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डायबिटीज पर नई रिसर्च, पुरुषों में दिल-किडनी का खतरा ज्यादा

टाइप-2 डायबिटीज को लेकर हुई नई स्टडी में पुरुषों और महिलाओं में बीमारी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम अलग पाए गए हैं। रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा ज्यादा देखा गया, जबकि महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां अधिक दर्ज हुईं। स्टडी में हाई ब्लड प्रेशर दोनों में आम समस्या रही।

Neha Sharma01 सित. 2026, 05:07 PM IST
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डायबिटीज पर नई रिसर्च, पुरुषों में दिल-किडनी का खतरा ज्यादा

नई दिल्ली: टाइप-2 डायबिटीज को लेकर एक नई स्टडी में सामने आया है कि इस बीमारी के बाद पुरुषों और महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां अलग-अलग तरीके से सामने आ सकती हैं। ब्रिटेन में हुई इस रिसर्च में 2010 से 2020 के बीच टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हुए 28,720 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, किडनी की गंभीर बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बढ़ने के तरीके को देखा।


पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ा खतरा ज्यादा

स्टडी में पाया गया कि टाइप-2 डायबिटीज वाले पुरुषों में हृदय रोग या किडनी की गंभीर बीमारी की ओर बढ़ने की संभावना महिलाओं की तुलना में ज्यादा थी। करीब 8.4% पुरुष इस तरह के स्वास्थ्य जोखिम वाले समूह में आए, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 5.3% रहा। शोध में यह भी पाया गया कि पुरुषों में कुछ जटिलताएं महिलाओं की तुलना में पहले दिखाई दे सकती हैं।


महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या ज्यादा

वहीं महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अधिक दर्ज की गईं। इनमें चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं शामिल थीं। स्टडी के अनुसार, 8.1% महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या दर्ज हुई, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 5.3% था। शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज की लंबे समय तक देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना जरूरी है।


हाई ब्लड प्रेशर सबसे आम समस्या

रिसर्च में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) पुरुषों और महिलाओं दोनों में सबसे आम समस्या रही। अध्ययन में यह पुरुषों के 21.1% और महिलाओं के 20.2% मामलों में देखा गया। इससे यह संकेत मिलता है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में ब्लड शुगर के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की भी नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है।


मानसिक स्वास्थ्य समस्या और समय से पहले मौत के बीच संबंध

स्टडी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और मृत्यु के जोखिम के बीच भी संबंध देखा गया। जिन मरीजों में डायबिटीज के बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आई, उनमें समय से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि एक समान बीमारी की स्थिति वाले समूह में पुरुषों की औसत मृत्यु उम्र महिलाओं की तुलना में करीब 9 साल कम थी। हालांकि, यह एक observational study है, इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि डायबिटीज ने सीधे तौर पर इन अंतर को पैदा किया।


बीमारी की निगरानी का तरीका बदलने की जरूरत

शोधकर्ताओं के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों की देखभाल करते समय केवल ब्लड शुगर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं हो सकता। अलग-अलग मरीजों में बीमारी से जुड़ी दूसरी समस्याएं अलग समय पर सामने आ सकती हैं। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं की जल्दी निगरानी और महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने से जोखिम वाली स्थितियों की पहचान पहले की जा सकती है।


स्टडी की सीमाएं भी समझना जरूरी

यह रिसर्च पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर आधारित थी और इसमें अलग-अलग बीमारियों के सामने आने का क्रम देखा गया। इसलिए इसके नतीजे यह बताते हैं कि किन समस्याओं के बीच संबंध दिखाई देता है, लेकिन यह साबित नहीं करते कि टाइप-2 डायबिटीज ने सीधे किसी खास समस्या को पैदा किया। शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि लोगों के स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल करने के तरीके और बीमारी की पहचान में अंतर भी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।


क्या कहती है पूरी स्टडी?

कुल मिलाकर, नई रिसर्च यह बताती है कि टाइप-2 डायबिटीज का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं हो सकता। पुरुषों में दिल और किडनी से जुड़ी परेशानियों का जोखिम अधिक दिखा, जबकि महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा दर्ज हुईं। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में डायबिटीज की देखभाल को मरीज के जोखिम और जरूरत के अनुसार ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार करने पर ध्यान दिया जा सकता है।