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JNIMS में दवा संकट और प्रशासनिक अनिश्चितता, डॉक्टरों ने उठाई आवाज

इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) के डॉक्टरों ने संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था, जरूरी दवाओं की उपलब्धता और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जेएनआईएमएस टीचर्स एसोसिएशन (TA-JNIMS) ने कहा है कि संस्थान जैसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को सुचारु रूप से चलाने के लिए पेशेवर नेतृत्व, प्रशासनिक स्थिरता और समय पर निर्णय लेना जरूरी है।

Vindhya Dubey13 अग. 2026, 09:42 PM IST
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JNIMS में दवा संकट और प्रशासनिक अनिश्चितता, डॉक्टरों ने उठाई आवाज

नियमित निदेशक का पद खाली, प्रशासन को लेकर असमंजस

डॉक्टरों के अनुसार जेएनआईएमएस में नियमित निदेशक की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई है। एसोसिएशन ने बताया कि पूर्व निदेशक का कार्यकाल 30 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद सामान्य प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन यह व्यवस्था भी 4 अगस्त को समाप्त हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि इसके बाद संस्थान के प्रशासन को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई थी। डॉक्टरों के मुताबिक, नेतृत्व में ऐसी अनिश्चितता का असर केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं रहता। मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज, मेडिकल शिक्षा, शोध, मानव संसाधन और वित्तीय फैसले एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इसलिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी का सीधा असर संस्थान की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।

जरूरी दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कमी

TA-JNIMS ने जरूरी दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कमी को भी प्रमुख मुद्दा बताया है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होता है और वे इलाज के लिए अस्पताल की दवा आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में आवश्यक दवाओं या कंज्यूमेबल्स की उपलब्धता प्रभावित होने पर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ सकती हैं। यह स्थिति खास तौर पर गंभीर मरीजों, आपातकालीन सेवाओं और लंबे समय तक इलाज की जरूरत वाले मरीजों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में किन-किन दवाओं की कमी है और कितनी मात्रा में कमी है, इसका विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन संबंधी मुद्दे भी उठे

डॉक्टरों ने जेएनआईएमएस कर्मचारियों के नियमितीकरण में देरी और वेतन से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने संस्थान के लिए पर्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों की आवश्यकता बताई है। डॉक्टरों का तर्क है कि किसी बड़े मेडिकल कॉलेज को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए केवल चिकित्सकीय विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं है। अस्पताल प्रशासन को भर्ती, खरीद, वित्त, मानव संसाधन और दैनिक संचालन से जुड़े फैसले समय पर लेने की क्षमता भी चाहिए।

जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी का खतरा

TA-JNIMS ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का कार्यकाल 6 अगस्त को समाप्त हुआ और समय पर नई भर्ती नहीं होने पर वार्ड तथा इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों की रोजमर्रा की देखभाल, वार्ड ड्यूटी, इमरजेंसी सेवाओं और वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ उपचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी संख्या में कमी होने पर मौजूदा मेडिकल स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ सकता है।

डॉक्टरों ने रखी संस्थागत स्वायत्तता की मांग

TA-JNIMS ने संस्थान के लिए पेशेवर रूप से योग्य नेतृत्व और अधिक प्रशासनिक तथा वित्तीय स्वायत्तता की मांग की है। डॉक्टरों ने समर्पित प्रशासनिक पदों को भरने और मेडिकल शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े फैसलों में स्वास्थ्य पेशेवरों से व्यवस्थित सलाह-मशविरा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह विवाद केवल निदेशक की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। जुलाई में प्रकाशित एक विश्लेषण में भी जेएनआईएमएस में नेतृत्व चयन को लेकर पारदर्शिता, मेरिट और संस्थागत विश्वास को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया था। उसमें संस्थान के सामने फंडिंग, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और प्रशासनिक अनिश्चितता जैसी पुरानी चुनौतियों का उल्लेख किया गया था।

मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

जेएनआईएमएस मणिपुर के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। इसलिए प्रशासनिक स्थिरता और संसाधनों की उपलब्धता का सवाल सीधे मरीजों और मेडिकल छात्रों दोनों से जुड़ता है। यदि नियमित नेतृत्व, पर्याप्त डॉक्टरों, जरूरी दवाओं और वित्तीय अधिकारों से जुड़े मुद्दे लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसका असर अस्पताल की सेवाओं की निरंतरता पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, समय पर प्रशासनिक निर्णय, दवा आपूर्ति की निगरानी और डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता अस्पताल की सेवाओं को मजबूत कर सकती है।

फिलहाल डॉक्टरों द्वारा उठाए गए मुद्दे उनके संगठन के दावों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। दवाओं की कमी की मात्रा, प्रभावित विभागों और सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट जानकारी नहीं है। जेएनआईएमएस जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक नेतृत्व का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां अस्पताल सेवा, मेडिकल शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य—तीनों की जिम्मेदारी एक साथ जुड़ी हुई है। ऐसे में डॉक्टरों की मांग है कि संस्थान को स्थायी नेतृत्व, पर्याप्त संसाधन और निर्णय लेने की स्पष्ट व्यवस्था जल्द उपलब्ध कराई जाए।