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प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, कई मौतों की सूचना; 20 से ज्यादा लोगों के रेस्क्यू का दावा

प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर के मनौरी इलाके में एयरफोर्स स्टेशन के पास सोमवार को पटाखा निर्माण इकाई में जोरदार विस्फोट से हड़कंप मच गया। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री के साथ आसपास के कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को चारपाई के सहारे बाहर निकाला। पुलिस, प्रशासन और एयरफोर्स की टीमें मौके पर राहत-बचाव में जुटी हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए प्रशासन की अंतिम पुष्टि का इंतजार है।

Samant Dubey31 अग. 2026, 04:57 PM IST
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प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, कई मौतों की सूचना; 20 से ज्यादा लोगों के रेस्क्यू का दावा

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प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, कई मौतों की सूचना; 20 से ज्यादा लोगों के रेस्क्यू का दावा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर सोमवार को एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए जोरदार विस्फोट से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना मनौरी इलाके में एयरफोर्स स्टेशन के पास बताई जा रही है। विस्फोट इतना तेज था कि पटाखा फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और आसपास के कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में स्थानीय लोग घायलों को चारपाई के सहारे सुरक्षित स्थान तक ले जाते दिखाई दिए। पुलिस, प्रशासन और एयरफोर्स की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

दोपहर करीब 12 बजे हुआ धमाका

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक घटना सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। उस समय पटाखा निर्माण इकाई में करीब 20 से 25 लोगों के मौजूद होने की बात सामने आई है। अचानक हुए विस्फोट के बाद फैक्ट्री में आग लग गई और वहां रखे पटाखों के कारण कुछ समय तक लगातार धमाकों की आवाजें आती रहीं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक धमाके की आवाज आसपास के कई इलाकों तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद धुएं का गुबार दिखाई दिया और लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

कई मकान भी हुए क्षतिग्रस्त

पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट का असर आसपास के घरों पर भी पड़ा। अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 5 से 7 मकानों के क्षतिग्रस्त या ढहने की जानकारी सामने आई है। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बाद बचाव दलों ने फैक्ट्री के साथ आसपास के मकानों में भी तलाश शुरू की। घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम किया गया और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि हादसे के समय कितने लोग अंदर मौजूद थे।

मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े

हादसे के बाद सामने आई शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और फंसे लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई। शुरुआती जानकारी में एक मौत और 13 लोगों के फंसे होने की बात कही गई थी। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच और करीब 15 लोगों के मलबे में फंसे होने की जानकारी सामने आई।

इसके बाद एक अन्य मीडिया अपडेट में 8 लोगों की मौत और 22 लोगों के रेस्क्यू का दावा किया गया। हालांकि इन आंकड़ों की अंतिम प्रशासनिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए फिलहाल हादसे में कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की पुष्टि वाली भाषा इस्तेमाल करना उचित है। राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद प्रशासन की ओर से अंतिम आंकड़ा सामने आने की उम्मीद है।

चारपाई पर घायलों को अस्पताल ले गए लोग

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत-बचाव में मदद की। घटनास्थल पर एंबुलेंस और राहत दलों के पहुंचने से पहले लोगों ने घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया। कुछ घायलों को स्थानीय लोगों ने चारपाई के जरिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इसके बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस और एयरफोर्स की टीमें मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल एयरफोर्स स्टेशन के पास होने के कारण एयरफोर्स की टीमें भी राहत-बचाव अभियान में शामिल हुईं। सबसे पहले आग और विस्फोट के खतरे को नियंत्रित करने तथा घटनास्थल को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया गया। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई।

फैक्ट्री में कितने लोग थे?

प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक घटना के समय पटाखा निर्माण इकाई में करीब 20 से 25 लोग मौजूद हो सकते थे। हालांकि यह संख्या भी प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। बचाव अभियान के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्ट्री में काम करने वाले सभी मजदूर सुरक्षित बाहर निकल पाए या नहीं और आसपास के मकानों में कितने लोग मौजूद थे।

लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की होगी जांच

हादसे के बाद पटाखा फैक्ट्री के लाइसेंस, निर्माण और भंडारण की अनुमति तथा सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन यह जांच करेगा कि इकाई के पास पटाखा निर्माण के लिए जरूरी अनुमति थी या नहीं और वहां विस्फोटक सामग्री के भंडारण एवं निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले फैक्ट्री को अवैध या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली बताना उचित नहीं होगा।

धमाका कैसे हुआ, अभी कारण साफ नहीं

विस्फोट की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। प्रारंभिक तौर पर पटाखा निर्माण इकाई में मौजूद विस्फोटक सामग्री से घटना जुड़ी होने की आशंका है, लेकिन विस्फोट किस कारण शुरू हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फोरेंसिक और प्रशासनिक जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

कौशांबी में अलग पटाखा विस्फोट की भी खबर

इसी दौरान कौशांबी के महमदपुर गांव में घर के अंदर पटाखे बनाए जाने के दौरान अलग विस्फोट की घटना की भी जानकारी सामने आई है। इस घटना में भी लोगों के घायल होने की बात कही गई है। महमदपुर की घटना को मनौरी की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से अलग घटना माना जा रहा है। दोनों घटनाओं के आंकड़ों को एक साथ जोड़ना सही नहीं होगा।

हादसे से उठे सुरक्षा पर सवाल

मनौरी की घटना ने पटाखा निर्माण और भंडारण से जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटाखों में इस्तेमाल होने वाली विस्फोटक सामग्री के कारण छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। अब प्रशासन की जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि फैक्ट्री किस क्षमता से संचालित हो रही थी, वहां कितनी मात्रा में सामग्री मौजूद थी, सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्था कैसी थी और आसपास के रिहायशी क्षेत्र में ऐसी इकाई का संचालन किन नियमों के तहत किया जा रहा था।

प्रशासनिक जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस, प्रशासन और बचाव दल घटनास्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं। मलबा हटाने और तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही मृतकों, घायलों और नुकसान का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो सकेगा।

मनौरी में हुआ यह विस्फोट न केवल जान-माल के नुकसान की वजह बना है, बल्कि पटाखा निर्माण इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके आसपास बसे रिहायशी इलाकों की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।