजी अस्पताल में जांच कराई, जहां रिपोर्ट निगेटिव आई।

मामले की वास्तविक स्थिति पता लगाने और पालिका अस्पताल में जांच प्रक्रिया के दौरान कोई त्रुटि हुई थी या नहीं, यह स्पष्ट करने के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। चूंकि संबंधित लड़की नाबालिग है, इसलिए मामले को संवेदनशीलता के साथ देखना जरूरी है। दोनों अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट में विरोधाभास सामने आने के कारण फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। आधिकारिक जांच रिपोर्ट और चिकित्सा विशेषज्ञों के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।