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छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ Grain ATM, मशीन से मिलेगा राशन

छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को तकनीक से जोड़ते हुए Grain ATM यानी ‘अन्नपूर्ति’ की शुरुआत की है। शुरुआती चरण में तीन जिलों में लागू इस व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थी आधार आधारित पहचान के जरिए मशीन से अपना निर्धारित राशन प्राप्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने, कतार और समय की बचत करने तथा लाभार्थियों को अधिक सुविधाजनक तरीके से खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।

Neha Sharma11 अग. 2026, 05:58 PM IST
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छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ Grain ATM, मशीन से मिलेगा राशन

रायपुर: सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS को तकनीक से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘अन्नपूर्ति Grain ATM’ की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण को ज्यादा आसान, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। अब पात्र हितग्राहियों को पारंपरिक राशन दुकान पर लंबी कतार में खड़े होने के बजाय निर्धारित Grain ATM से अपना खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ देश का पांचवां राज्य बन गया है जहां इस तरह की Grain ATM सुविधा शुरू की गई है। शुरुआती चरण में इसे तीन जिलों में लागू किया गया है। इस व्यवस्था में राशन कार्ड साथ लेकर जाने की जरूरत नहीं होगी। लाभार्थी मशीन में अपना आधार नंबर दर्ज कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने हिस्से का खाद्यान्न प्राप्त कर सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहने की योजना है।


क्या है Grain ATM?

Grain ATM को आप अनाज निकालने वाली स्वचालित मशीन के तौर पर समझ सकते हैं। जिस तरह बैंक ATM में पहचान सत्यापित करने के बाद ग्राहक अपने खाते से पैसा निकालता है, उसी तरह Grain ATM में लाभार्थी की पहचान सत्यापित होने के बाद उसके राशन कोटे के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य PDS में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर वितरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। आधार आधारित पहचान के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि राशन सही लाभार्थी तक पहुंचे और वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। छत्तीसगढ़ में PDS पहले से ही Aadhaar-enabled प्रणाली का इस्तेमाल करता है।


आधार नंबर से मिलेगा राशन

नई व्यवस्था की सबसे अहम खासियत यह है कि लाभार्थी को राशन लेने के लिए पारंपरिक तरीके से कागजी प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहना होगा। रिपोर्टों के अनुसार Grain ATM में लाभार्थी को अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा और पहचान सत्यापन के बाद उसके निर्धारित खाद्यान्न कोटे के अनुसार अनाज निकाला जा सकेगा। इससे खास तौर पर उन लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है जिन्हें राशन दुकान के संचालन समय या लंबी कतारों के कारण परेशानी होती है। 24 घंटे उपलब्धता का मॉडल सफल रहता है तो लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार राशन प्राप्त कर सकेंगे।


5 किलो चावल प्रति व्यक्ति का प्रावधान क्या है?

Grain ATM की खबर के साथ ‘5 किलो चावल प्रति व्यक्ति’ की बात भी सामने आ रही है। यहां PDS की पात्रता को समझना जरूरी है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम यानी NFSA के तहत प्राथमिकता वाले परिवारों के लिए सामान्य तौर पर प्रति पात्र व्यक्ति प्रति माह 5 किलो खाद्यान्न की पात्रता निर्धारित की गई है। हालांकि छत्तीसगढ़ में PDS व्यवस्था राज्य के अपने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रावधानों के साथ भी संचालित होती है। राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्राथमिकता राशन कार्डों में परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर चावल की मात्रा निर्धारित है। एक सदस्यीय परिवार के लिए 10 किलो, दो सदस्यीय परिवार के लिए 20 किलो, तीन से पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए 35 किलो और पांच से अधिक सदस्यों वाले परिवार के लिए अतिरिक्त सदस्यों के हिसाब से मात्रा निर्धारित की गई है। इसलिए Grain ATM से मिलने वाला अनाज लाभार्थी की वास्तविक PDS पात्रता के आधार पर समझना अधिक सही होगा, न कि हर व्यक्ति के लिए एक समान मात्रा मान लेना।


एक मशीन में 2,500 किलो तक अनाज रखने की क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक अन्नपूर्ति Grain ATM में एक समय में करीब 2,500 किलोग्राम तक खाद्यान्न रखने की क्षमता है। इससे मशीन को नियमित रूप से बड़ी संख्या में लाभार्थियों को राशन उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है जहां राशन दुकानों पर लाभार्थियों की संख्या ज्यादा है और वितरण के समय भीड़ जमा होती है।


प्रवासी लाभार्थियों को भी मिल सकता है फायदा

Grain ATM व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ केवल स्थानीय राशन कार्डधारियों तक सीमित नहीं रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार दूसरे राज्यों के पात्र प्रवासी हितग्राही भी छत्तीसगढ़ में इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह सुविधा ‘One Nation One Ration Card’ की भावना के अनुरूप पोर्टेबिलिटी को बढ़ावा दे सकती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए राशन की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यदि डिजिटल पहचान और राशन पोर्टेबिलिटी के जरिए उन्हें अपने हिस्से का खाद्यान्न दूसरे स्थान पर मिल सके, तो उन्हें अपने मूल स्थान पर लौटने की जरूरत कम हो सकती है।


PDS में क्यों जरूरी है ऐसी तकनीक?

