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न्यायिक रिक्तियों पर बॉम्बे HC में ‘आउटबर्स्ट’ पड़ा भारी, महाराष्ट्र लॉ सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायिक पदों की रिक्तियों को लेकर कथित ‘आउटबर्स्ट’ के मामले में महाराष्ट्र के लॉ डिपार्टमेंट के सचिव दिलीप एस. घुमारे को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, हालांकि 28 सितंबर तक हाईकोर्ट को मामले में अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया है।

Sonali11 सित. 2026, 07:46 PM IST
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न्यायिक रिक्तियों पर बॉम्बे HC में ‘आउटबर्स्ट’ पड़ा भारी, महाराष्ट्र लॉ सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायिक पदों की रिक्तियों को लेकर कथित तौर पर ‘आउटबर्स्ट’ करने के मामले में महाराष्ट्र के लॉ डिपार्टमेंट के सचिव और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी दिलीप एस. घुमारे को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट को 28 सितंबर 2026 तक इस मामले में अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने घुमारे की याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले को 28 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। घुमारे ने बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से शुरू की गई अवमानना कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायिक रिक्तियों को लेकर हाईकोर्ट में हुआ विवाद

मामला उस समय सामने आया जब घुमारे महाराष्ट्र के लॉ डिपार्टमेंट के सचिव के रूप में बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में न्यायिक पदों की रिक्तियों के लिए हाईकोर्ट को जिम्मेदार ठहराते हुए कथित तौर पर आपत्ति जताई और अपना आपा खो दिया। घुमारे के खिलाफ इसी कथित व्यवहार को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह पेश हुए। विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवाद का मूल कारण महाराष्ट्र में न्यायिक पदों को भरने से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने कहा कि राज्य में कुल 1,101 न्यायिक पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 385 पद ही भरे गए हैं। उनका तर्क था कि न्यायिक पद स्वीकृत होने के बावजूद हाईकोर्ट द्वारा उन्हें भरा नहीं गया।

‘मैं माइक्रोफोन के सामने खड़ा नहीं था’

घुमारे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कथित ‘आउटबर्स्ट’ के आरोप से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि घुमारे ने हाईकोर्ट में जजों के सामने चिल्लाया नहीं था। उनका कहना था कि घुमारे माइक्रोफोन के सामने खड़े नहीं थे और अपनी बात कोर्ट तक पहुंचाने के लिए उन्हें आवाज ऊंची करनी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष ने बार-बार आग्रह किया कि हाईकोर्ट की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग मंगाकर उसका परीक्षण किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में उस दौरान क्या हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम आदेश पर लगाई अस्थायी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अवमानना कार्यवाही को पूरी तरह रोकने से इनकार कर दिया है। इसका अर्थ है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में कार्यवाही जारी रह सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को 28 सितंबर तक मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उस समय सुप्रीम कोर्ट यह भी देख सकता है कि घुमारे के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही और हाईकोर्ट में हुई घटना के संबंध में रिकॉर्ड पर क्या तथ्य मौजूद हैं। यह मामला न्यायपालिका और प्रशासन के बीच समन्वय तथा न्यायिक पदों की रिक्तियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अब मुख्य सवाल यह रहेगा कि हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान घुमारे के कथित व्यवहार को किस संदर्भ में देखा जाना चाहिए और उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही को जारी रखने का आधार क्या है।