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जम्मू-कश्मीर पर गोपाल पिल्लई फोरम की बड़ी सिफारिशें l

पूर्व केंद्रीय गृह सचिव गोपाल कृष्ण पिल्लई की सह-अध्यक्षता वाले फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स इन जम्मू एंड कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। फोरम ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने, मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, राज्य का दर्जा बहाल करने, विधानसभा चुनावों को प्रभावी बनाने, नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा और लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया है। फोरम का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास बहाली के लिए राजनीतिक संवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:30 PM IST
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जम्मू-कश्मीर पर गोपाल पिल्लई फोरम की बड़ी सिफारिशें l

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य के पुनर्गठन के बाद क्षेत्र की राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक परिस्थितियों पर नजर रखने के उद्देश्य से गठित फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स इन जम्मू एंड कश्मीर ने अपनी नई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव गोपाल कृष्ण पिल्लई और जम्मू-कश्मीर के लिए गठित वार्ताकार समूह (Group of Interlocutors) की पूर्व सदस्य राधा कुमार की सह-अध्यक्षता वाले इस फोरम ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और नागरिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई है। 


फोरम का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने के लिए राज्य का दर्जा जल्द से जल्द वापस किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचित सरकार को पर्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार मिलने से जनता और शासन के बीच विश्वास बढ़ेगा तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी। फोरम ने यह भी कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावी भूमिका मिलने से लोकतांत्रिक संस्थाएं अधिक मजबूत होंगी। रिपोर्ट में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। फोरम ने सुझाव दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और मीडिया की स्वतंत्रता जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए। साथ ही सुरक्षा संबंधी कानूनों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि नागरिकों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हो सके।


लद्दाख के संदर्भ में फोरम ने वहां के लोगों की सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकार और रोजगार के अवसरों की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक और कानूनी उपायों की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। फोरम का मानना है कि विकास योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सहभागिता बढ़ने से क्षेत्र में संतुलित विकास संभव होगा।


फोरम ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद शुरू करने की भी अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल प्रशासनिक उपायों से स्थायी समाधान संभव नहीं है, बल्कि राजनीतिक संवाद, विश्वास बहाली और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से ही क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित की जा सकती है।

फोरम का यह भी मानना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास, सुरक्षा और लोकतंत्र के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए सरकार को पारदर्शी प्रशासन, प्रभावी स्थानीय शासन, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और सभी पक्षों के साथ निरंतर संवाद की नीति अपनानी चाहिए। फोरम के अनुसार, यही कदम क्षेत्र में स्थायी शांति, सामाजिक सौहार्द और समावेशी विकास का आधार बन सकते हैं।