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डॉक्टर की गैरमौजूदगी का खामियाजा? गढ़चिरौली में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला की मौत, शव परीक्षण के लिए 14 घंटे इंतजार
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ तालुका से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद जन्नी पुसू नैताम को भामरागढ़ ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें अहेरी स्थित महिला एवं बाल अस्पताल रेफर किया गया। अहेरी ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव परीक्षण के लिए भी करीब 14 घंटे इंतजार करना पड़ा। घटना के बाद ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Priyanka Gaikwad13 अग. 2026, 09:40 PM IST

गढ़चिरौली : गढ़चिरौली जिले के दुर्गम भामरागढ़ तालुका में स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। भामरागढ़ तालुका की रहने वाली जन्नी पुसू नैताम को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद इलाज के लिए भामरागढ़ ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि अस्पताल में उस समय चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं थे। महिला की स्थिति और प्रसव की गंभीरता को देखते हुए उन्हें आगे के इलाज के लिए अहेरी स्थित महिला एवं बाल अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद उन्हें अहेरी के लिए रवाना किया गया। हालांकि, अहेरी पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला की तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
भामरागढ़ तालुका मुख्यालय है और यहां ग्रामीण अस्पताल भी मौजूद है। ऐसे में गंभीर स्थिति में चिकित्सा अधिकारी की उपलब्धता नहीं होने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव के दौरान तत्काल चिकित्सा सहायता और आपात स्थिति में विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में इस घटना ने दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला की मौत के बाद भी परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, शव परीक्षण के लिए करीब 14 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब इस पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि महिला की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था, अस्पताल में उस समय चिकित्सा अधिकारी क्यों मौजूद नहीं थे, महिला को समय पर प्राथमिक उपचार मिला या नहीं और अहेरी रेफर करने का निर्णय कितनी जल्दी लिया गया। इस घटना ने गढ़चिरौली के दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता का मुद्दा फिर से सामने ला दिया है।
ग्रामीण अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है। घटना की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में 24 घंटे पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई जा रही है।
ग्रामीण अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है। घटना की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में 24 घंटे पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई जा रही है।
