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डॉक्टरों से मारपीट पर हाईकोर्ट सख्त! शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को जमानत के संकेत, लेकिन रहेंगी सबसे कड़ी शर्तें

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले ने अब न्यायपालिका को भी सख्त संदेश देने पर मजबूर कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को जमानत देने की मंशा तो जताई है, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अदालत ने संकेत दिया कि आरोपी को सबसे कड़ी शर्तों के साथ ही राहत मिलेगी। जांच, गवाहों की सुरक्षा और मुकदमे की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र से बाहर रहने, नियमित पुलिस हाजिरी और फास्ट-ट्रैक ट्रायल जैसे निर्देश भी दिए जा सकते हैं। इससे पहले हाईकोर्ट निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत रद्द कर पुलिस जांच पर भी कड़ी नाराजगी जता चुका है।

Sonali07 अग. 2026, 05:03 PM IST
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डॉक्टरों से मारपीट पर हाईकोर्ट सख्त! शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को जमानत के संकेत, लेकिन रहेंगी सबसे कड़ी शर्तें

मुंबई।

डोंबिवली स्थित केडीएमसी (कल्याण-डोंबिवली नगर निगम) के शास्त्री नगर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से कथित मारपीट के मामले में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के संकेत मिले हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने 6 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत दी जाती है तो वह "सबसे कड़ी शर्तों" के साथ होगी, ताकि जांच, गवाहों और न्यायिक प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मुकदमे की सुनवाई फास्ट-ट्रैक आधार पर कराई जाएगी।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2026 में डोंबिवली के केडीएमसी संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि नगरसेवक रमेश म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट की। विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक गर्भवती महिला के नवजात शिशु के लिए एनआईसीयू (NICU) में तत्काल बेड उपलब्ध नहीं हो सका और डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। इसी बात को लेकर अस्पताल में विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद पूरे महाराष्ट्र में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई।


डॉक्टरों का राज्यव्यापी विरोध

घटना के बाद केडीएमसी अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सहित विभिन्न चिकित्सक संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। कई स्थानों पर नियमित ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित हुईं और राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी।


हाईकोर्ट ने स्वतः लिया था संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 जुलाई 2026 को विशेष (शनिवार) पीठ का गठन कर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था। उसी दिन निचली अदालत द्वारा रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगाते हुए अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया मामला अत्यंत गंभीर है और मजिस्ट्रेट ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड तथा घटना की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जिस व्यक्ति पर अस्पताल में घुसकर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों पर हमला करने का आरोप हो, उसके मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता।


27 जुलाई की सुनवाई में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इसके बाद 27 जुलाई 2026 की सुनवाई में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने आरोपी के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "लोग आपको अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं और आप उन्हीं लोगों के सिर पर फाइलें और कुर्सियां मारते हैं? क्या यही एक जनप्रतिनिधि का आचरण है?" अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टरों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता और जनप्रतिनिधियों से कानून का पालन कराने की अपेक्षा की जाती है, न कि कानून हाथ में लेने की।


जांच पर भी उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने पुलिस जांच के तरीके पर भी असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष, प्रभावी और स्वतंत्र होनी चाहिए। इसके बाद राज्य सरकार को पुलिस उपायुक्त (DCP) रैंक के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी पूछा कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने जैसी असामान्य प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस का दायित्व कानून का पालन करने वाले नागरिकों और सार्वजनिक सेवकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


अब जमानत पर क्या रुख?

6 अगस्त 2026 की सुनवाई में अदालत ने कहा कि जांच अंतिम चरण में है और अगले लगभग 15 दिनों में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल होने की संभावना है। ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। हालांकि अदालत ने संकेत दिया कि जमानत मिलने की स्थिति में रमेश म्हात्रे को आरोपपत्र दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहना पड़ सकता है। जिस राज्य में वह रहेंगे, वहां के स्थानीय पुलिस थाने में सप्ताह में तीन बार उपस्थिति दर्ज करानी होगी। साथ ही गवाहों, पीड़ित डॉक्टरों या मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने पर रोक लगाने जैसी कड़ी शर्तें भी लागू की जा सकती हैं।


फास्ट-ट्रैक ट्रायल और विशेष लोक अभियोजक

हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक आधार पर कराई जाएगी ताकि पीड़ित डॉक्टरों को शीघ्र न्याय मिल सके। इसके साथ ही राज्य सरकार को विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त करने का निर्देश देने की भी बात कही गई है, जिससे मुकदमे का संचालन प्रभावी और समयबद्ध तरीके से हो सके।


कानूनी दृष्टि से क्यों अहम है फैसला?

यह मामला केवल एक जमानत याचिका तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से भी जुड़ा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि गंभीर मामलों में जमानत दी जा सकती है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अदालत आवश्यक होने पर बेहद कठोर शर्तें भी लगा सकती है। साथ ही अदालत ने यह संदेश भी दिया कि सार्वजनिक सेवकों पर हिंसा को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


मामले का विवरण

मामला: Court on its own motion vs. Ramesh Sukrya Mhatre

केस नंबर: Suo Motu Writ Petition No. 1 of 2026

मुख्य घटनाक्रम:

  • घटना: जुलाई 2026, केडीएमसी शास्त्री नगर अस्पताल, डोंबिवली

  • 19 जुलाई 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विशेष पीठ गठित कर स्वतः संज्ञान लिया और निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगाई।

  • 27 जुलाई 2026: अदालत ने जांच पर नाराजगी जताते हुए DCP रैंक के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया और आरोपी के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की।

  • 6 अगस्त 2026: हाईकोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ जमानत देने की मंशा जताई, फास्ट-ट्रैक ट्रायल और विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का संकेत दिया।

  • 7 अगस्त 2026: जमानत की शर्तों पर विस्तृत आदेश पारित किए जाने की संभावना व्यक्त की गई।                                                                                        

 पीठ: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम अंखाड