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नोएडा मजदूर प्रदर्शन केस में बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA हिरासत की रद्द, राज्य की कहानी को बताया ‘गढ़ी हुई’

नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को बड़ा झटका देते हुए छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द कर दी। करीब पांच महीने से जेल में बंद आकृति को राहत देते हुए कोर्ट ने राज्य की पूरी कहानी को “गढ़ी हुई” करार दिया और कहा—अगर किसी दूसरे मामले में गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

Sonali02 सित. 2026, 03:28 PM IST
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नोएडा मजदूर प्रदर्शन केस में बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA हिरासत की रद्द, राज्य की कहानी को बताया ‘गढ़ी हुई’

प्रयागराज।

 नोएडा के अप्रैल 2026 के मजदूर प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। 25 वर्षीय आकृति दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई कर चुकी हैं और करीब पांच महीने से हिरासत में थीं। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने आकृति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनकी हिरासत जिस कहानी पर आधारित थी, वह राज्य की ओर से पेश की गई “गढ़ी हुई कहानी” (concocted story) थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आकृति चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया और उन्हें पथराव तथा वाहनों में आग लगाने के लिए प्रेरित किया।

13 मई 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आकृति चौधरी और पूर्व पत्रकार सत्याम वर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया था। उस समय पुलिस का दावा था कि दोनों की भूमिका हिंसा भड़काने में महत्वपूर्ण थी।

कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों को बारीकी से परखा। एक दिन पहले, 1 सितंबर को भी कोर्ट ने पुलिस से कथित पथराव और आगजनी में आकृति की भूमिका दिखाने वाला वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा था। कोर्ट ने सवाल किया था कि आखिर वह वीडियो कहां है जिसमें आकृति प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाती दिखाई दे रही हैं। राज्य ने गवाहों के बयानों और अन्य सामग्री पर भरोसा किया, लेकिन पीठ ने कथित वीडियो साक्ष्य को लेकर भी स्पष्ट सवाल किए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि यदि सत्ता का मनमाना इस्तेमाल सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों पर लागत लगाई जा सकती है।

गिरफ्तारी और BNSS नोटिस पर भी सवाल

बुधवार की सुनवाई में राज्य की ओर से बताया गया कि आकृति को 12 अप्रैल 2026 को सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया था और उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस भी जारी किया गया था। राज्य का दावा था कि आकृति ने भीड़ को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी की परिस्थितियों, BNSS नोटिस और NSA हिरासत की प्रक्रिया को एक साथ देखते हुए कई प्रक्रियात्मक खामियां पाईं। इसी आधार पर कोर्ट ने हिरासत को कानूनन टिकाऊ नहीं माना।

पहले सुप्रीम कोर्ट भी भेज चुका था हाईकोर्ट

आकृति चौधरी ने पहले सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था। 8 मई 2026 को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने उन्हें तत्काल राहत देने के बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा था। उस सुनवाई में उनके वकील ने गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद आकृति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी हिरासत को चुनौती दी।

पुलिस का क्या था दावा?

पुलिस का आरोप था कि नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा स्वतःस्फूर्त नहीं थी बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस ने आकृति और अन्य आरोपियों पर प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। वहीं, आकृति के पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ ठोस आपराधिक साक्ष्य नहीं हैं।

हाईकोर्ट के फैसले का बड़ा संदेश

इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना सामान्य आपराधिक मुकदमे से अलग और गंभीर प्रकृति की कार्रवाई है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी हिरासत के लिए राज्य द्वारा प्रस्तुत सामग्री और पूरी प्रक्रिया का कानून के अनुरूप होना जरूरी है। फिलहाल कोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करते हुए उनकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट होगा कि किन-किन कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारों पर NSA आदेश को निरस्त किया गया। यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी लंबित नहीं है, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाना है।