government
अजंता गुफाओं में पर्यटकों की बढ़ी परेशानी, चार-चार टिकटों से बढ़ी नाराजगी; 'सिंगल टिकट' व्यवस्था लागू करने की मांग तेज
यूनेस्को विश्व धरोहर अजंता गुफाओं में घूमने आने वाले पर्यटकों को एक ही यात्रा के दौरान पार्किंग, शटल बस, गुफाओं के प्रवेश और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। इससे पर्यटकों को कई बार कतारों में लगना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। पर्यटन विशेषज्ञों, टूरिस्ट गाइड्स और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने सभी शुल्कों को एक ही 'सिंगल टिकट' में शामिल करने की मांग की है। हालांकि, अभी तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) या महाराष्ट्र सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
Priyanka Gaikwad04 अग. 2026, 06:39 PM IST

छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध अजंता गुफाएं भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध धरोहर स्थलों में गिनी जाती हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इन गुफाओं को देखने हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध इस स्थल पर पहुंचने के बाद पर्यटकों को सबसे बड़ी परेशानी टिकट व्यवस्था को लेकर झेलनी पड़ रही है। अजंता गुफाओं की यात्रा के दौरान पर्यटकों को सबसे पहले वाहन पार्किंग का शुल्क देना पड़ता है। इसके बाद गुफाओं तक पहुंचने के लिए संचालित शटल बस का अलग टिकट खरीदना पड़ता है। गुफा परिसर में प्रवेश करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का अलग प्रवेश टिकट लेना अनिवार्य होता है। कुछ अन्य सुविधाओं के लिए भी अलग भुगतान करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यटकों को कई बार टिकट खिड़कियों पर कतार में लगना पड़ता है।
विशेष रूप से शनिवार, रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें लग जाती हैं। कई पर्यटकों का कहना है कि गुफाओं तक पहुंचने से पहले ही उनका काफी समय टिकट लेने में निकल जाता है। इससे उनका पूरा भ्रमण कार्यक्रम प्रभावित होता है और कई बार उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्किंग, शटल बस और प्रवेश शुल्क को एकीकृत कर एक ही 'सिंगल टिकट' जारी किया जाए तो पर्यटकों को केवल एक बार भुगतान करना होगा। इससे टिकट काउंटरों पर भीड़ कम होगी, समय की बचत होगी और पर्यटन अनुभव अधिक सुविधाजनक बनेगा। इसके साथ ही प्रशासन के लिए भी टिकट प्रबंधन और राजस्व संग्रह अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
टूरिस्ट गाइड फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष जाधव ने कहा कि अलग-अलग टिकट लेने की व्यवस्था पर्यटकों के लिए अनावश्यक परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि एकीकृत टिकट प्रणाली लागू होने से पर्यटकों को राहत मिलेगी और अजंता जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल की छवि भी बेहतर होगी। एमटीडीसी से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि पर्यटक सुविधाओं में सुधार के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) और अन्य संबंधित विभाग मिलकर निर्णय लें तो भविष्य में 'सिंगल टिकट' व्यवस्था लागू करना संभव हो सकता है। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है। अजंता गुफाएं दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर लगभग छठी शताब्दी ईस्वी के बीच निर्मित 30 बौद्ध शैलकृत गुफाओं का समूह हैं। इन गुफाओं की भित्तिचित्र कला, मूर्तिकला और वास्तुकला विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्ष 1983 में यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर का दर्जा दिया था। आज भी यह भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हैं।
