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संसद में उठा शिकायत निवारण का मुद्दा

संसद में नागरिकों की लंबित शिकायतों और उनके समय पर समाधान को लेकर चिंता जताई गई। सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और तय समयसीमा का हवाला दिया, लेकिन देरी और गुणवत्ता पर सवाल बने हुए हैं।

Neha Sharma07 अग. 2026, 05:14 PM IST
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संसद में उठा शिकायत निवारण का मुद्दा
संसद में हाल ही में नागरिकों की शिकायतों के समय पर समाधान को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने सरकार से पूछा कि आम जनता द्वारा दर्ज की जाने वाली शिकायतों का निपटारा कितनी तेजी और पारदर्शिता से किया जा रहा है। यह मुद्दा सीधे तौर पर सुशासन, जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

संसद सत्र के दौरान कई सांसदों ने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि देशभर में लाखों शिकायतें विभिन्न सरकारी पोर्टलों, हेल्पलाइन और विभागों में लंबित पड़ी हैं। इन शिकायतों में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, पेंशन, और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं।

सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्रालय ने बताया कि शिकायतों के समाधान के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और तंत्र विकसित किए गए हैं, जैसे कि CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System), जहां नागरिक ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा राज्यों में भी अलग-अलग पोर्टल और कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं।

सरकार का दावा है कि शिकायतों के निपटान के लिए समयसीमा तय की गई है और अधिकतर मामलों में निर्धारित अवधि के भीतर समाधान किया जा रहा है। हालांकि, कई मामलों में देरी, जवाब की गुणवत्ता और फॉलो-अप की कमी को लेकर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शिकायत दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी और संतोषजनक समाधान होना जरूरी है। इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, नियमित मॉनिटरिंग, और नागरिकों से फीडबैक लेना बेहद आवश्यक है।

क्यों है यह मुद्दा महत्वपूर्ण?
  • नागरिकों के अधिकारों और विश्वास से जुड़ा मामला
  • सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा
  • सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
  • भ्रष्टाचार और लापरवाही पर नियंत्रण
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाए, जिससे शिकायतों की प्राथमिकता तय की जा सके और समय पर समाधान सुनिश्चित हो। साथ ही, हर स्तर पर जवाबदेही तय करना और शिकायतकर्ता को नियमित अपडेट देना भी जरूरी है।

नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। संसद में इस मुद्दे का उठना यह दर्शाता है कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस दिशा में सुधार के लिए गंभीर हैं। अब आवश्यकता है कि जमीनी स्तर पर इन प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि हर नागरिक को न्याय और सेवा समय पर मिल सके।