भारत का सार्वजनिक वितरण तंत्र दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। लेकिन पारंपरिक प्रणाली में राशन दुकान का समय, भीड़, मैनुअल प्रक्रियाएं और वितरण में पारदर्शिता जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। छत्तीसगढ़ में भी PDS के तहत हजारों उचित मूल्य की दुकानों के जरिए खाद्यान्न वितरित किया जाता है। CAG की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में PDS वितरण प्रक्रिया में Aadhaar आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का इस्तेमाल किया जाता रहा है। Grain ATM इसी डिजिटल व्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाने की कोशिश है, जहां लाभार्थी और राशन वितरण केंद्र के बीच पूरी प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाया जा सकता है।


लाभार्थियों को क्या फायदा होगा?

इस व्यवस्था के कई संभावित फायदे हैं। सबसे पहला फायदा समय की बचत है। अगर मशीनें वास्तव में 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं, तो लाभार्थी राशन दुकान खुलने के निर्धारित समय का इंतजार किए बिना अपने सुविधाजनक समय पर राशन प्राप्त कर सकता है। दूसरा फायदा कतार कम होने का है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों वाले इलाकों में मशीन आधारित वितरण से राशन दुकानों पर भीड़ का दबाव कम किया जा सकता है।

तीसरा फायदा पारदर्शिता का है। डिजिटल प्रमाणीकरण के कारण यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किस लाभार्थी ने कब और कितना खाद्यान्न प्राप्त किया। चौथा फायदा पोर्टेबिलिटी का है। यदि दूसरे राज्यों से आने वाले पात्र लाभार्थियों को भी सुविधा मिलती है तो प्रवासी श्रमिकों के लिए PDS की पहुंच और बेहतर हो सकती है।


क्या इससे राशन दुकानों की भूमिका खत्म हो जाएगी?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। Grain ATM को PDS की पूरी व्यवस्था के विकल्प के बजाय वितरण के एक नए माध्यम के रूप में देखना चाहिए। राशन की खरीद, भंडारण, परिवहन, आवंटन और पात्रता निर्धारण जैसी पूरी सप्लाई चेन अभी भी सरकारी PDS व्यवस्था से जुड़ी रहेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक PDS व्यवस्था में खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए राज्य की खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति प्रणाली तथा संबंधित एजेंसियां काम करती हैं। Grain ATM मुख्य रूप से अंतिम चरण यानी लाभार्थी तक राशन पहुंचाने की प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक कदम है।


चुनौतियां भी कम नही

Grain ATM जैसी व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी विश्वसनीयता की होगी। मशीन खराब होने, बिजली या नेटवर्क की समस्या, आधार प्रमाणीकरण में दिक्कत या मशीन में खाद्यान्न खत्म होने की स्थिति में लाभार्थियों को वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत होगी। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डिजिटल साक्षरता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हर लाभार्थी के लिए मशीन का इस्तेमाल आसान हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर सहायता और जागरूकता जरूरी होगी। इसके अलावा बुजुर्गों, दिव्यांगों और उन लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा जिन्हें आधार प्रमाणीकरण या मशीन संचालन में परेशानी हो सकती है।


अगर मॉडल सफल हुआ तो बढ़ सकता है दायरा

अभी यह पहल शुरुआती चरण में है और तीन जिलों से इसकी शुरुआत की गई है। यदि मशीनें सुचारु रूप से काम करती हैं और लाभार्थियों को वास्तव में समय और श्रम की बचत होती है, तो भविष्य में इस मॉडल को राज्य के अन्य हिस्सों तक विस्तार दिया जा सकता है। यह प्रयोग छत्तीसगढ़ के PDS को अधिक डिजिटल और स्वचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब सरकारी सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड डिजिटल करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सीधे और आसानी से सेवा उपलब्ध कराना है।


कुल मिलाकर, Grain ATM का उद्देश्य राशन वितरण की उस पारंपरिक तस्वीर को बदलना है जिसमें लाभार्थी को राशन दुकान पर जाकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। आधार आधारित पहचान, स्वचालित वितरण और 24 घंटे उपलब्धता जैसे फीचर सफलतापूर्वक लागू होते हैं तो यह PDS को ज्यादा सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि इस योजना की असली सफलता इस बात से तय होगी कि यह तकनीक जमीन पर कितनी विश्वसनीय तरीके से काम करती है और जरूरतमंद लाभार्थियों को बिना तकनीकी बाधा के उनका पूरा निर्धारित राशन मिल पाता है या नहीं।