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मेरठ में हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार l

कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने शास्त्रीनगर इलाके से तीन हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया, जो सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर ऑन डिमांड हथियार तैयार कराकर उनकी सप्लाई करते थे। आरोपियों के पास से अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। पूछताछ में गिरोह के मुख्य सरगना हाजी कलीम का नाम सामने आया है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क मेरठ के अलावा दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ है। आरोपियों के मोबाइल फोन से हथियार खरीदने वाले लोगों की पहचान की जा रही है और पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।

Kashish Rai05 अग. 2026, 06:46 PM IST
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मेरठ में हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार l

कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मेरठ पुलिस ने अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो ऑन डिमांड अवैध हथियार तैयार कराकर उनकी सप्लाई विभिन्न जिलों में करते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई अवैध हथियार बरामद किए हैं और गिरोह के फरार मास्टरमाइंड की तलाश शुरू कर दी है।


सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने बताया कि मंगलवार को लोहियानगर पुलिस को सूचना मिली थी कि शास्त्रीनगर क्षेत्र में तीन युवक अवैध हथियारों की सप्लाई करने आने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े तीन युवकों को रोककर पूछताछ की गई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद एक बैग से अवैध हथियार बरामद हुए, जिसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर थाने लाया गया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने ये हथियार हाजी कलीम नामक व्यक्ति से खरीदे थे, जो इस गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करते थे और उनकी मांग के अनुसार तमंचे और पिस्टल की सप्लाई करते थे। हथियारों की डिलीवरी गुप्त स्थानों पर की जाती थी, जिससे पुलिस की नजर से बचा जा सके।


शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह केवल मेरठ तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ है। पुलिस का मानना है कि गिरोह लंबे समय से अवैध हथियारों की तस्करी में सक्रिय था और विभिन्न आपराधिक तत्वों को हथियार उपलब्ध कराता था। फिलहाल पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और सप्लाई चेन की जानकारी जुटा रही है। सीओ संग्राम सिंह ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। मोबाइल में अवैध हथियारों की तस्वीरें, ग्राहकों के संपर्क और लेन-देन से जुड़ी जानकारी मिली है। पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने आरोपियों से हथियार खरीदे थे। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हथियार खरीदने वाले संभावित लोगों की सूची भी तैयार की जा रही है।


पुलिस के अनुसार, आरोपी पांच हजार रुपये में तमंचा और लगभग 30 हजार रुपये में पिस्टल बेचते थे। गिरोह हथियारों की गुणवत्ता और उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग कीमत वसूलता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने हथियार बेचे और किन-किन लोगों तक उनकी सप्लाई की गई। फरार मुख्य सरगना हाजी कलीम की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के पूरे नेटवर्क और हथियारों के स्रोत का बड़ा खुलासा हो सकता है। मेरठ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।