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62 केंद्रीय मंत्रालयों और 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में जेंडर बजट सेल सक्रिय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दे रहा तकनीकी और प्रशिक्षण सहयोग

महिलाओं और बालिकाओं के विकास को सरकारी योजनाओं और बजट प्रक्रिया के केंद्र में लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting) व्यवस्था को और मजबूत किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि देशभर में 62 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जेंडर बजट सेल (Gender Budget Cells) स्थापित किए जा चुके हैं। ये सेल सरकारी योजनाओं और बजट में महिलाओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का कार्य कर रहे हैं।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:59 PM IST
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62 केंद्रीय मंत्रालयों और 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में जेंडर बजट सेल सक्रिय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दे रहा तकनीकी और प्रशिक्षण सहयोग

क्या हैं जेंडर बजट सेल?

जेंडर बजट सेल की स्थापना के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 'चार्टर ऑफ जेंडर बजट सेल्स' जारी किया था। इस चार्टर में सभी मंत्रालयों और विभागों में जेंडर बजट सेल के गठन, संरचना और कार्यप्रणाली के लिए दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य सरकारी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों में ऐसे बदलाव सुनिश्चित करना है, जिससे लैंगिक असमानताओं को कम किया जा सके, महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को बढ़ावा मिले तथा सरकारी बजट का उपयोग महिलाओं के विकास के अनुरूप किया जा सके।

मंत्रालयों में नोडल इकाई के रूप में करते हैं काम

जेंडर बजट सेल प्रत्येक मंत्रालय और विभाग में जेंडर बजटिंग गतिविधियों के लिए नोडल इकाई के रूप में कार्य करते हैं। इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों की पहचान करना, योजनाओं का लैंगिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना, विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित करना, योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करना तथा वित्तीय और भौतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन ऑडिट कराना शामिल है। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं का लाभ महिलाओं तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दे रहा तकनीकी सहयोग

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेंडर बजटिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए क्षमता निर्माण (Capacity Building) और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों को वित्तीय सहायता भी दी जाती है, ताकि सरकारी अधिकारियों को जेंडर बजटिंग के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा सके और योजनाओं के क्रियान्वयन में लैंगिक दृष्टिकोण को प्रभावी बनाया जा सके।

योजनाओं की नियमित निगरानी

मंत्रालयों और विभागों द्वारा अपनी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाती है। इसके लिए वे आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हैं। कई योजनाओं में महिलाओं से जुड़े विशेष संकेतकों को भी शामिल किया गया है। साथ ही राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के माध्यम से भी महिलाओं से संबंधित विभिन्न सूचकांकों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।

हर साल जारी होता है जेंडर बजट स्टेटमेंट

वित्त मंत्रालय का आर्थिक कार्य विभाग प्रत्येक वर्ष बजट परिपत्र जारी करता है, जिसके तहत सभी मंत्रालयों और विभागों को महिलाओं और बालिकाओं के लिए किए गए बजटीय प्रावधानों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में जेंडर बजट स्टेटमेंट (Gender Budget Statement) के रूप में प्रस्तुत करनी होती है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय बजट के व्यय प्रोफाइल में स्टेटमेंट-13 तैयार किया जाता है, जिसमें महिला कल्याण से जुड़े बजटीय आवंटन का समग्र विवरण दिया जाता है।

2026-27 में 11.55 प्रतिशत बढ़ा जेंडर बजट

सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जेंडर बजट स्टेटमेंट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए ₹5.01 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के ₹4.49 लाख करोड़ की तुलना में 11.55 प्रतिशत अधिक है। इस वर्ष 53 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों तथा 5 केंद्रशासित प्रदेशों ने अपने बजटीय आवंटन जेंडर बजट स्टेटमेंट में शामिल किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 49 मंत्रालयों एवं विभागों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों की थी। सरकार का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि अधिक मंत्रालय अब अपनी योजनाओं में महिलाओं के लिए अलग बजटीय प्रावधान सुनिश्चित कर रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण को मिलेगी नई गति

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि जेंडर बजटिंग केवल बजट आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ महिलाओं और बालिकाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। सरकार का मानना है कि जेंडर बजट सेल, क्षमता निर्माण, नियमित निगरानी और बढ़े हुए बजटीय आवंटन के माध्यम से महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी और सामाजिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी तथा समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।