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जनता की जान से खिलवाड़: ठाणे के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नासूर बने फर्जी डॉक्टर, प्रशासन सख्त

ठाणे जिले में बिना वैध डिग्री के मरीजों का इलाज करने वाले फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रणजित यादव की अगुवाई में हुई बैठक में शहापूर और मुरबाड जैसे ग्रामीण इलाकों से मिल रही शिकायतों पर विशेष चिंता जताई गई। प्रशासन ने पुलिस विभाग के सहयोग से ऐसे अवैध चिकित्सकों के खिलाफ ताबड़तोड़ कानूनी कार्रवाई करने और तालुका स्तर पर सभी निजी डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यताओं का नियमित सत्यापन करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

Khushi15 अग. 2026, 01:09 PM IST
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जनता की जान से खिलवाड़: ठाणे के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नासूर बने फर्जी डॉक्टर, प्रशासन सख्त
ठाणे: ठाणे जिले के शहापूर और मुरबाड जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में मरीजों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ पर जिला प्रशासन ने अब सीधी और कड़ी नजर टेढ़ी कर दी है। बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के झोलाछाप क्लीनिक चलाकर लोगों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाने वाले जालसाजों के खिलाफ अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर एक बड़ा अभियान छेड़ने जा रहे हैं।

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब जिलास्तरीय बोगस डॉक्टर शोध व पुनर्विलोकन समिति की उच्चस्तरीय बैठक जिला कलेक्टर डॉ.
श्रीकृष्ण पांचाळ की अध्यक्षता में आयोजित की गई। प्रशासनिक समीक्षा के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि महानगरों की चमक-दमक से दूर, ठाणे जिले के भीतरूनी और ग्रामीण कोनों में कई ऐसे तथाकथित डॉक्टर सक्रिय हैं जो मामूली सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर मासूम और भोले-भाले ग्रामीणों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।वर्ष 2025 से 2026 के बीच इन अवैध चिकित्सकों के खिलाफ प्राप्त हुई तमाम शिकायतों का जब लेखा-जोखा निकाला गया,

तो विशेष रूप से शहापूर और मुरबाड क्षेत्र हॉटस्पॉट के रूप में उभरे।
इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर ये फर्जी क्लीनिक संचालक मरीजों के जीवन के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रणजित यादव ने पुलिस प्रशासन के साथ पुख्ता समन्वय बैठाकर ऐसे तत्वों पर ताबड़तोड़ आपराधिक कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने अब केवल शिकायतों के आने का इंतजार करने की बजाय proactive approach अपनाई है।

इसके तहत अब हर तालुका स्वास्थ्य अधिकारी और नगरपरिषद अधिकारियों की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के हर निजी क्लिनिक और डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यताओं का नियमित सत्यापन करें। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है या कोई फर्जी डॉक्टर अपनी दुकान चलाता पाया जाता है, तो संबंधित स्थानीय अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की इस संयुक्त घेराबंदी से ठाणे जिले के मेडिकल माफियाओं में हड़कंप मच गया है।