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जमीन अधिग्रहण में मुआवजे का दावा, HC ने बताई समयसीमा

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28A के तहत मुआवजे के पुनर्निर्धारण से जुड़े मामले में कानूनी समयसीमा के महत्व को स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि बढ़े हुए मुआवजे का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन जरूरी है।

Neha Sharma29 अग. 2026, 04:02 PM IST
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जमीन अधिग्रहण में मुआवजे का दावा, HC ने बताई समयसीमा

नई दिल्ली: भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे की दोबारा गणना का दावा करने वाले जमीन मालिकों के लिए समयसीमा बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत मुआवजे के पुनर्निर्धारण से जुड़े मामले में कानून में तय समयसीमा का पालन करने पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 28A के तहत आवेदन के लिए निर्धारित अवधि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


क्या है धारा 28A?

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A उन जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान है जिनकी जमीन एक ही अधिग्रहण अधिसूचना के तहत ली गई हो, लेकिन उन्हें किसी अन्य जमीन मालिक की तुलना में कम मुआवजा मिला हो। यदि सक्षम न्यायालय किसी दूसरे जमीन मालिक के मामले में अधिक मुआवजा तय करता है, तो संबंधित परिस्थितियों में अन्य प्रभावित जमीन मालिक भी अपने मुआवजे को दोबारा निर्धारित कराने के लिए धारा 28A का सहारा ले सकते हैं। हालांकि, इस अधिकार के इस्तेमाल के लिए कानून में समयसीमा निर्धारित है।


समयसीमा क्यों बनी अहम?

दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आया विवाद इसी बात से जुड़ा था कि धारा 28A के तहत मुआवजे के पुनर्निर्धारण के लिए आवेदन कब तक किया जा सकता है। अदालत ने कानून में निर्धारित समयसीमा को महत्वपूर्ण माना और यह स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर समयसीमा को अनिश्चित अवधि तक नहीं बढ़ाया जा सकता कि संबंधित जमीन मालिक को बढ़े हुए मुआवजे के बारे में सरकारी स्तर से अलग से सूचना नहीं मिली थी।


सरकार को हर जमीन मालिक को अलग से सूचना देना जरूरी नहीं

फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि अदालत ने माना कि सरकार पर हर प्रभावित जमीन मालिक को अलग-अलग जाकर किसी अन्य मामले में दिए गए बढ़े हुए मुआवजे की जानकारी देने का सामान्य दायित्व नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई जमीन मालिक धारा 28A के तहत अपने मुआवजे के पुनर्निर्धारण का लाभ लेना चाहता है, तो उसे कानून में निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का ध्यान रखना होगा।


जमीन मालिकों के लिए क्या है इसका मतलब?

भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे को लेकर अक्सर लंबे समय तक विवाद चलते हैं। एक ही परियोजना के लिए अलग-अलग जमीन मालिकों को मिलने वाले मुआवजे में अंतर होने पर प्रभावित लोग अदालत या संबंधित प्राधिकरण के सामने अपनी मांग रखते हैं। धारा 28A ऐसे जमीन मालिकों को एक कानूनी रास्ता देती है, लेकिन इसका इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। इसलिए किसी दूसरे मामले में मुआवजा बढ़ने के बाद समान लाभ का दावा करने वाले जमीन मालिकों के लिए संबंधित न्यायिक आदेश की तारीख, आवेदन की समयसीमा और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।


भूमि अधिग्रहण में मुआवजा क्यों महत्वपूर्ण है?

भूमि अधिग्रहण के दौरान जमीन मालिक से उसकी संपत्ति विकास, सड़क, रेलवे, सिंचाई, औद्योगिक परियोजना या अन्य सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ली जाती है। ऐसे में उचित मुआवजा जमीन मालिक के अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण अदालतें भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे से जुड़े कानूनी अधिकारों और प्रक्रियात्मक नियमों दोनों पर ध्यान देती हैं। हाल के अन्य फैसलों में भी अदालतों ने मुआवजे के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जून 2026 में कहा था कि अधिग्रहण पूरा होने और मुआवजा निर्धारित होने के बाद सरकार उसे केवल प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक देरी के आधार पर अनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकती।


किसानों और जमीन मालिकों के लिए संदेश

दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला खास तौर पर उन जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी जमीन पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहित हुई है और जो किसी अन्य जमीन मालिक को मिले बढ़े हुए मुआवजे के आधार पर अपने मुआवजे के पुनर्निर्धारण की मांग करना चाहते हैं। ऐसे मामलों में सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि किसी दूसरे जमीन मालिक को अधिक मुआवजा मिला है। संबंधित व्यक्ति को यह भी देखना होगा कि उसके मामले में धारा 28A लागू होती है या नहीं और आवेदन कानून में निर्धारित समयसीमा के भीतर किया गया है या नहीं।


दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से यह संदेश निकलता है कि भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजे का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और समयसीमा का पालन भी उतना ही जरूरी है। जमीन मालिकों को अपने अधिग्रहण रिकॉर्ड, मुआवजा आदेश और संबंधित अदालत के फैसलों की जानकारी समय पर हासिल करनी चाहिए, ताकि उपलब्ध कानूनी उपाय का इस्तेमाल समयसीमा के भीतर किया जा सके।