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झारखंड-ओडिशा सांसदों से नड्डा की अहम बैठक

जेपी नड्डा ने झारखंड और ओडिशा के सांसदों के साथ बैठक कर टीबी उन्मूलन अभियान को तेज करने पर जोर दिया। 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के दौरान देशभर में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग और 7 लाख से ज्यादा टीबी मामलों की पहचान की गई। झारखंड और ओडिशा में भी हजारों मरीज सामने आए। बैठक में शुरुआती जांच, समय पर उपचार, पोषण सहायता, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सांसदों से अपने क्षेत्रों में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर टीबी के खिलाफ अभियान को मजबूत करने की अपील की गई।

Vindhya Dubey15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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झारखंड-ओडिशा सांसदों से नड्डा की अहम बैठक

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने झारखंड और ओडिशा के सांसदों के साथ बैठक कर देश से टीबी को खत्म करने के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। बैठक में टीबी की जल्द पहचान, समय पर उपचार, मरीजों को पोषण संबंधी सहायता और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी मौजूद रहे। ‘Parliamentarians Championing a TB Mukt Bharat’ अभियान के तहत हुई इस बैठक में दोनों राज्यों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने हिस्सा लिया।

100 दिवसीय अभियान में 2.2 करोड़ लोगों की जांच

बैठक के दौरान हाल ही में संपन्न 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। अभियान के तहत देश के करीब 1.58 लाख उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों में टीबी की सक्रिय पहचान के लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई। अभियान के दौरान 2.2 करोड़ से अधिक संवेदनशील लोगों की जांच की गई और 7 लाख से ज्यादा नए टीबी मामलों की पहचान हुई। इनमें करीब 1.97 लाख ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं थे। सक्रिय स्क्रीनिंग के कारण ऐसे मरीजों की भी पहचान संभव हुई, जो सामान्य परिस्थितियों में जांच से बाहर रह सकते थे।

झारखंड और ओडिशा में हजारों मरीजों की पहचान

अभियान के दौरान झारखंड में 16,754 टीबी मरीजों की पहचान हुई। इनमें 4,574 ऐसे मरीज थे, जिनमें जांच के समय स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए थे। वहीं ओडिशा में 15,268 टीबी मरीज सामने आए, जिनमें 3,514 एसिम्प्टोमैटिक मामले शामिल थे। दोनों राज्यों में शहरी झुग्गियों, निर्माण स्थलों, प्रवासी श्रमिकों, खनन क्षेत्रों और अन्य उच्च जोखिम वाले इलाकों में स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया गया।

सांसदों से जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका की अपील

जेपी नड्डा ने सांसदों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने की अपील की। उन्होंने नियमित रूप से टीबी सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता की समीक्षा करने तथा मरीजों को समय पर जांच और उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे जनभागीदारी से जुड़े एक व्यापक अभियान में बदलने की जरूरत है, ताकि मरीजों की जल्द पहचान हो और उपचार पूरा कराने में किसी तरह की बाधा न आए।

तकनीक के इस्तेमाल से बढ़ी जांच की क्षमता

टीबी की पहचान को तेज और प्रभावी बनाने के लिए देश में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। मॉलिक्यूलर टेस्टिंग मशीनों के नेटवर्क का विस्तार किया गया है। इसके अलावा फील्ड स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से ऐसे मरीजों की पहचान करने में सहायता मिल रही है, जिनमें शुरुआती चरण में टीबी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

खनन और प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों पर फोकस

झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में खनन और औद्योगिक क्षेत्रों, प्रवासी श्रमिकों, आदिवासी आबादी, शहरी झुग्गियों और कुपोषण से प्रभावित समुदायों के बीच टीबी की रोकथाम के लिए विशेष रणनीति की जरूरत है। बैठक में मरीजों को उपचार के साथ-साथ पोषण, मानसिक-सामाजिक सहयोग और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। सांसदों से अपने क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों तथा संगठनों को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने की अपील की गई। केंद्र सरकार का जोर टीबी की जल्द पहचान, मुफ्त और समयबद्ध उपचार, तकनीक आधारित स्क्रीनिंग और सामुदायिक भागीदारी के जरिए देश को टीबी मुक्त बनाने पर है। झारखंड और ओडिशा के सांसदों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।