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जमीन मुआवजा व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब
भूमि अधिग्रहण मुआवजा विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के बजाय न्यायिक अधिकारियों द्वारा मामलों की सुनवाई अधिक निष्पक्ष होगी। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में संशोधन पर विचार किया जा रहा है
Neha Sharma27 जुल. 2026, 07:03 PM IST

नई दिल्ली: भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि जब सरकार ही जमीन का अधिग्रहण करती है, तो उसी सरकार के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मुआवजा विवाद का फैसला करना निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर सकता है। कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों की सुनवाई न्यायिक अधिकारियों या न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त मंच द्वारा की जानी चाहिए।
क्या है मामला?
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा विवादों का निपटारा फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों (Arbitrator) द्वारा किया जाता है। कई भूमि मालिकों ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए कहा कि जब सरकार स्वयं अधिग्रहण कर रही है, तो सरकारी अधिकारी से निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद करना कठिन हो सकता है। इसी मुद्दे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिया कि भूमि मुआवजा विवादों का फैसला ऐसे मंच को करना चाहिए जो न्यायिक रूप से प्रशिक्षित और स्वतंत्र हो। अदालत ने कहा कि इससे प्रभावित लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।
केंद्र सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम (National Highways Act) में संशोधन करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत भूमि मुआवजा विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी न्यायिक अधिकारियों को देने की संभावना पर काम किया जा रहा है। इस आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सरकार के फैसले का इंतजार करने की बात कही।
इसका क्या असर होगा?
यदि कानून में संशोधन होता है, तो—
- भूमि मालिकों को अधिक निष्पक्ष सुनवाई मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- मुआवजा विवादों के समाधान में पारदर्शिता आएगी।
- भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में लोगों का विश्वास मजबूत हो सकता है।
- भविष्य की सड़क और हाईवे परियोजनाओं में विवादों के समाधान की प्रक्रिया बदल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भूमि अधिग्रहण और मुआवजा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार पर है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में कब और किस प्रकार का संशोधन लाती है। यदि बदलाव लागू होते हैं, तो देशभर में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवादों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत हो सकती है।
