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पेंशन पाने वाले वरिष्ठ नागरिक को मेंटेनेंस का अधिकार नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित पेंशन पाने और खुद का खर्च उठाने में सक्षम वरिष्ठ नागरिक को Senior Citizens Act के तहत मेंटेनेंस का लाभ नहीं मिल सकता। कोर्ट ने 65 वर्षीय पिता की याचिका खारिज कर दी।

मुंबई:
क्या नियमित पेंशन पाने वाला वरिष्ठ नागरिक अपने बेटे से Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत भरण-पोषण की मांग कर सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सवाल पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि जो वरिष्ठ नागरिक नियमित पेंशन और फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहा है और अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है, वह इस कानून की धारा 4 के तहत मेंटेनेंस का हकदार नहीं होगा। जस्टिस नंदेश एस. देशपांडे ने 65 वर्षीय एक पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने Senior Citizens Welfare Tribunal और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा उसकी अर्जी खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता अपने बेटे के पिता और अपनी बहू के ससुर हैं। उन्होंने Senior Citizens Act की धारा 5 के तहत आवेदन किया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने वास्तव में मेंटेनेंस की मांग नहीं की थी। उनका कहना था कि जिस संपत्ति पर उनका अधिकार है, उसमें उन्हें रहने और अस्तित्व बनाए रखने का अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि संबंधित संपत्ति उनके बेटे के नाम पर उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए पैसों से खरीदी गई थी। बाद में बेटे ने उनके पक्ष में एक रजिस्टर्ड Gift Deed भी निष्पादित की थी।
बेटे और बहू की क्या दलील थी?
प्रतिवादियों की ओर से दलील दी गई कि Senior Citizens Welfare Tribunal और अपीलीय प्राधिकरण दोनों ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए याचिका खारिज की थी। अधिकारियों ने पाया था कि याचिकाकर्ता को नियमित पेंशन मिल रही थी। इसके अलावा उनकी दिवंगत पत्नी भी सरकारी कर्मचारी थीं और उनकी मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन भी मिल रही थी। इसलिए वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने की स्थिति में थे। प्रतिवादियों का कहना था कि Senior Citizens Act का उद्देश्य ऐसे माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत के आधार पर भरण-पोषण उपलब्ध कराना है, जो अपना खर्च खुद उठाने में सक्षम नहीं हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अधिकारियों के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए कहा कि 2007 का कानून वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता को जरूरत के आधार पर भरण-पोषण उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। कानून का उद्देश्य प्रत्येक ऐसे वरिष्ठ नागरिक को आर्थिक लाभ देना नहीं है जो पहले से ही अपने खर्च का प्रबंध करने में सक्षम है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता नियमित पेंशन के साथ-साथ अपनी दिवंगत पत्नी की फैमिली पेंशन भी प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला गया कि वह अपना भरण-पोषण करने में सक्षम हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में याचिकाकर्ता को Senior Citizens Act की धारा 4 के तहत मेंटेनेंस का लाभ नहीं दिया जा सकता।
याचिका हुई खारिज
इन तथ्यों और कानून के उद्देश्य को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने 65 वर्षीय पिता की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि Senior Citizens Act का लाभ जरूरत-आधारित है। केवल वरिष्ठ नागरिक होने के आधार पर धारा 4 के तहत मेंटेनेंस का दावा स्वतः स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर जब संबंधित व्यक्ति के पास नियमित आय या पेंशन हो और वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम हो।
