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सहारनपुर मस्जिद विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, कार्रवाई को लेकर याचिका दाखिल l
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ढहाए जाने का विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद ने याचिका दाखिल कर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना कानूनी नोटिस और ध्वस्तीकरण आदेश के कार्रवाई की गई। मामले में पूजा स्थल अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ढहाए जाने का विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मस्जिद को गिराने से पहले प्रशासन की ओर से न तो कोई कानूनी नोटिस दिया गया और न ही ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से इस कार्रवाई को लेकर पूजा स्थल अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। मामले में जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित शिया/सुन्नी वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत प्रशासन से कार्रवाई का आधार और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कह सकती है।
जमीयत ने भी जताई थी आपत्ति
मामले को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से भी कानूनी कदम उठाने की बात कही गई थी। संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा और स्थानीय लोगों तथा मामले से जुड़े लोगों से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली। प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद और सपा नेता हाजी फजलुर रहमान तथा मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता नौशाद अली से भी मुलाकात की थी। हाजी फजलुर रहमान ने पहले जिला अदालत का रुख करने की वजह बताते हुए कहा था कि वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी, इसलिए तत्काल राहत की उम्मीद को देखते हुए जिला अदालत में मामला ले जाया गया। हालांकि, वहां से अपेक्षित राहत नहीं मिली।
कार्रवाई के समय को लेकर भी उठे सवाल
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मस्जिद को रात के समय ढहाया गया और संबंधित पक्ष को अदालत तथा बातचीत के जरिए अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता और उससे जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाने की संभावना है। हालांकि, प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इस मामले में सभी की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर है। अदालत का आदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।
