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निजी वन भूमि विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने रद्द की ‘शपथपत्र जांच समिति’, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया बड़ा फैसला

मुंबई: महाराष्ट्र के राजस्व एवं वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में निजी वन भूमि से जुड़े मामलों में हलफनामे (शपथपत्र) दाखिल करने के लिए गठित विशेष समिति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 184 याचिकाओं पर दिए गए हालिया अंतिम फैसले और 13 अगस्त 2026 को गठित नई जांच समिति (स्क्रूटनी कमेटी) के मद्देनजर सरकार ने यह प्रशासनिक निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रालय से आधिकारिक सरकारी आदेश (GR) जारी कर दिया गया है।

Vinod Tiwari26 अग. 2026, 02:51 PM IST
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निजी वन भूमि विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने रद्द की ‘शपथपत्र जांच समिति’, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया बड़ा फैसला

क्या था समिति का उद्देश्य?

महाराष्ट्र निजी वन (अधिग्रहण) अधिनियम, 1975 के तहत भूमि अधिग्रहण और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन भूमि की प्रविष्टियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लगातार याचिकाएं दाखिल हो रही थीं। अदालतों में वन विभाग का पक्ष मजबूती और कानूनी सुसंगतता के साथ रखने तथा दायर किए जाने वाले शपथपत्रों की गहन जांच के लिए 4 नवंबर 2025 को तत्कालीन प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (संरक्षण) एम. एस. रेड्डी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। इस समिति में तत्कालीन उप वनसंरक्षक (पुणे) महादेव मोहिते को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया था।

समिति को क्यों किया गया निरस्त?

जारी सरकारी निर्णय के अनुसार, इस समिति को रद्द करने के पीछे दो मुख्य प्रशासनिक और कानूनी कारण रहे हैं:

 * हाईकोर्ट का आदेश और नई छानबीन समिति:

   सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और राजस्व अभिलेखों में निजी वन की प्रविष्टियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 184 से अधिक याचिकाएं (रिट याचिका क्र. 1536/2017 व अन्य) लंबित थीं। हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को इन पर अंतिम आदेश पारित किया। इस आदेश के अनुपालन में, न्यायालय जाने से पहले ही राजस्व अभिलेखों की प्रविष्टियों की प्राथमिक जांच के लिए सरकार ने 13 अगस्त 2026 को एक अलग 'छाननी/तपासणी समिति' का गठन कर दिया है।

 * अधिकारियों का तबादला और दोहरी व्यवस्था:

   नवंबर 2025 में गठित समिति में अधिकारियों की नियुक्ति व्यक्तिगत नाम से (By Name) की गई थी और अब संबंधित अधिकारियों का अन्यत्र तबादला हो चुका है। इसके अलावा, विभिन्न वन क्षेत्रों से आने वाले शपथपत्रों की अंतिम जांच अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (संरक्षण) के स्तर पर सीधे शासन को प्राप्त होने की व्यवस्था बनी हुई है। अतः पुरानी शपथपत्र जांच समिति का कोई औचित्य नहीं रह गया था।

अदालतों में आगे कैसे रखी जाएगी सरकार की भूमिका?

शासन ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह विशेष समिति रद्द कर दी गई हो, लेकिन उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय में वन विभाग से संबंधित मामलों में विभाग की नीतियों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप तय समय सीमा में शपथपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया प्रचलित नियमों के अनुसार सुचारू रूप से जारी रहेगी।

यह आदेश महाराष्ट्र के राज्यपाल के नाम और निर्देशानुसार मंत्रालय के मुख्य वनसंरक्षक डॉ. जितेंद्र रामगावकर द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया है।