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कांवड़ यात्रा पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल! मौलाना साजिद रशीदी पर FIR के बाद भड़के नंद किशोर गुर्जर, रासुका लगाने की उठी मांग

कांवड़ यात्रा को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक माहौल में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत कार्रवाई की मांग की है। बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि पुलिस मामले की कानूनी जांच में जुटी है। ऐसे में यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कानून, राजनीति और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

Sonali07 अग. 2026, 05:10 PM IST
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कांवड़ यात्रा पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल! मौलाना साजिद रशीदी पर FIR के बाद भड़के नंद किशोर गुर्जर, रासुका लगाने की उठी मांग

लखनऊ।

कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों को लेकर मौलाना साजिद रशीदी की कथित विवादित टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहरा गया है। गाजियाबाद की लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मौलाना द्वारा दिए गए बयान करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले हैं और इससे सामाजिक सौहार्द तथा कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विधायक ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


मामले की शुरुआत उस समय हुई जब सोशल मीडिया पर मौलाना साजिद रशीदी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों को लेकर विवादित टिप्पणी की। वीडियो वायरल होने के बाद कई हिंदू संगठनों और भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया। इसी क्रम में भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर लखनऊ पहुंचे और हजरतगंज थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में धार्मिक वैमनस्य पैदा कर सकते हैं और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाते हैं।


विधायक नंद किशोर गुर्जर ने अपनी शिकायत में कहा कि कांवड़ यात्रा सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए कठिन यात्रा करते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं के बारे में सार्वजनिक मंच से कथित अपमानजनक टिप्पणी करना केवल किसी व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

शिकायत दर्ज कराने के बाद नंद किशोर गुर्जर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति विशेष की टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि मौलाना साजिद रशीदी द्वारा कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों के संबंध में की गई टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इससे समाज में वैमनस्य फैलने की आशंका है। विधायक ने मांग की कि पुलिस इस मामले में केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मौलाना के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित अन्य कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि समाज में तनाव पैदा करने वाले बयानों पर सख्ती से रोक लगना आवश्यक है।


मामले को गंभीर बताते हुए विधायक ने केवल एफआईआर की मांग तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने शिकायत में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA/रासुका) लगाने की भी मांग की। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार ऐसे बयान देकर समाज में तनाव पैदा करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। नंद किशोर गुर्जर ने केवल हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराने तक ही कदम सीमित नहीं रखा। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी शिकायत भेजकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। विधायक ने अपने पत्र में कहा कि यदि इस प्रकार के बयान देने वालों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो इससे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। अपनी शिकायत में विधायक ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर कांवड़ियों का वेश धारण कर उपद्रव फैलाने का प्रयास करते हैं, जिससे पूरी कांवड़ यात्रा और सनातन परंपरा की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस पहलू की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि यदि किसी संगठित साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है तो उसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। विधायक का कहना है कि लाखों श्रद्धालु हर वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं और कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे समुदाय या यात्रा पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है।


मीडिया से बातचीत के दौरान नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि कांवड़ यात्रा मुगल काल और अंग्रेजी शासन के समय से चली आ रही आस्था की परंपरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर कांवड़ यात्रा को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। विधायक ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी घटना से शिकायत है तो वह कानून का सहारा ले सकता है, लेकिन पूरे कांवड़ समाज या श्रद्धालुओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।


हजरतगंज पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि पूरे मामले का विधिक परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार का दंडनीय अपराध प्रथम दृष्टया स्थापित होता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।


मौलाना साजिद रशीदी पूर्व में भी अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर कई बार विवादों में आ चुके हैं। अलग-अलग अवसरों पर उनके कुछ बयानों को लेकर विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। वर्ष 2025 में समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ लखनऊ के विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके अलावा अन्य संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए बयानों को लेकर भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठती रही है। मौजूदा विवाद ने एक बार फिर उनके बयानों को राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।


इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है, जबकि विपक्षी दलों ने मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े मामलों में सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों की संवेदनशीलता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय होती है।


फिलहाल इस मामले में पुलिस शिकायत, वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कौन-सी कानूनी धाराएं लागू होंगी और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाता है।