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अटल जी को PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। PM मोदी ने वाजपेयी को असाधारण राजनेता बताते हुए उनके दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण की सोच को याद किया। इस अवसर पर उनके राजनीतिक जीवन, पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और लोकतांत्रिक मूल्यों में योगदान को भी याद किया गया।

Neha Sharma19 अग. 2026, 10:01 AM IST
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अटल जी को PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार, 16 अगस्त 2026 को पूरा देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। नई दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री को पुष्पांजलि अर्पित की।


सदैव अटल’ पर देश के शीर्ष नेताओं ने किया नमन

अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर सुबह ‘सदैव अटल’ स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वाजपेयी को नमन किया। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नेता भी इस अवसर पर मौजूद रहे।


PM मोदी ने अटल जी को बताया असाधारण राजनेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने वाजपेयी को असाधारण राजनेता बताते हुए कहा कि उनमें अद्भुत दूरदृष्टि थी और उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के शब्दों और उनके प्रयासों ने पीढ़ियों को प्रेरित किया और उनके नेतृत्व ने देश को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी ने यह भी कहा कि सुशासन और जनकल्याण पर अटल बिहारी वाजपेयी का जोर आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।


तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने लंबे समय तक देश की राजनीति और संसद पर गहरी छाप छोड़ी। वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 में उनका पहला कार्यकाल महज 13 दिनों का रहा। इसके बाद 1998 से 1999 तक उन्होंने करीब 11 महीने प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1999 में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2004 तक पूर्ण कार्यकाल पूरा किया।


भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रमुख संस्थापक नेताओं में से एक थे और वह भाजपा के पहले ऐसे नेता बने जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनकी पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, सांसद, पत्रकार और कवि के रूप में भी रही। उनका संसदीय जीवन पांच दशक से अधिक समय तक चला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें भारतीय राजनीति का दिग्गज बताते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों, संवेदनशीलता और असाधारण वक्तृत्व कला का अनोखा संगम था। बिरला के मुताबिक वाजपेयी 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे।


परमाणु शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका

प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण फैसले लिए। वर्ष 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षण भारत की रणनीतिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। गृह मंत्री अमित शाह ने पुण्यतिथि पर वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके नेतृत्व को याद किया। शाह ने कहा कि वाजपेयी ने परमाणु परीक्षणों और कारगिल युद्ध के दौरान देश की शक्ति और संकल्प को दुनिया के सामने मजबूती से रखा। साथ ही उनकी राजनीति में सुशासन और अंत्योदय की भावना को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला।


विकास और कनेक्टिविटी के लिए याद किए जाते हैं

वाजपेयी सरकार के दौर में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल हुईं। स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी बड़ी सड़क परियोजनाओं ने देश के प्रमुख महानगरों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सरकार के दौरान दूरसंचार, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में भी कई नीतिगत बदलाव हुए। यही वजह है कि वाजपेयी को आधुनिक भारत की बुनियादी संरचना को मजबूत करने वाले प्रधानमंत्रियों में गिना जाता है।


विदेश नीति में भी छोड़ी अलग पहचान

अटल बिहारी वाजपेयी की विदेश नीति को भी भारतीय राजनीति में विशेष महत्व दिया जाता है। उनके नेतृत्व में भारत ने एक ओर परमाणु शक्ति के रूप में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देशों के साथ संवाद और शांति प्रयासों पर भी जोर दिया। वाजपेयी की राजनीति में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ-साथ लोकतांत्रिक संवाद और राजनीतिक विरोधियों के प्रति सम्मान की भावना को भी विशेष स्थान मिला। यही कारण है कि उनके निधन के बाद अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।


भारत रत्न से सम्मानित हुए थे वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्हें भारतीय राजनीति में उनके लंबे योगदान, राष्ट्रसेवा और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए यह सम्मान दिया गया। वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में हुआ था। वह 93 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी और उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी।


क्यों खास है अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत?

अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत केवल उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल तक सीमित नहीं है। भारतीय लोकतंत्र में उनकी पहचान ऐसे नेता की रही जिसने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान अपनी वाकपटुता, संयम और राजनीतिक संवाद की शैली से अलग पहचान बनाई। उनकी कविताएं और भाषण आज भी सार्वजनिक जीवन में चर्चा का विषय बने रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी पुण्यतिथि पर कहा कि वाजपेयी के विचार, शब्द और प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं तथा सुशासन और जनकल्याण को लेकर उनकी सोच आज भी प्रासंगिक है। आज जब देश अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि मना रहा है, ‘सदैव अटल’ पर जुटे शीर्ष नेताओं की श्रद्धांजलि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की याद दिलाती है। राजनीति में उनकी भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और देशहित को केंद्र में रखने वाली उनकी सोच ने भारतीय राजनीति पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है।