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₹25-29 लाख में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट, राजस्थान में 3 गिरफ्तार

राजस्थान SOG ने फर्जी FMGE प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन और इंटर्नशिप हासिल करने के आरोप में तीन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने FMGE में बार-बार असफल होने के बाद ₹25-29 लाख तक देकर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए। एक आरोपी बिना वैध RMC पंजीकरण के अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज करता मिला। मामले की जांच में 100 से अधिक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के नाम सामने आए हैं, जबकि बड़े रैकेट में अब तक 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

Vindhya Dubey15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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₹25-29 लाख में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट, राजस्थान में 3 गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने के आरोप में तीन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, तीनों ने अनिवार्य FMGE परीक्षा में सफलता हासिल नहीं की थी, लेकिन कथित तौर पर लाखों रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए और इन्हें राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीकरण तथा मेडिकल इंटर्नशिप के लिए इस्तेमाल किया।

20 से 30 लाख रुपये तक में फर्जी सर्टिफिकेट

SOG की जांच में सामने आया है कि इस कथित रैकेट में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को करीब 20 से 30 लाख रुपये में फर्जी FMGE प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस का कहना है कि ऐसे प्रमाणपत्रों के जरिए उन उम्मीदवारों को मेडिकल सिस्टम में प्रवेश दिलाने की कोशिश की गई, जो अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर सके थे। 14 अगस्त 2026 को सामने आई ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक ने पाकिस्तान से 2021 में MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। पुलिस के अनुसार उसने FMGE परीक्षा तीन बार दी, लेकिन पास नहीं कर सका। इसके बाद कथित तौर पर 25 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किया और RMC में पंजीकरण के लिए इसका इस्तेमाल किया। दूसरे आरोपी ने चीन से 2006 से 2012 के बीच MBBS की पढ़ाई की थी। पुलिस के अनुसार उसने 2012 में FMGE परीक्षा आठ बार देने के बावजूद सफलता हासिल नहीं की। आरोप है कि बाद में उसने करीब 29 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किया और RMC में पंजीकरण के लिए इसका इस्तेमाल किया। वह जयपुर में अपनी पत्नी द्वारा संचालित अस्पताल का प्रबंधन भी करता था। तीसरे आरोपी ने पाकिस्तान से 2021 में MBBS किया था और कथित तौर पर FMGE तीन बार पास नहीं कर सका। पुलिस का आरोप है कि उसके एक रिश्तेदार ने करीब 26 लाख रुपये में उसके लिए फर्जी FMGE प्रमाणपत्र की व्यवस्था की। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उसने उदयपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी की। बाद में जांचकर्ताओं ने उसे कोटपूतली के एक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज करते पाया, जबकि उसके पास RMC का वैध पंजीकरण नहीं था।

100 से अधिक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट जांच के दायरे में

यह कार्रवाई किसी अलग-थलग मामले की नहीं, बल्कि राजस्थान में चल रही एक बड़ी जांच का हिस्सा है। SOG के मुताबिक, अब तक 100 से अधिक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के कथित तौर पर फर्जी FMGE प्रमाणपत्र हासिल करने की जानकारी सामने आई है। जुलाई 2026 तक इस मामले में 30 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी थी, जिनमें विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स और कथित रैकेट से जुड़े लोग शामिल हैं। जांच का दायरा करीब 8,000 ऐसे डॉक्टरों तक भी बढ़ाया गया है, जिन्होंने विदेश से MBBS की डिग्री हासिल की है और राजस्थान मेडिकल काउंसिल के जरिए पंजीकरण कराया। SOG यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें से किसी ने फर्जी FMGE प्रमाणपत्र का इस्तेमाल तो नहीं किया।

पूर्व RMC अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका भी जांच में

पुलिस की जांच में कथित फर्जी प्रमाणपत्र रैकेट में बिचौलियों के साथ-साथ राजस्थान मेडिकल काउंसिल से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पहले की कार्रवाई में पूर्व RMC रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा समेत अन्य कर्मचारियों और कथित सरगना तथा ब्रोकर को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी का मानना है कि कथित नेटवर्क केवल फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि इन दस्तावेजों के आधार पर RMC पंजीकरण और मेडिकल कॉलेजों में अनिवार्य इंटर्नशिप हासिल कराने की पूरी प्रक्रिया में मदद की जाती थी।

मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित तौर पर अनिवार्य योग्यता परीक्षा पास नहीं करने वाले कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल इंटर्नशिप और बाद में मरीजों के इलाज तक पहुंच बनाई। एक आरोपी के बिना वैध RMC पंजीकरण के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज करने का आरोप सामने आया है। इससे मेडिकल लाइसेंसिंग और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। FMGE विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले भारतीय नागरिकों और संबंधित विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए भारत में चिकित्सा पंजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग परीक्षा है। इसलिए फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए इस प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप मेडिकल रेगुलेशन व्यवस्था की गंभीरता को रेखांकित करता है।

फरवरी में दर्ज हुआ था मामला

SOG ने इस कथित फर्जीवाड़े को लेकर 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया था। आरोपों में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इसके बाद जांच लगातार आगे बढ़ी और अलग-अलग चरणों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स, कथित बिचौलियों तथा RMC से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियां हुईं। फिलहाल SOG उन सभी उम्मीदवारों और मध्यस्थों की भूमिका की जांच कर रही है, जिनके नाम फर्जी FMGE प्रमाणपत्रों की खरीद-फरोख्त में सामने आए हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित रैकेट ने कितने लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए और उनमें से कितने लोगों ने इनके आधार पर मेडिकल पंजीकरण, इंटर्नशिप या मरीजों के इलाज का अवसर हासिल किया।