health

नागपुर मंडल के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे 46 पुराने मेडिकल उपकरण, शासन ने दी धनलेखन की मंजूरी

महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पतालों में वर्षों से उपयोग में रहे, लेकिन अब तकनीकी रूप से अनुपयोगी और कालबाह्य हो चुके 46 चिकित्सा उपकरणों (Medical Equipment) को धनलेखन (Write-off) करने की मंजूरी दे दी है। सार्वजनिक आरोग्य विभाग ने 4 अगस्त 2026 को इस संबंध में शासन निर्णय (Government Resolution) जारी किया। यह निर्णय नागपुर, वर्धा, भंडारा, गड़चिरोली और चंद्रपुर जिलों के जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में स्थापित उपकरणों पर लागू होगा।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:13 PM IST
खबर शेयर करें:
नागपुर मंडल के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे 46 पुराने मेडिकल उपकरण, शासन ने दी धनलेखन की मंजूरी

सरकार के इस फैसले के बाद संबंधित अस्पतालों में वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़े उपकरणों को सरकारी रिकॉर्ड से हटाने और निर्धारित नियमों के अनुसार उनका निस्तारण (Disposal) करने का रास्ता साफ हो गया है।

78 उपकरणों का भेजा गया था प्रस्ताव
उपसंचालक, आरोग्य सेवा, नागपुर मंडल ने अपने अधीन आने वाले विभिन्न सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद कुल 78 ऐसे चिकित्सा उपकरणों की सूची तैयार की थी, जो लंबे समय से खराब, पुराने अथवा उपयोग के योग्य नहीं रह गए थे। इन उपकरणों को धनलेखन करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि इनमें से 32 उपकरणों की खरीद कीमत ₹1.25 लाख से अधिक लेकिन ₹2 लाख से कम थी। वित्तीय अधिकार नियमों के अनुसार इस श्रेणी के उपकरणों को धनलेखन करने की मंजूरी आयुक्त, आरोग्य सेवा स्तर से दी जा सकती थी, जिसे पहले ही स्वीकृति मिल चुकी थी। वहीं, शेष 46 उपकरण ऐसे थे जिनकी खरीद कीमत ₹2 लाख से अधिक थी। वित्तीय अधिकार नियम पुस्तिका, 1978 के तहत इस श्रेणी के उपकरणों को धनलेखन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास सुरक्षित है। इसी कारण यह प्रस्ताव सार्वजनिक आरोग्य विभाग के माध्यम से राज्य सरकार के समक्ष रखा गया और अब इसे औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।

क्या होता है 'धनलेखन'?
धनलेखन (Write-off) एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसके तहत ऐसे सरकारी उपकरण या मशीनें, जो तकनीकी रूप से पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी हों, मरम्मत योग्य न हों या जिनका उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक न हो, उन्हें सरकारी संपत्ति के रिकॉर्ड से हटाया जाता है। इसके बाद निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के अनुसार उनका निस्तारण किया जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अस्पतालों से कार्यरत या उपयोग में आने वाले उपकरण हटाए जा रहे हैं, बल्कि केवल वे मशीनें हटाई जाएंगी जो वर्षों से बेकार पड़ी हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार का उपयोग नहीं हो रहा है।

किन जिलों के अस्पताल होंगे प्रभावित?

  • नागपुर जिले में 7 उपकरण हटेंगे
नागपुर जिले के एसडीएच कामठी, मानसिक चिकित्सालय नागपुर और आईआरएल-एसटीडीसी नागपुर में स्थापित कुल सात उपकरणों को धनलेखन की मंजूरी दी गई है। इनमें दो Horizontal Autoclave, 100 mA X-Ray Machine, मानसिक चिकित्सालय का एक्स-रे विभाग उपकरण, दो GT Blot-48 मशीनें तथा एक Deep Freezer (-80°C) शामिल है।
  • वर्धा जिले में सबसे अधिक 26 उपकरण
वर्धा जिले के सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक 26 उपकरण धनलेखन के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें कई Ventilator, Blood Gas Analyzer, Operating Microscope, Laser Machine, C-Arm Mobile Machine, ELISA Reader with Washer, Blood Cell Counter, Laparoscope, Siemens एवं Allengers कंपनी की X-Ray Machines, Eco Machine, Two Body Mortuary Cabinet तथा Dental Chair सहित अन्य चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। इनमें कुछ उपकरण 1997 से लेकर 2013 के बीच खरीदे गए थे और अब तकनीकी रूप से अनुपयोगी घोषित किए जा चुके हैं।
  • भंडारा जिले में 3 उपकरण होंगे हटाए
भंडारा जिले में 300 MA X-Ray Unit, 100 MA X-Ray Machine तथा Blood Cell Counter को धनलेखन की मंजूरी दी गई है। इनमें कुछ मशीनें वर्ष 1982 से उपयोग में थीं।
  • गड़चिरोली जिले में 6 उपकरण
गड़चिरोली जिले के अस्पतालों में तीन Ventilator, Two Body Mortuary Cabinet तथा Fully Automatic Biochemistry Analyser सहित कुल छह उपकरणों को अनुपयोगी घोषित कर धनलेखन की अनुमति दी गई है।
  • चंद्रपुर जिले में 4 उपकरण
चंद्रपुर जिले में CBC Machine, Auto Refractometer with Stand, X-Ray Machine तथा Electrophoresis Machine सहित कुल चार उपकरणों को सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जाएगा।

किन नियमों के तहत मिली मंजूरी?
सार्वजनिक आरोग्य विभाग ने यह मंजूरी वित्तीय अधिकार नियम पुस्तिका, 1978 के भाग-1, उपविभाग-1 के नियम 146 के तहत प्रदान की है। साथ ही 17 अप्रैल 2015 के वित्त विभाग के शासन निर्णय का भी इसमें संदर्भ दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी उपकरणों का धनलेखन और निस्तारण निर्धारित नियमों, शर्तों एवं प्रक्रिया का पालन करते हुए ही किया जाएगा। यह शासन निर्णय केवल पुराने और अनुपयोगी चिकित्सा उपकरणों को सरकारी रिकॉर्ड से हटाने से संबंधित है। इस आदेश में कहीं भी नए उपकरणों की खरीद या अस्पतालों को नई मशीनें उपलब्ध कराने का उल्लेख नहीं किया गया है। नए उपकरणों की खरीद के लिए अलग प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या होगा असर?
सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में वर्षों से अनुपयोगी पड़े उपकरणों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करना और सरकारी संपत्ति का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है। धनलेखन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पतालों में अनुपयोगी मशीनों के स्थान पर भविष्य में आवश्यकता के अनुसार नए उपकरण स्थापित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया आसान हो सकती है। हालांकि, वर्तमान शासन निर्णय केवल पुराने उपकरणों को धनलेखन करने तक सीमित है।