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फेसबुक-इंस्टाग्राम ने युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ा; Meta पर ९,०३० करोड़ रुपये का जुर्माना
अमेरिका के न्यू मैक्सिको में Facebook और Instagram के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने के मामले में Meta के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। अदालत ने कंपनी पर ९,०३० करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए ४ हजार करोड़ रुपये प्रतिबंधात्मक उपायों पर खर्च करने के निर्देश दिए हैं।
Priyanka Gaikwad08 अग. 2026, 01:40 PM IST

सांता ,(न्यू मैक्सिको ) : Facebook और Instagram के कारण बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर अमेरिका में Meta के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। Facebook और Instagram की मूल कंपनी Meta Platforms के खिलाफ दायर मामले में अदालत ने कंपनी को बड़ी आर्थिक राशि देने के साथ ही युवाओं की सुरक्षा के लिए अपने प्लेटफॉर्म में महत्वपूर्ण बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मार्च से Meta पर ५,४०० करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद अदालत ने कंपनी पर कुल ९,०३० करोड़ रुपये की आर्थिक जिम्मेदारी तय की है।
अदालत ने केवल आर्थिक जुर्माना ही नहीं लगाया, बल्कि नाबालिग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए Facebook और Instagram में कई बदलाव करने के निर्देश भी दिए हैं। इनमें किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण, कुछ समय के दौरान नोटिफिकेशन बंद करना और माता-पिता को अपने बच्चों के अकाउंट पर अधिक नियंत्रण देना जैसे उपाय शामिल हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कुछ डिजाइन और फीचर्स युवाओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं, ऐसा आरोप इस मामले में लगाया गया था। इससे सोशल मीडिया की लत लगने और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा बढ़ सकता है, ऐसा दावा किया गया।
कोन-कौन से उपाय किए जाएंगे ?
मानसिक उपचार: अदालत के आदेश के अनुसार ४ हजार करोड़ रुपये बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपचार और सेवाओं पर खर्च किए जाएंगे। इसमें अवसाद, चिंता और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार को शामिल किया जाएगा।
शिक्षा और प्रशिक्षण: डिजिटल लत और उसके युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को पहचानने के लिए शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
एआई सत्यापन: नाबालिग यूजर्स की पहचान और उम्र की पुष्टि करने के लिए एआई आधारित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को हानिकारक सामग्री और अनुचित संपर्क से सुरक्षित रखना होगा।
किशोरों की सुरक्षा के लिए और क्या बदलाव होंगे?
१८ वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। रात के समय पुश नोटिफिकेशन बंद करना, किशोरों के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना और माता-पिता को अपने बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर अधिक नियंत्रण देना जैसे उपाय इसमें शामिल हैं। Meta ने हालांकि अदालत के फैसले पर असहमति जताई है और इस फैसले के खिलाफ अपील करने की भूमिका अपनाई है। कंपनी का कहना है कि किशोर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पहले से ही कई उपाय किए गए हैं। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया कंपनियों के प्लेटफॉर्म डिजाइन, युवाओं को आकर्षित करने वाले फीचर्स और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी पर एक बार फिर बड़ी बहस शुरू हो गई है।
