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यूपी में महिला कल्याण पर जोर, आंगनवाड़ी से स्वयं सहायता समूहों तक बढ़ा दायरा

उत्तर प्रदेश: राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर फोकस बढ़ाया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य कवर, छात्राओं के लिए स्कूटर योजना, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और महिला सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर जैसी योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के इन कदमों का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

Neha Sharma10 सित. 2026, 06:51 PM IST
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यूपी में महिला कल्याण पर जोर, आंगनवाड़ी से स्वयं सहायता समूहों तक बढ़ा दायरा

उत्तर प्रदेश: राज्य सरकार ने महिलाओं और ग्रामीण परिवारों से जुड़ी योजनाओं पर अपना फोकस बढ़ाया है। हाल के फैसलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य सुरक्षा, छात्राओं को स्कूटर देने की योजना, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली गतिविधियों को प्रमुखता दी गई है। सरकार के इन कदमों का असर महिला रोजगार, पोषण, बाल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ सकता है।


आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी

महिलाओं से जुड़े हालिया फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण कदम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने की घोषणा की है। सहायिकाओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। यह बदलाव सितंबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है। राज्य में करीब 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस व्यवस्था से जुड़ी हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल, मातृ स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मानदेय बढ़ाने के फैसले को महिला कार्यबल की आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।


5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर

मानदेय बढ़ाने के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों के लिए 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर देने की भी घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य इन फ्रंटलाइन महिला कर्मियों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा देना है। आंगनवाड़ी नेटवर्क महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं का सबसे अहम जमीनी माध्यम है। इसलिए सरकार की ओर से इन कार्यकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं में बदलाव का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पोषण और बाल विकास सेवाओं की डिलीवरी पर भी पड़ सकता है।


50 हजार छात्राओं को स्कूटर देने की योजना

सरकार ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं की आवाजाही आसान बनाने के लिए 50,000 छात्राओं को स्कूटर उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है। योजना के तहत स्नातक की अंतिम वर्ष की छात्राओं को लक्षित किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा पूरी करने वाली छात्राओं के लिए आवागमन की सुविधा बढ़ाना और उनकी पढ़ाई तथा आगे के अवसरों तक पहुंच आसान बनाना है। यह कदम खासतौर पर उन छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिन्हें कॉलेज या प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।


स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक मजबूती

उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए Self Help Groups यानी स्वयं सहायता समूहों पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य का Rural Livelihood Mission करीब 10.5 लाख स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क के जरिए ग्रामीण परिवारों को आजीविका से जोड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इससे 1.25 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में जुड़े हैं। इनमें 28 लाख से अधिक 'लखपति दीदी' शामिल हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, छोटे कारोबार, वित्तीय सेवाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।


सामूहिक विवाह योजना पर भी जोर

महिलाओं और गरीब परिवारों से जुड़ी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 17,758 जोड़ों के विवाह कराए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार ने 2026-27 में 72,448 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य रखा है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों

को विवाह के खर्च में सहायता देना और सामाजिक स्तर पर सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना है।


महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए One Stop Centres

महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश में One Stop Centres का नेटवर्क मौजूद है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार राज्य में 124 One Stop Centres चालू हैं। अप्रैल 2015 से जून 2026 तक इन केंद्रों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 3.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी जा चुकी है। इन केंद्रों पर हिंसा या संकट का सामना कर रही महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता, पुलिस सहायता, अस्थायी आश्रय और मनोसामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं।


पोषण और महिलाओं पर भी बढ़ा ध्यान

महिला और बाल विकास से जुड़ा एक बड़ा कार्यक्रम राष्ट्रीय पोषण माह 2026 भी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ। वाराणसी में 9 सितंबर को अभियान की शुरुआत हुई। इस वर्ष का विषय “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” रखा गया है। इस अभियान में बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण पर भी जोर है। केंद्र सरकार के अनुसार देशभर के 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 1.10 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों तक पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती बाल देखभाल सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। अभियान में संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन और आंगनवाड़ी केंद्रों की सामुदायिक निगरानी को प्रमुखता दी गई है।


महिला रोजगार और कौशल विकास पर भी जोर

केंद्र सरकार के Skill Manthan कार्यक्रम में भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को प्रमुख विषय बनाया गया है। 9 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम का विषय “Building Sustainable Livelihoods for Women” था। इसमें उत्तर प्रदेश के मेरठ और बिजनौर के उदाहरणों को सामने रखा गया, जहां कौशल विकास, उद्यमिता, वित्त, तकनीक और बाजार तक पहुंच को जोड़कर महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर बनाने पर जोर दिया गया।


चुनावी राजनीति से भी जुड़ रहा महिला कल्याण का एजेंडा

इन योजनाओं और घोषणाओं का समय भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार का फोकस महिलाओं और युवाओं के बीच सीधा संपर्क मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है। हालांकि इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि घोषणाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक कितनी तेजी और पारदर्शिता से पहुंचता है।


कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में महिलाओं से जुड़ी सरकारी नीति का दायरा केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। आंगनवाड़ी मानदेय, स्वास्थ्य सुरक्षा, छात्राओं की mobility, स्वयं सहायता समूह, कौशल विकास, पोषण और महिला सुरक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और वास्तविक लाभार्थियों का आंकड़ा इस पूरी नीति की प्रभावशीलता को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।