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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: अब दोपहर 3 से 5 बजे तक जनता से सीधे मिलेंगे राजस्व अधिकारी, बैठकों पर लगी रोक
मुंबई: महाराष्ट्र के आम नागरिकों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान करने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। महसूल विभाग (राजस्व विभाग) द्वारा जारी नए सरकारी परिपत्र (GR) के अनुसार, अब राज्य के सभी राजस्व अधिकारियों को रोजाना दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आम जनता से मिलने और उनकी शिकायतें सुनने के लिए दफ्तर में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। इस समय के दौरान किसी भी प्रकार की आंतरिक बैठक या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

राज्य सरकार के महसूल विभाग ने यह निर्णय आम जनता को हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लिया है। अक्सर यह देखा गया है कि जब नागरिक अपनी शिकायतें या प्रशासनिक काम लेकर तहसील या जिला स्तर के दफ्तरों में जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी अपनी सीटों से नदारद रहते हैं। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के कारण लोगों को छोटे-छोटे कामों और शिकायतों के लिए मुंबई स्थित मंत्रालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी स्थिति को खत्म करने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी व जनहितैषी बनाने के लिए यह नया आदेश जारी किया गया है।
कलेक्टर से लेकर नायब तहसीलदार तक लागू: यह आदेश जिला स्तर से लेकर तहसील स्तर तक के सभी अधिकारियों—जिलाधिकारी (Collector), उपजिलाधिकारी (Deputy Collector), उपविभागीय अधिकारी (SDO), तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर अनिवार्य रूप से लागू होगा।
दैनिक 2 घंटे का समय आरक्षित: सभी राजस्व अधिकारियों को हर कार्यदिवस में दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक का समय केवल आम जनता की मुलाकात और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए आरक्षित रखना होगा।
सेंट्रल रजिस्टर मेंटेन करना जरूरी: दफ्तर में अपनी शिकायत लेकर आने वाले आगंतुकों (विजिटर्स) के लिए एक सेंट्रल रजिस्टर (मध्यवर्ती नोंदवही) रखना अनिवार्य किया गया है।
इस दौरान बैठकों पर पाबंदी: दोपहर 3 से 5 के इस आरक्षित समय में कोई भी आंतरिक बैठक, समीक्षा बैठक या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) नहीं रखी जाएगी, ताकि अधिकारी पूरा समय नागरिकों को दे सकें।
सूचना पटल पर लगेगी जानकारी: अधिकारियों के कक्ष के बाहर और कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर इस निर्धारित समय की जानकारी देने वाला सूचना फलक प्रमुखता से लगाना होगा।
अनुपस्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था: यदि किसी अपरिहार्य सरकारी काम, दौरे या मंत्री महोदय/वरिष्ठ अधिकारियों की आपातकालीन बैठक के कारण अधिकारी उपस्थित नहीं रह पाते हैं, तो इसकी पूर्व सूचना बोर्ड पर लगानी होगी और नागरिकों के आवेदन स्वीकार करने के लिए सक्षम वैकल्पिक अधिकारी नियुक्त करना होगा। सरकार के इस कदम से दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी नागरिकों को सीधे अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का मौका मिलेगा और उन्हें मंत्रालय तक की दौड़ लगाने से राहत मिलेगी।
