महिला-सुरक्षा

ग्रामीण महिला उद्यम विकास के लिए ₹4.50 करोड़ मंजूर l

महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को नई गति देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) के सहयोग से संचालित ‘नव तेजस्विनी–महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास कार्यक्रम’ के प्रशासनिक खर्चों के लिए ₹4.50 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। यह राशि राज्य सरकार के हिस्से के रूप में महिला आर्थिक विकास महामंडल (MAVIM) को उपलब्ध कराई जाएगी। इस धनराशि का उपयोग कार्यक्रम के संचालन, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने से जुड़ी गतिविधियों पर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे तथा महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:23 PM IST
खबर शेयर करें:
ग्रामीण महिला उद्यम विकास के लिए ₹4.50 करोड़ मंजूर  l
 महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया है। इस निर्णय के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) के सहयोग से संचालित ‘नव तेजस्विनी–महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास कार्यक्रम’ के प्रशासनिक खर्चों के लिए ₹4.50 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। यह राशि राज्य सरकार के अंश के रूप में महिला आर्थिक विकास महामंडल (MAVIM) को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कार्यक्रम के तहत निर्धारित सभी गतिविधियों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन किया जा सके। 

यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, छोटे एवं लघु उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने, स्वयं सहायता समूहों को सुदृढ़ बनाने, कौशल विकास प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता, विपणन सहायता तथा आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल महिलाओं को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने, आत्मविश्वास बढ़ाने और परिवार की आय में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए सक्षम बनाना भी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। 

शासन के आदेश के अनुसार, स्वीकृत धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और वित्तीय नियमों के अनुरूप किया जाएगा। (मुंबई नगर) के जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि महिला आर्थिक विकास महामंडल को कार्यक्रम के संचालन और राशि के उपयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राशि का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए किया जाए, प्रत्येक खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए तथा उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर सरकार और महालेखाकार कार्यालय को भेजा जाए। 

सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि धनराशि के उपयोग में Virtual Personal Deposit Account (VPDA) प्रणाली का पालन अनिवार्य होगा, जिससे प्रत्येक भुगतान और व्यय की निगरानी पारदर्शी तरीके से की जा सके। साथ ही, वित्त विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों, नियमों और शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न हो और धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों पर ही किया जाए। 

शासन निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत राशि का पूरा व्यय चालू वित्तीय वर्ष के भीतर किया जाएगा तथा यदि कोई राशि शेष रहती है तो उसका समायोजन निर्धारित नियमों के अनुसार 31 मार्च 2027 तक करना होगा। यह निर्णय वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने, स्वरोजगार अपनाने और अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने में मदद मिलेगी। इससे महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।