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महाराष्ट्र में ड्रग्स का फैलता जहर: पुलिस की 'गुप्त सेटिंग' और नाकामी के साये में युवाओं का भविष्य

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Vinod Tiwari08 अग. 2026, 04:02 PM IST
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महाराष्ट्र में ड्रग्स का फैलता जहर: पुलिस की 'गुप्त सेटिंग' और नाकामी के साये में युवाओं का भविष्य


मुंबई:

महाराष्ट्र में नशे का कारोबार अब महामारी का रूप लेता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों की खबरों और पुलिसिया आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि राज्य के महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक, ड्रग्स और एमडी-एमडीएमए जैसे खतरनाक नशे ने युवाओं को अपनी गिरफ्त में जकड़ लिया है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर खतरे को रोकने के बजाय पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और कथित मिलीभगत इस काले कारोबार को बढ़ावा देती नजर आ रही है।


राज्यभर में पिछले कुछ दिनों में सामने आए ताजा मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है:

माटुंगा (मुंबई): एनसीबी (NCB) ने कार्रवाई करते हुए माटुंगा इलाके से 27 लाख रुपये की एमडीएमए (MDMA) पिल्स भारी मात्रा में जब्त की हैं।

वसई: वसई पुलिस ने ब्राउन शुगर लेकर ग्राहकों की तलाश में घूम रहे एक तस्कर को धर दबोचा है।

कल्याण: कल्याण इलाके में भी पिछले दिनों एमडीएमए पिल्स बेचने वाले एक बड़े सौदागर की गिरफ्तारी हो चुकी है।

ठाणे: स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ठाणे में एक स्कूल के बाहर स्कूली बच्चों द्वारा ड्रग्स लेने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इसके अलावा, अमरावती में 41 लाख का एमडी, जलगांव में मालेगांव कनेक्शन वाला ड्रग्स सिंडिकेट और नागपुर में हुई बरामदगी यह बताती है कि ड्रग्स माफिया पूरे महाराष्ट्र में अपने पैर पसार चुका है।

पुलिस की 'गुप्त सेटिंग' और छुटपुट कार्रवाई का खेल

एक तरफ जहाँ युवा पीढ़ी नशे की दलदल में धंसती जा रही है, वहीं इस अवैध कारोबार को नेस्तनाबूद करने में पुलिस पूरी तरह विफल और लापरवाह दिखाई दे रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स डीलरों और स्थानीय पुलिस थानों के बीच गहरी 'गुप्त सेटिंग' का खेल चल रहा है। शहर में कौन-कौन लोग और कौन से सिंडिकेट ड्रग्स के इस अवैध धंधे में सक्रिय रूप से लिप्त हैं, इसकी पूरी जानकारी पुलिस के स्थानिक  वरिष्ठ अधिकारियों तक को होती है। इसके बावजूद, ड्रग्स डीलरों से मिलने वाली अवैध और मोटी कमाई (हफ्ता वसूली) के लालच में जिम्मेदार अधिकारी इस बड़े कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने से बचते हैं।

जनता की आँखों में धूल झोंकने के लिए या अपना  सेटिंग वाले ड्रग डीलरों को रोक कर अपने आशीर्वाद से चलने वाले नेटवर्क की हित में  कभी-कभार छुटपुट कार्रवाई  कर खानापूर्ति कर देती है, जबकि मुख्य सरगना बेखौफ अपना कारोबार चला रहे हैं। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता और लालच के कारण आज महाराष्ट्र के युवाओं का भविष्य अंधेरे में धंसता जा रहा है, जिसे रोकने के लिए अब कड़े प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तक्षेप की सख्त जरूरत है।