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खनिज कारोबार होगा और पारदर्शी; डिजिटल सिस्टम से 24 घंटे निगरानी

महाराष्ट्र में खनिज क्षेत्र में उत्खनन और परिवहन पर डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावी निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। ‘आईएलएमएस 2.0’ यानी एकीकृत खनन पट्टा प्रबंधन प्रणाली के जरिए खदानों की भौगोलिक स्थिति, ई-ट्रांजिट पास, वाहनों की आवाजाही और खनिज परिवहन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर नजर रखी जाएगी। जियो-फेंसिंग, स्वचालित प्रणाली और भविष्य में फास्टैग नेटवर्क के एकीकरण से अवैध उत्खनन, फर्जी पास, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

Priyanka Gaikwad11 अग. 2026, 01:40 PM IST
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खनिज कारोबार होगा और पारदर्शी; डिजिटल सिस्टम से 24 घंटे निगरानी
नागपुर : महाराष्ट्र के खनिज प्रशासन की ओर से खनिज क्षेत्र के कारोबार को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। ‘आईएलएमएस 2.0’ यानी एकीकृत खनन पट्टा प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से राज्य के खनिज क्षेत्र की गतिविधियों पर डिजिटल तरीके से निगरानी रखने की व्यवस्था की गई है। इस प्रणाली के तहत खदानों के सटीक भौगोलिक स्थान को डिजिटल रूप में दर्ज किया जा रहा है। इसके बाद खनन क्षेत्र की डिजिटल सीमा ‘जियो-फेंसिंग’ के माध्यम से निर्धारित की जाती है। इससे संबंधित खनन क्षेत्र के बाहर से ई-ट्रांजिट पास बनाने जैसी गड़बड़ियों पर नियंत्रण रखना संभव होगा।

इस डिजिटल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा ई-ट्रांजिट पास है। खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के लिए आवश्यक यह पास डिजिटल तरीके से जारी किया जाता है। वाहन खनन क्षेत्र में मौजूद है या नहीं और उससे संबंधित जरूरी अनुमतियां हैं या नहीं, इसकी जानकारी सिस्टम के जरिए जांची जा सकती है। इससे खनिज परिवहन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर भी डिजिटल माध्यम से नजर रखने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के फास्टैग नेटवर्क के साथ इस व्यवस्था को जोड़ने की योजना है।

इसके बाद टोल नाकों से गुजरने वाले खनिज परिवहन वाहनों की आवाजाही का स्वचालित तरीके से पता लगाया जा सकेगा। इससे वाहन ने किस मार्ग से यात्रा की, इसकी जानकारी प्रशासन के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। पर्यावरण मंजूरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और रॉयल्टी से संबंधित आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी डिजिटल प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य है। संबंधित अनुमति की अवधि समाप्त होने या जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने पर ई-ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया पर स्वचालित नियंत्रण रखा जा सकेगा। इस प्रणाली के माध्यम से खनिज उत्खनन से लेकर उसके परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

इससे अवैध उत्खनन, बिना अनुमति खनिज परिवहन, फर्जी ई-टीपी और ओवरलोडिंग जैसी गड़बड़ियों पर कार्रवाई करने के लिए प्रशासन को अधिक सटीक जानकारी मिल सकती है। कुल मिलाकर, खनिज क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पारंपरिक प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम करके व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘आईएलएमएस 2.0’, जियो-फेंसिंग, ई-ट्रांजिट पास और वाहन ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं से खनिज क्षेत्र में होने वाली अनियमितताओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।