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मानवाधिकार उल्लंघन पर सीधे Human Rights Court पहुंच सकेंगे पीड़ित, पहले आयोग जाने की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि न्याय पाने के लिए पहले मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना अनिवार्य नहीं है। पीड़ित सीधे Human Rights Court में शिकायत दर्ज करा सकता है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कर्नाटक के Rule 6 को वैध ठहराते हुए हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शुरू हुई कार्यवाही बहाल कर दी।

Sonali08 सित. 2026, 07:43 PM IST
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मानवाधिकार उल्लंघन पर सीधे Human Rights Court पहुंच सकेंगे पीड़ित, पहले आयोग जाने की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पीड़ित को शिकायत लेकर Human Rights Court का दरवाजा खटखटाने से पहले मानवाधिकार आयोग के पास जाना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने कर्नाटक राज्य मानवाधिकार न्यायालय नियम, 2006 के Rule 6 की वैधता को बरकरार रखा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें Rule 6 को असंवैधानिक बताते हुए उसके तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शुरू हुई कार्यवाही को भी बहाल कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला विजयपुरा के Sessions Judge एवं Special Judge (Human Rights Court) के सामने दायर शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया। Human Rights Court ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए CrPC की धारा 156(3) के तहत मामले की जांच के लिए Superintendent of Police को निर्देश दिया। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि Rule 6 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की व्यवस्था के अनुरूप नहीं है और राज्य सरकार को धारा 41 के तहत ऐसा नियम बनाने का अधिकार नहीं है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार करते हुए Rule 6 को असंवैधानिक घोषित कर दिया और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शुरू कार्यवाही रद्द कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि Protection of Human Rights Act, 1993 के तहत मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं। Human Rights Courts का उद्देश्य मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए प्रभावी न्यायिक मंच उपलब्ध कराना है। पीठ ने माना कि Rule 6 न तो 1993 के अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है और न ही राज्य को मिले नियम बनाने के अधिकार से बाहर है।

Rule 6 में क्या प्रावधान है?

कर्नाटक के Rule 6 के तहत मानवाधिकार उल्लंघन का पीड़ित व्यक्ति सीधे Human Rights Court में शिकायत कर सकता है। शिकायत पीड़ित के कानूनी प्रतिनिधि, किसी पंजीकृत NGO या किसी अन्य सार्वजनिक व्यक्ति की ओर से भी दायर की जा सकती है।

शिकायत मिलने के बाद Human Rights Court:

  • Superintendent of Police से नीचे के रैंक के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दे सकता है।

  • निजी शिकायतों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खुद जांच कर सकता है।

  • जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर सकता है।

  • जहां आवश्यक हो, अभियोजन की मंजूरी के मुद्दे पर विचार कर सकता है।

  • मामले का ट्रायल Sessions Court में लागू प्रक्रिया के अनुसार कर सकता है।

मानवाधिकार आयोग में जाना जरूरी नहीं

फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में पीड़ित के लिए पहले State Human Rights Commission या National Human Rights Commission के पास शिकायत करना कोई अनिवार्य पूर्व शर्त नहीं है। यानी यदि किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन किसी लोक सेवक द्वारा उसके पद के तहत काम करते हुए किया गया है, तो संबंधित व्यक्ति उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सीधे Human Rights Court का रुख कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

इस फैसले से मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में पीड़ितों के लिए न्याय पाने का एक सीधा न्यायिक रास्ता स्पष्ट हुआ है। साथ ही, राज्यों द्वारा Human Rights Courts के लिए बनाए गए नियमों की वैधता को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए Rule 6 को बरकरार रखा और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पहले शुरू की गई कार्यवाही को बहाल कर दिया।