law-order

‘नकली पनीर’ पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्ती: ठाणे के रेस्टोरेंट को राहत नहीं, कहा- ‘जैसा ग्राहकों को खिलाया, कुछ समय आप भी भुगतिए’

21 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘Analogue Paneer’ परोसने के आरोपों से घिरे ठाणे के एक रेस्टोरेंट को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ग्राहकों को बिना बताए मेन्यू में दिखाए गए पनीर की जगह दूसरा उत्पाद परोसा गया, तो रेस्टोरेंट को भी कुछ समय कार्रवाई का सामना करना चाहिए। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि पनीर की जगह Analogue Paneer दिया जा रहा था, तो ग्राहकों को इसकी साफ जानकारी क्यों नहीं दी गई।

Sonali22 अग. 2026, 01:17 PM IST
खबर शेयर करें:
‘नकली पनीर’ पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्ती: ठाणे के रेस्टोरेंट को राहत नहीं, कहा- ‘जैसा ग्राहकों को खिलाया, कुछ समय आप भी भुगतिए’

मुंबई:

 ग्राहकों को असली पनीर के नाम पर ‘Analogue Paneer’ परोसने के आरोपों से घिरे ठाणे के Udupi Swaad Restaurant को बॉम्बे हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। 21 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान Acting Chief Justice Ravindra V. Ghuge और Justice Gautam A. Ankhad की बेंच ने रेस्टोरेंट के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर ग्राहकों को ऐसी चीज खिलाई गई जिसे वे असली पनीर समझ रहे थे, तो रेस्टोरेंट को भी कुछ समय तक कार्रवाई का सामना करना होगा। कोर्ट ने इसे ‘Poetic Justice’ बताया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला ठाणे के Wagle Estate स्थित Udupi Swaad Restaurant से जुड़ा है। महाराष्ट्र Food & Drug Administration (FDA) ने रेस्टोरेंट का Food Safety licence निलंबित कर दिया था। इसके खिलाफ रेस्टोरेंट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FDA की कार्रवाई पर अंतरिम राहत की मांग की। FDA की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रेस्टोरेंट से लिए गए पनीर के सैंपल की जांच में वह असली डेयरी पनीर नहीं, बल्कि ‘Analogue Paneer’ पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह ऐसा गैर-डेयरी विकल्प है जिसे पनीर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। FDA ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में Analogue Paneer के इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई गई है।

कोर्ट ने रेस्टोरेंट से पूछा- ‘सिर्फ थोड़े पैसे के फर्क के लिए ऐसा क्यों?’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रेस्टोरेंट की दलीलों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि केवल थोड़ी कीमत बचाने के लिए ग्राहकों को ऐसा उत्पाद क्यों दिया गया। बेंच ने यह भी सवाल किया कि अगर रेस्टोरेंट वास्तव में Analogue Paneer परोस रहा था, तो क्या उसने अपने मेन्यू या साइन बोर्ड पर ग्राहकों को साफ-साफ बताया था कि उन्हें असली डेयरी पनीर नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट का जोर इस बात पर था कि ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि वह वास्तव में क्या खा रहा है। अगर किसी मेन्यू में पनीर लिखा है और ग्राहक उसी भरोसे से ऑर्डर करता है, तो उसे किसी दूसरे उत्पाद के बारे में स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है।

‘आपने ग्राहकों को भुगतने पर मजबूर किया, अब कुछ समय आप भी भुगतिए’

सुनवाई के दौरान Acting Chief Justice Ravindra Ghuge ने रेस्टोरेंट को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि रेस्टोरेंट को पहले कुछ समय तक कार्रवाई का सामना करना होगा क्योंकि उसने ग्राहकों को कथित तौर पर Analogue Paneer खिलाकर परेशानी में डाला। बेंच ने इस स्थिति को ‘Poetic Justice’ बताया और संकेत दिया कि ग्राहकों को बिना जानकारी दिए ऐसा उत्पाद परोसना गंभीर बात है।

‘ग्राहकों को बताइए कि आप क्या परोस रहे हैं’

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई होटल या रेस्टोरेंट ऐसा उत्पाद परोसता है, तो उसे ग्राहकों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि मेन्यू में दिखाए गए असली उत्पाद की जगह क्या दिया जा रहा है। बेंच ने सवाल उठाया कि ग्राहक कैसे जानेंगे कि उन्हें असली पनीर मिल रहा है या कोई दूसरा विकल्प, जब रेस्टोरेंट इसकी जानकारी ही नहीं देता। कोर्ट ने संकेत दिया कि पारदर्शिता और ग्राहक के जानने के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रेस्टोरेंट ने क्या दलील दी?

रेस्टोरेंट की ओर से अदालत में कहा गया कि FDA ने लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले उसे Improvement Notice नहीं दिया। इसके लिए Food Safety and Standards Act की Section 32 का हवाला दिया गया। रेस्टोरेंट ने यह भी बताया कि लाइसेंस सस्पेंड होने के कारण कारोबार, आय और प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा है और इसी आधार पर अंतरिम राहत मांगी गई। रेस्टोरेंट की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि आगे से Analogue Paneer का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। लेकिन इस आश्वासन से भी बेंच तत्काल राहत देने के लिए तैयार नहीं हुई।

FDA ने कोर्ट में क्या कहा?

FDA की ओर से Additional Government Pleader ने बताया कि रेस्टोरेंट के पनीर सैंपल की जांच में वह डेयरी पनीर के बजाय Analogue Paneer पाया गया। FDA ने यह भी कहा कि लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ रेस्टोरेंट के पास संबंधित FDA Commissioner के समक्ष अपील का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है।

कोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया

यह ध्यान रखना जरूरी है कि 21 अगस्त की सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले का अंतिम निपटारा नहीं किया है। अदालत ने FDA को नोटिस जारी किया और विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक FDA को 2 सितंबर तक जवाब दाखिल करना है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2026 को रखा गया है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने अंतिम रूप से रेस्टोरेंट को दोषी ठहरा दिया है। फिलहाल कोर्ट ने केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है।

किस बेंच ने सुनाया आदेश?

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की Acting Chief Justice Ravindra V. Ghuge और Justice Gautam A. Ankhad की डिवीजन बेंच ने की। मामला Udupi Swaad Restaurant v. State of Maharashtra & Ors. के नाम से दर्ज है और Writ Petition (Lodging) No. 29022 of 2026 है।

Analogue Paneer क्या है?

Analogue Paneer को सामान्य तौर पर ऐसे गैर-डेयरी विकल्प के रूप में समझा जाता है जिसे पनीर के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें डेयरी दूध से बने पनीर के बजाय वनस्पति तेल और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि किसी उत्पाद की कानूनी स्थिति और उसके इस्तेमाल की अनुमति संबंधित खाद्य सुरक्षा नियमों और सरकारी अधिसूचनाओं पर निर्भर करती है। इस मामले में FDA का आरोप है कि संबंधित रेस्टोरेंट में पाया गया उत्पाद असली डेयरी पनीर नहीं था और राज्य में इसके इस्तेमाल पर रोक लागू थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट की यह टिप्पणी केवल एक रेस्टोरेंट की लाइसेंस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि ग्राहकों को यह जानने का अधिकार है कि उन्हें वास्तव में क्या परोसा जा रहा है। मेन्यू में किसी खाद्य पदार्थ का नाम कुछ और हो और ग्राहक को बिना बताए कोई दूसरा विकल्प दिया जाए, तो यह पारदर्शिता और उपभोक्ता हित के गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल Udupi Swaad Restaurant को FDA की लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ अंतरिम राहत नहीं मिली है। FDA का विस्तृत जवाब आने के बाद 7 सितंबर को मामले में आगे सुनवाई होगी।